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Rules For Heritage In India: क्या औरंगजेब की कब्र हटा सकती है सरकार? जानें ऐसी धरोहरों के लिए क्या होता है नियम

Rules For Heritage In India: देश में औरंगजेब की कब्र को ढहाए जाने की बात की जा रही है, लेकिन देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि कुछ काम कानून के दायरे में करने होंगे. ऐसे में धरोहरों के संरक्षण के लिए क्या नियम है.

Rules For Heritage In India: देश में इस वक्त औरंगजेब की कब्र को लेकर विरोध चल रहा है. ये मामला तब शुरू हुआ जब 3 मार्च को अबू आजमी ने कहा कि वो औरंगजेब को क्रूर शासक नहीं मानते हैं, हमें गलत इतिहास दिखाया गया है. अबू आजमी का कहना था कि औरंगजेब ने कई मंदिर भी बनवाए हैं. इसके अलावा भी उन्होंने तमाम बयानबाजी की है. इस बयानबाजी में आग में घी डालने का काम किया RTI की रिपोर्ट में, जिसमें कहा गया कि सरकार साल में औरंगजेब की कब्र के लिए करीब 2 लाख रुपये खर्च करती है. इसके बाद से औरंगजेब की कब्र को वहां से ढहाए जाने को लेकर विरोध हो रहा है. लेकिन ये कब्र अब धरोहर है और देश में धरोहरों के लिए क्या नियम हैं, चलिए जानते हैं. 

औरंगजेब की कब्र को लेकर क्या बोले देवेंद्र फडणवीस

औरंगजेब की कब्र को लेकर सिर्फ बीजेपी ही नहीं, बल्कि देश के लोग भी चाहते हैं कि मुगल शासक की कब्र को ढहा दिया जाए. लेकिन ये कब्र कांग्रेस के शासनकाल में संरक्षित की गई थी. इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि औरंगजेब की कब्र को कांग्रेस के शासन में भारतीय पुरातत्व विभाग से संरक्षण मिला है. इसका काम एक कानूनी प्रक्रिया के तहत हुआ है, इसलिए उसे हटाने के लिए या फिर बदलाव करने के लिए कानून का पालन करना जरूरी है.

क्या ऐतिहासिक धरोहरों के लिए भी है कानून?

धरोहरों के लिए नियम और कानून की बात करें तो साल 2018 में लाल किले को डालमिया ग्रुप को सौंपे जाने की खबर सामने आई थी. कहा गया था कि मोदी सरकार ने लाल किले को बेच दिया और अब ताजमहल की बारी है. हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ था. ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि ऐतिहासिक धरोहरों के लिए देश में क्या कानून है. इसकी देखभाल कौन करता है और क्या सरकार चाहे तो इनको हटा या बेच सकती है? 

देश में कौन करता है धरोहरों की देखरेख

देश की आजादी के वक्त 2826 ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षण की श्रेणी में रखा गया था. 2014 में ये संख्या बढ़कर 3650 हो गई थी. अब भारत में इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का काम भारतीय पुरातत्व विभाग यानि ASI करता है. संविधान के अनुच्छेद 42 और 51 A(f) देश की धरोहरों के संरक्षण को राष्ट्रीय कर्तव्य घोषित करता है. सभी धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी ASI के पास है. Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act 1958 की धारा 4 (1) के तहत केंद्र सरकार को ये अधिकार प्राप्त है कि वो किसी भी ऐतिहासिक इमारत या अन्य धरोहर को राष्ट्रीय महत्व घोषित कर दे. 

धरोहरों के लिए क्या कहता है संविधान

संविधान के अनुसार संसद द्वारा बनाए कानून के तरह ये राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी कि वो राष्ट्रीय ऐतिहासिक धरोहर, इमारतों और आलेखों का संरक्षण और उसकी सुरक्षा करे. अगर उसे नुकसान पहुंचाने और तोड़फोड़ की कोशिश की जा रही हो तो उससे सरंक्षण दे. उसे हटाने या उसमें बदलाव की कोशिशों से संरक्षण प्रदान करे. कुल मिलाकर ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण और नियमन सरकार की जिम्मेदारी है.

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