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100 Rupees Coin Release: पहली बार जारी नहीं हुआ 100 रुपये का सिक्का, जानें सरकार ने पहले कब किया था ऐसा?

100 Rupees Coin Release: आरएसएस की शताब्दी पर पीएम मोदी ने दिल्ली में विशेष डाक टिकट और 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया. चलिए जानें कि इससे पहले 100 रुपये का सिक्का कब जारी हुआ.

100 Rupees Coin Release: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में एक विशेष कार्यक्रम का उद्घाटन किया. इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक अनोखा डाक टिकट और 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया, जो संघ की वैचारिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है. चलिए जानें कि इससे पहले कब कब 100 रुपये का सिक्का जारी किया गया था.

कैसा है नया सिक्का?

नए स्मारक सिक्के की बात करें तो इसकी डिजाइन बेहद खास है. सिक्के के एक तरफ भारत का राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ अंकित है, जबकि दूसरी ओर सिंह के साथ वरद मुद्रा में भारत माता की अद्भुत प्रतिमा दिखाई देती है. भारत माता के समक्ष संघ के स्वयंसेवक नमन की मुद्रा में खड़े नजर आ रहे हैं. सिक्के पर संघ का बोध वाक्य भी अंकित किया गया है- “राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम”. इसे देखकर साफ झलकता है कि यह स्मारक सिक्का संघ की विचारधारा और समर्पण भावना का प्रतीक है.

इससे पहले किन मौकों पर जारी किए गए 100 रुपये के सिक्के

स्मारक सिक्कों की परंपरा भारत में पहले से रही है. ज्यादातर तो ये सिक्के आम जनता के लेन-देन के लिए नहीं होते हैं, बल्कि खास अवसरों की यादगार और कलेक्शन करने के लिए सीमित संख्या में जारी किए जाते हैं. इतिहास पर नजर डालें तो 100 रुपये का स्मारक सिक्का पहली बार साल 2010 में जारी हुआ था, जब रवींद्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती के मौके पर इसे ढाला गया था. 

इसके बाद भी कई मौकों पर 100 रुपये के सिक्के जारी किए गए हैं, जैसे अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मशताब्दी, मदन मोहन मालवीय की जयंती, महात्मा गांधी की 150वीं जयंती और अन्ना दुरै की स्मृति में भी 100 रुपये के सिक्के जारी किए जा चुके हैं.

ढलाई के बाद चलन में नहीं आए सिक्के

हालांकि कई बार ऐसा भी हुआ है कि सरकार ने खास सिक्कों की घोषणा की, लेकिन तकनीकी कारणों या नीति संबंधी निर्णयों के चलते उन्हें ढलाई के बाद चलन में नहीं लाया गया. बावजूद इसके, इन सिक्कों का महत्व कम नहीं होता, क्योंकि वे इतिहास और परंपराओं का अमूल्य हिस्सा बन जाते हैं.

यह भी पढ़ें: क्या एशिया कप की ट्रॉफी लेकर पाकिस्तान जा सकते हैं मोहसिन नकवी, कैसे रोक सकता है ICC?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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