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कितना ताकतवर है OPEC, जिससे बाहर होने का यूएई ने किया ऐलान, क्या करता है यह संगठन?

संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी उत्पादन क्षमता का पूरा लाभ उठाने और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए ओपेक से अलग होने का ऐतिहासिक फैसला किया है. आइए जानें कि OPEC क्या है और यह कैसे काम करता है?

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  • सऊदी अरब के दबदबे से उपजा टकराव यूएई के फैसले की वजह बना.

दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं की रगों में दौड़ने वाले कच्चे तेल के बाजार में इन दिनों एक ऐसी हलचल है, जिसने बड़े-बड़े विशेषज्ञों को चौंका दिया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दुनिया के सबसे ताकतवर तेल संगठन OPEC से बाहर निकलने का औपचारिक ऐलान कर दिया है. यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यूएई न केवल ओपेक का एक पुराना और विश्वसनीय सदस्य रहा है, बल्कि वह दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक भी है. एक ऐसे समय में जब ऊर्जा की कीमतें वैश्विक राजनीति का रुख तय कर रही हैं, यूएई का यह फैसला केवल एक रणनीतिक बदलाव नहीं है, बल्कि यह ओपेक के दशकों पुराने दबदबे को एक खुली चुनौती भी है.

क्या है ओपेक और यह कैसे बना?

ओपेक यानी 'ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज' एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों का प्रतिनिधित्व करता है. इसकी स्थापना सितंबर 1960 में बगदाद सम्मेलन के दौरान हुई थी. शुरुआत में इसमें ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला जैसे पांच संस्थापक देश शामिल थे. उस दौर में दुनिया के तेल संसाधनों पर पश्चिमी देशों की बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कब्जा था, जिन्हें सेवन सिस्टर्स कहा जाता था. इन कंपनियों के प्रभुत्व को खत्म करने और अपने प्राकृतिक संसाधनों पर खुद का हक जताने के लिए इन देशों ने हाथ मिलाया था. आज इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में है, जहां से वैश्विक तेल बाजार की दिशा तय होती है.

क्या काम करता है ओपेक?

ओपेक का काम करने का तरीका पूरी तरह से सप्लाई और डिमांड के खेल पर आधारित है. यह संगठन एक प्राइस कंट्रोलर की भूमिका निभाता है. इसके सदस्य देश समय-समय पर वियना में बैठक करते हैं और सामूहिक रूप से यह तय करते हैं कि रोजाना कितने बैरल तेल का उत्पादन किया जाएगा. इसे उत्पादन कोटा कहा जाता है. जब बाजार में तेल की कीमतें गिरने लगती हैं, तो ओपेक देश उत्पादन में कटौती कर देते हैं, जिससे बाजार में तेल कम हो जाता है और कीमतें फिर से बढ़ने लगती हैं. इसके विपरीत, जब तेल की मांग बहुत ज्यादा होती है, तो उत्पादन बढ़ाकर कीमतों को स्थिर करने की कोशिश की जाती है.

यह भी पढ़ें: ऑयल-फ्री नेशन बनने की कगार पर खड़ा यह देश, पेट्रोल पंपों पर लग रहे ताले; बिना तेल के दौड़ेगी अर्थव्यवस्था

OPEC से यूएई के बाहर निकलने की असली वजह

यूएई का इस संगठन से मोहभंग होने के पीछे कई गहरी आर्थिक और रणनीतिक वजहें हैं. पिछले कुछ वर्षों में यूएई ने अपनी तेल उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया है. वह अपनी इस क्षमता का पूरा उपयोग करना चाहता है, ताकि वह अधिक तेल बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को और मजबूत कर सके. हालांकि, ओपेक के कड़े उत्पादन कोटे के नियमों की वजह से यूएई पर पाबंदियां लगी हुई थीं. ओपेक की सदस्य शर्तों के कारण वह अपनी क्षमता से कम तेल निकाल पा रहा था. यूएई को लगता है कि उसकी भविष्य की योजनाओं और उत्पादन क्षमता के हिसाब से ओपेक के नियम अब उसके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहे हैं.

सऊदी अरब के दबदबे से उपजा टकराव

ओपेक के भीतर सऊदी अरब का हमेशा से ही सबसे ज्यादा दबदबा रहा है. संगठन के बड़े फैसले अक्सर सऊदी अरब की मर्जी के हिसाब से लिए जाते हैं. हाल के वर्षों में यूएई और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा और आर्थिक नीतियों को लेकर मतभेद उभरे हैं. यूएई अब अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना चाहता है और वह नहीं चाहता कि उसके उत्पादन से जुड़े फैसले किसी संगठन के दबाव में लिए जाएं. कतर के 2019 में ओपेक छोड़ने के बाद, यूएई का यह कदम इस संगठन की एकता और भविष्य पर बड़े सवाल खड़े करता है. यह दिखाता है कि अब तेल उत्पादक देश अपनी राष्ट्रीय जरूरतों को संगठन के हितों से ऊपर रख रहे हैं.

क्या OPEC की ताकत अब खत्म हो रही है?

कभी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले ओपेक का प्रभाव अब धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है. अमेरिका में शेल गैस का उत्पादन बढ़ने और रूस जैसे देशों के प्रभाव के कारण अब ओपेक को OPEC+ का सहारा लेना पड़ रहा है. यूएई जैसे प्रभावशाली देश का जाना संगठन के लिए एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक और वित्तीय झटका है. इससे ओपेक की बाजार को नियंत्रित करने की शक्ति कमजोर होगी. अब दुनिया ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रही है, ऐसे में तेल उत्पादक देशों के बीच मची यह होड़ वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे रही है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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