Putin India Visit: मौत को मात देकर पैदा हुए थे पुतिन, पिता ने नहीं किया होता यह काम तो मुश्किल था जन्म
Putin India Visit: पुतिन का दुनिया में जन्म एक ऐसा मोड़ था जहां मौत पहले पहुंच चुकी थी, लेकिन जिंदगी ने आखिरी क्षण में रास्ता बदल दिया. उस समय पुतिन के पिता का अहम रोल था.

Putin India Visit: दिल्ली में आज शाम 6:30 बजे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पहुंचने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है. भारत-अमेरिका-रूस के त्रिकोणीय समीकरण के बीच यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है. अमेरिकी एक्सट्रा टैरिफ के बाद रूस से भारत की तेल खरीद को लेकर फैली नाराजगी और दबाव के बीच दुनिया की निगाहें इस बैठक के संभावित समझौतों पर टिकी हैं, लेकिन इसी गर्म माहौल के बीच पुतिन की जिंदगी से जुड़ी एक ठंडी लेकिन रहस्यमयी कहानी फिर चर्चा में आ गई है- एक ऐसी कहानी जिसमें उनका जन्म भी मौत को मात देकर हुआ था. आइए जानें.
हिलेरी क्लिंटन की किताब से सामने आया किस्सा
यह किस्सा सामने आया था 2014 में, जब हिलेरी क्लिंटन ने अपनी किताब ‘हार्ड च्वॉइस’ में एक अनसुनी घटना का जिक्र किया था. हिलेरी के मुताबिक, पुतिन ने उनसे बताया था कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान लेनिनग्राद की घेराबंदी के बीच उनकी मां को मृत मान लिया गया था. शहर तब भुखमरी, बर्फ और बमबारी से टूटा पड़ रहा था. लाशें इतनी थीं कि पहचान होना भी मुश्किल था. क्लिंटन लिखती हैं कि पुतिन ने उन्हें बताया कि छुट्टी पर घर लौटे पिता ने जैसे ही अपार्टमेंट के पास लाशों के ढेर देखे, उनका दिल बैठ गया. अचानक एक महिला के पैर में दिखे जूते ने उन्हें चौंका दिया. वे जूते उनकी पत्नी के थे.
पुतिन की मां का बचना करिश्मे से कम नहीं
वे दौड़कर पहुंचे, लेकिन उनका विश्वास डगमगा चुका था, लेकिन जैसे ही उन्होंने पत्नी के चेहरे को झुककर देखा एक हल्की-सी सांस, एक धीमी-सी आह और उम्मीद की एक झिलमिलाहट उठी. ईश्वर का शुक्र था कि उनकी पत्नी जिंदा थीं, कमजोर, बेहोश, लेकिन जिंदा थीं. पिता उन्हें घर ले गए, इलाज कराया और उनकी जिंदगी जैसे किसी चमत्कार से बच गई.
हिलेरी लिखती हैं कि इस कहानी को सुनकर उन्होंने रूस में उस समय के अमेरिकी राजदूत माइक मैकफॉल से पूछा, लेकिन उन्होंने भी कहा कि उन्होंने ऐसा किस्सा पहले कभी नहीं सुना था. हिलेरी यह भी जोड़ती हैं कि वह इस घटना को सत्यापित नहीं कर पाईं, मगर यह घटना उनके मन में बार-बार लौटती रही.
पुतिन की किताब में किसी और किस्से का है जिक्र
लेकिन पूरी तस्वीर यहीं पूरी नहीं होती है. पुतिन की 2000 में प्रकाशित आत्मकथा ‘फर्स्ट पर्सन’ इस कहानी को एक अलग मोड़ देती है. अपनी किताब में पुतिन बताते हैं कि उनकी मां भूख से बेहोश हुई थीं और लोगों ने उन्हें उन लाशों के साथ रख दिया था, जिन्हें शहर से हटाया जा रहा था. उनका कहना था कि उनके पिता उस समय मोर्चे पर लड़ रहे थे और घर में नहीं थे. पुतिन लिखते हैं कि उनके चाचा ने उनकी मां की मदद की, उन्हें खाना खिलाया और एक दिन जब चाचा का ट्रांसफर हुआ, तब भूख से मां गिर पड़ीं और मृत मान ली गईं. सौभाग्य से वह समय रहते होश में आईं.
सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुआ था पुतिन का जन्म
इन दोनों कहानियों में एक बात समान है कि पुतिन का जन्म किसी सामान्य परिस्थिति में नहीं हुआ था. युद्ध, भूख, ठंड, मौत और अनिश्चितता ने उनके परिवार को घेरा हुआ था. किसी एक पल की जागरूकता, किसी एक सांस की वापसी और किसी एक व्यक्ति के प्रयास ने इतिहास को मोड़ दिया.
1952 में जन्मे पुतिन का अस्तित्व ही उस चमत्कार की देन है, जिसने उनकी मां को मौत से खींचकर वापस जीवन दिया.
रूस का सबसे प्रभावी नेता भारत की जमीं पर
इसी वजह से जब पुतिन जैसे शक्तिशाली नेता आज भारत की सरजमीं पर कदम रखेंगे, तो उनके पीछे सिर्फ राजनीति, शक्ति और रणनीति की कहानी नहीं होगी. उनके जीवन की शुरुआत में ही छिपी वह जंग जहां उनके न आने की संभावना ज्यादा थी आज भी उतनी ही सिहराहट पैदा करती है. एक पिता की तत्परता, युद्ध के बीच एक मां की जिद और समय की एक छोटी-सी चूक इन तीनों ने मिलकर उस व्यक्ति को जन्म दिया, जो आज रूस की राजनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा है.
यह भी पढ़ें: किस देश के हेड ऑफ स्टेट की उम्र सबसे ज्यादा, जानें दुनिया के ग्लोबल लीडर्स की औसत उम्र कितनी?
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL


























