(Source: Poll of Polls)
गजब का सीन है...देखिए स्पेस से कैसा दिखता है बिजली से भरा आसमान, जानिए क्यों कड़कती है बिजली
इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जब बादलों में बिजली कड़कती है तो कैसे वो पूरा हिस्सा रौशन हो जाता है. अंतरिक्ष से ये ऐसा लगता है जैसे जुगनुओं का एक पूरा झुंड बादलों के बीच इधर से ऊधर उड़ रहा हो.

अब तक आपने हमेशा आसमान में बिजली कड़कते अपनी छत से ही देखा होगा. कई बार तो बिजली इतनी तेजी से कड़कती है कि ऐसा लगता है जैसे अभी सिर पर ही गिर जाएगी. लेकिन आज हम आपको दिखाने वाले हैं कि जब आप बिजली से भरे आसमान को अंतरिक्ष से देखते हैं तब वो कैसा दिखाई देता है. खासतौर से जब बिजली लगातार कड़क रही हो तब आसमान कैसा हो जाता है ये आप इस वीडियो में देख पाएंगे.
कैसा दिखता है आसमान
eesa नाम के एक यूट्यूब चैनल पर अपलोड एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जब बादलों में बिजली कड़कती है तो कैसे वो पूरा हिस्सा रौशन हो जाता है. अंतरिक्ष से ये ऐसा लगता है जैसे जुगनुओं का एक पूरा झुंड बादलों के बीच इधर से ऊधर उड़ रहा हो. ये पूरा दृश्य काफी शानदार है और आप इसे जब देखेंगे तो लगेगा ही नहीं कि यह पृथ्वी के बाजलों का दृश्य है. बिजली के साथ साथ इस वीडियो में बादलों को भी हवा के साथ बहते देखा जा सकता है, जो देखने में बेहद दिलचस्प लगता है. ये पूरा वीडियो एक तूफान का है जो वेस्ट अफ्रीका के ऊपर से गुजर रहा है. इसे देख कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि तूफानी बादलों में किस तरह की भीषण बिजली मौजूद होती है.
बादलों में बिजली बनती कैसे है?
बादलों में बिजली बनने की प्रक्रिया पूरी तरह से विज्ञान पर आधारित है. दरअसल, जब आसमान में ढेर सारे पानी वाले काले बादल इकट्ठा होते हैं तो बादलों में मौजूद छोटे-छोटे बर्फ के कण जो क्रिस्टल्स के रूप में होते हैं आपस में टकरा कर घर्षण करने लगते हैं. इसी घर्षण से बादलों में मौजूद पानी के कण चार्ज हो जाते हैं. इनमें कुछ कण पॉजिटिव ऊर्जा के होते हैं और कुछ कण निगेटिव ऊर्जा के. जब ये पॉजिटिव और निगेटिव ऊर्जा के कण आपस में टकराते हैं तो इससे बिजली उत्पन्न होती है. जब ये काफी मात्रा में टकराते हैं तो बिजली इतनी तेज चमकती है कि पूरा आसमान रौशन कर देती है और इसके साथ खूब तेज आवाज भी होती है.
ये भी पढ़ें: मानव सभ्यता का सबसे खतरनाक दिन कौन सा था, जानिए कैसे कुछ सेकंड में मर गए थे 8 लाख से ज्यादा लोग?
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL


























