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किसी देश ने परमाणु हमला कर दिया, दूसरे देश को कितनी देर पहले लग जाती है इसकी भनक? 

परमाणु शक्ति संपन्न देशों को परमाणु बम के इस्तेमाल का आदेश देने से पहले एक प्रक्रिया से गुजरना होता है, जिसमें न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी को एक्टिव करने से पहले पूरी कैबिनेट की सहमति की जरूरत होती है.

परमाणु बम...इंसानों का बनाया वह खतरनाक हथियार, जिसका प्रयोग दुनिया पर सिर्फ एकबार हुआ है. करीब आठ दशक पहले अमेरिका ने हिरोशिमा-नागासाकी पर किया गया था. इस हमले को एक लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन इसकी खौफनाक यादें आज तक ताजा हैं. इसके बाद दुनिया की किसी जंग में परमाणु बम इस्तेमाल तो नहीं हुआ, लेकिन इसका जिक्र हर युद्ध में होता है. 

रूस कई बार यूक्रेन व उसके मित्र देशों को परमाणु हमले की चेतावनी दे चुका है. वहीं, मिडिल ईस्ट में जब तनाव बढ़ा तब भी परमाणु हमले की चर्चा तेज हो गई. यूं तो परमाणु हमला इतना आसान नहीं है और इस हमले के लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. हालांकि, अगर किसी देश पर परमाणु हमला हो जाता है, तो इसका पता कैसे चलेगा? कितनी तबाही होगी? हमला झेलने वाला देश कितनी देर पहले इसके बारे में पता कर सकता है? आज हम इस आर्टिकल में यह सबकुछ जानेंगे... 

दुनिया के सिर्फ 9 देशों के पास परमाणु बम

दुनिया के सिर्फ 9 देश परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं. इसमें अमेरिका, रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इजराइल, दक्षिण कोरिया, फ्रांस और ब्रिटेन. खास बात है कि दुनिया के कुल परमाणु बमों का एक हिस्सा अमेरिका और रूस के पास ही है. आंकड़ों को देखें तो दुनिया के पास इस समय 12, 121 परमाणु बम हैं, जिनमें रूस के पास 5580 और अमेरिका के पास 5044 परमाणु हथियार हैं. यानी इन दोनों देशों के पास दुनिया के 90 फीसदी परमाणु बम हैं. 

कैसे लगती है परमाणु हमले की भनक? 

कोई भी देश जब दुश्मन देश पर परमाणु हमला करता है, तो इसके लिए काफी तैयारी करनी होती है. परमाणु हमले को लेकर हर देश में नियम बनाए गए हैं. परमाणु शक्ति संपन्न देशों को परमाणु बम के इस्तेमाल का आदेश देने से पहले एक प्रक्रिया से गुजरना होता है, जिसमें न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी को एक्टिव करने से पहले पूरी कैबिनेट की सहमति की जरूरत होती है. इसके अलावा खुफिया एजेंसियां भी ऐसे हमलों पर खास नजर रखती हैं. 

सैटेलाइट्स से चलता है पता

जब दो देशों के बीच युद्ध जैसे हालात उत्पन्न होते हैं तो परमाणु शक्ति संपन्न देशों की न्यूक्लियर साइट्स पर सैटेलाइट्स के जरिए नजर रखी जाती है. इन साइट्स की गतिविधियों और रिपोर्ट्स के आधार पर परमाणु हमले की चेतावनी दी जाती है. अमेरिका, रूस जैसे देशों की कई सैटेलाइट्स परमाणु शक्ति संपन्न देशों पर नजर रखती हैं और हमले की तैयारी कर रहे देशों के बारे में पहले से ही आगाह करती रहती हैं. 

फॉलआउट के बाद क्या होता है? 

जब परमाणु हमला होता है तो उसका शुरुआती फॉलआउट बहुत ही खतरनाक होता है. फॉलआउट वाली साइट्स पर रेडियोधर्मी किरणें तेजी से फैलती है, जो आसपास की संरचनाओं को नुकसान पहुंचाती हैं. इसके आलवा विस्फोट के बाद तेजी से आग और गर्मी निकलती है, जो कई मील तक तबाही फैला सकती हैं. परमाणु हमला होने के बाद आसपास के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी काम करना बंद कर सकते हैं. 

यह भी पढ़ें: सीजफायर तोड़ने वाले देश की कहां होती है शिकायत, क्या ऐसे मामलों में मिलती है सजा?

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