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चांदी ने कब-कब मारी पलटी, रातोंरात कंगाल हो गए बड़े-बड़े अमीर, जानें सबसे बड़ी गिरावटें

Silver Price Down: चांदी ने हर उछाल पर सपने दिखाए और हर गिरावट पर सबक सिखाया है. हाल ही में चांदी में आई बड़ी गिरावट इस बात का सबूत है. आइए जानें कि चांदी ने कब-कब खेल पलटा.

चांदी को कभी सुरक्षित निवेश का विकल्प माना गया था, लेकिन वही कई बार निवेशकों के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुई है. चांदी की कीमतें जब आसमान छूती हैं, तब लालच बढ़ता है और जब अचानक जमीन पर गिरती हैं, तब सिर्फ अफसोस बचता है. हाल ही में चांदी के दाम बहुत तेजी से ऊपर की ओर बढ़े थे, लेकिन बीते दिन चांदी इतनी जबरदस्त टूटी है कि लोगों की नजर में कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या चांदी वाकई भरोसे का सौदा है या इतिहास खुद को दोहराने वाला है? आइए जानें कि चांदी ने कब-कब पलटी मारी है. 

रिकॉर्ड बनाती चांदी और अचानक आई बड़ी गिरावट

चांदी के दाम हाल के महीनों में लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे थे. अंतरराष्ट्रीय बाजार में 29 दिसंबर की सुबह चांदी ने इतिहास रचते हुए करीब 2.54 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिक पाई. महज एक घंटे के अंदर ही चांदी करीब 21,500 रुपये प्रति किलो तक टूट गई. इस अचानक गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया और बाजार में हलचल मचा दी. यही वह पल था जिसने फिर से चांदी के काले इतिहास की याद दिला दी.

क्यों कहलाती है चांदी ‘डेविल्स मेटल’

निवेश की दुनिया में चांदी को अक्सर ‘डेविल्स मेटल’ यानी शैतान की धातु कहा जाता है. इसकी वजह है इसकी अत्यधिक अस्थिर प्रकृति. जिस तेजी से चांदी में उछाल आता है, उसी रफ्तार से वह गायब भी हो जाता है. सोने के मुकाबले चांदी में उतार-चढ़ाव कहीं ज्यादा तेज रहा है. पिछले करीब 50 सालों में चांदी ने सिर्फ तीन बार बड़ी उछाल दिखाई और हर बार उसके बाद निवेशकों को लंबे समय तक नुकसान झेलना पड़ा.

1980 की सबसे कुख्यात गिरावट

चांदी के इतिहास की सबसे चर्चित और डरावनी कहानी जनवरी 1980 से जुड़ी है. अमेरिका के अरबपति भाई नेल्सन बंकर हंट और विलियम हंट ने चांदी के बाजार पर कब्जा करने की कोशिश की थी. उन्होंने दुनिया की लगभग एक तिहाई चांदी जमा कर ली, जिससे कीमतें 6 डॉलर प्रति औंस से उछलकर 49 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गईं.

हंट ब्रदर्स का दांव था कि बढ़ती महंगाई से डॉलर कमजोर होगा और चांदी मजबूत बनेगी. इसके लिए उन्होंने भारी उधार लेकर चांदी खरीदी और फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट को कोलैटरल बनाया. जब नियामकों ने हस्तक्षेप कर मार्जिन पर नए फ्यूचर्स सौदों पर रोक लगाई, तो पूरा खेल पलट गया.

27 मार्च 1980 को हंट ब्रदर्स मार्जिन कॉल पूरी नहीं कर पाए. नतीजा यह हुआ कि एक ही दिन में चांदी 50 प्रतिशत से ज्यादा टूट गई. अरबों डॉलर का नुकसान हुआ, हंट भाइयों को दिवालियापन तक का सामना करना पड़ा और हजारों निवेशक बर्बाद हो गए. इसी घटना के बाद चांदी की बदनामी शैतान की धातु के रूप में पक्की हो गई.

2011- कर्ज संकट और दूसरी बड़ी चोट

पहली बड़ी तबाही के बाद चांदी को फिर से ऊंचाई पर पहुंचने में 31 साल लगे. साल 2011 में अमेरिका के कर्ज संकट और 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के असर ने निवेशकों को डरा दिया. सुरक्षित निवेश की तलाश में सोना और चांदी दोनों की मांग बढ़ी. इस दौर में चांदी फिर करीब 50 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गई, जो लगभग 1980 के रिकॉर्ड के बराबर था. लेकिन जैसे ही अमेरिका का कर्ज संकट संभला, चांदी की चमक फीकी पड़ने लगी. सिर्फ छह महीनों में कीमतें 30 प्रतिशत से ज्यादा गिर गईं और अगले करीब 14 साल तक चांदी उस स्तर के आसपास भी नहीं पहुंच सकी. 

2025 में तीसरी उछाल और फिर वही डर

अब तीसरी बड़ी उछाल 2025 में देखने को मिली है. अक्टूबर से ही चांदी लगातार नए ऑलटाइम हाई बना रही थी. साल की शुरुआत से कीमतों में लगभग 100 प्रतिशत तक का उछाल देखा गया, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी फिर बढ़ी. लेकिन हालिया तेज गिरावट ने यह साफ कर दिया कि चांदी की तेजी जितनी आकर्षक है, जोखिम उतना ही बड़ा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक संकेत और सट्टेबाजी चांदी को बेहद अस्थिर बनाते हैं, इसलिए बिना इतिहास समझे इसमें निवेश करना खतरनाक हो सकता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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