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Republic Day 2026: आजादी से अब तक... जानें 1950 से 2025 तक कैसी रही भारत की गणतंत्र यात्रा

साल 2026 में भारत अपना 77 वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, लेकिन यह सफर उस ऐतिहासिक यात्रा का भी प्रतीक है, जिसमें देश ने संविधान के सहारे खुद को लगातार मजबूत किया है.

हर साल 26 जनवरी को पूरा देश गणतंत्र दिवस मनाता है. दरअसल, 26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ और भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में दुनिया के सामने खड़ा हुआ था. साल 2026 में भारत अपना 77 वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, लेकिन यह सफर उस ऐतिहासिक यात्रा का भी प्रतीक है, जिसमें देश ने संविधान के सहारे खुद को लगातार मजबूत किया है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि 1950 से 2025 तक भारत की गणतंत्र यात्रा कैसी रही.

पहली बार कैसे मनाया गया था गणतंत्र दिवस?

26 जनवरी 1950 की सुबह पूरी दिल्ली में उत्सव जैसा माहौल था. देश अपने नए संविधान के साथ एक नई शुरुआत कर रहा था. लोग एक दूसरे को बधाइयां दे रहे थे और मंदिरों में खुशहाली के लिए प्रार्थना हो रही थी. इसी दिन डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली. वहीं गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने उन्हें यह शपथ दिलाई थी. इसके बाद प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और उनके कैबिनेट ने भी पद की शपथ ली. इस ऐतिहासिक मौके के साक्षी कई मेहमान बने थे. यह पूरा आयोजन राजपथ पर हुआ था, 2022 में जिसका नाम बदलकर कर्तव्य पथ कर दिया गया. 

विदेशी मेहमानों को आमंत्रित करने की परंपरा

भारत ने पहले ही गणतंत्र दिवस से ही विदेशी मेहमानों को आमंत्रित करने की परंपरा रही है. 1950 यानी देश के पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो पहले मुख्य अतिथि बने थे. इसके बाद के गणतंत्र दिवस में कई विदेशी राष्ट्राध्यक्षों ने शोभा बढ़ाई. इसी परंपरा को कायम रखते हुए केंद्र सरकार ने इस बार 26 जनवरी के लिए यूरोपीय संघ के दो सबसे बड़े नेताओं को चीफ गेस्ट के रूप में न्योता दिया है. यह पहली बार है जब, यूरोपियन यूनियन की टॉप लीडरशिप को एक साथ इस प्रोग्राम के लिए न्योता दिया गया है. इस साल यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा परेड में शामिल होंगे.

नेशनल स्टेडियम और पहला फ्लाई पास्ट

पहले गणतंत्र दिवस के अवसर पर परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम नेशनल स्टेडियम में आयोजित किए गए थे. शाम के समय राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद घोड़ों की बग्घी में सवार होकर आयोजन स्थल पर पहुंचे. इस दिन दिल्ली ने पहली बार वायु सेना का फ्लाई पास्ट भी देखा, जिसने लोगों को रोमांचित कर दिया था.

1955 से शुरू हुई परेड की परंपरा

गणतंत्र दिवस परेड का नियमित आयोजन 1955 से शुरू हुआ था. शुरुआती सालों में परेड नेशनल स्टेडियम, लाल किला और रामलीला मैदान में होती थी. बाद में इसमें झांकियां, वीरता पुरस्कार विजेता बच्चों, सेना और अर्धसैनिक बलों के करतब शामिल होते चले गए. वहीं लंबे समय तक परेड की कमेंट्री करने वाले ब्रिगेडियर चितरंजन सावंत बताते थे कि उस समय झांकियां और वीर सैनिकों का सम्मान दर्शकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता था.

गणतंत्र दिवस परेड में बालवीरों की भागीदारी
1959 से गणतंत्र दिवस परेड में वीरता पुरस्कार से सम्मानित बच्चों को शामिल किया जाने लगा. यह बच्चे साहस और सूझबूझ की मिसाल बनकर राष्ट्रपति को सलामी देते हैं. पहले वह हाथियों पर सवार होते थे, लेकिन अब खुली जीप में नजर आते हैं.

झांकियों की परंपरा

गणतंत्र दिवस की झांकी हमेशा से देश की सांस्कृतिक विविधता और विकास को दर्शाती रही है. अलग-अलग दौर में शिक्षा, हरित क्रांति, सामाजिक सुधार, संस्कृति और देश की उपलब्धियां को झांकियों के जरिए पेश किया गया.

परेड के रूट में बदलाव

वहीं 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले के बाद 2002 से परेड का रूट बदल गया. इसके बाद परेड इंडिया गेट से शुरू होकर आईटीओ और दरियागंज होते हुए लाल किले पर समाप्त होने लगी.

संविधान के सहारे बदला भारत

देश में संविधान लागू होने के बाद भारत ने कई बड़े बदलाव देखें. सबको मतदान का अधिकार मिला, सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार हुआ, राज्यों का पुनर्गठन हुआ और पंचायती राज व्यवस्था से लोकतंत्र को गांव-गांव तक पहुंचाया गया. वहीं सूचना का अधिकार जैसे कानूनों ने शासन को ज्यादा पारदर्शी बनाया.
 

कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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