हिंदू ही नहीं इन धर्मों के लोग भी बांग्लादेश में बेहाल, जानें 1971 से कितनी घटी आबादी?
बांग्लादेश में हिंसक झड़पों के दौरान एक हिंदू नागरिक दीपू दास की हत्या की कर दी गई. इस घटना के बाद भारत में भी आक्रोश देखने को मिला. दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा एक बार फिर चर्चा में है. हाल के दिनों में हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने न सिर्फ बांग्लादेश के अंदर बल्कि भारत में भी चिंता बढ़ा दी है. दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में बांग्लादेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. इन घटनाओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बांग्लादेश में सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि अन्य अल्पसंख्यक समुदाय की हालत भी लगातार खराब होती गई है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं के अलावा किन धर्म के लोग भी बेहाल है और 1971 से कितनी आबादी घटी है?
अल्पसंख्यकों पर हिंसा से बढ़ी चिंता
हाल ही में बांग्लादेश में हिंसक झड़पों के दौरान एक हिंदू नागरिक दीपू दास की हत्या की कर दी गई. इस घटना के बाद भारत में भी आक्रोश देखने को मिला. दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और सरकार इस पर प्रभावी कदम नहीं उठा रही है.
1971 के बाद बदले हालात
बांग्लादेश की आजादी के बाद से ही वहां अल्पसंख्यक समुदायों की आबादी में लगातार गिरावट दर्ज की गई है. 1971 की जनगणना में जहां बांग्लादेश में हिंदू आबादी 22 प्रतिशत थी. वहीं, 1991 तक यह घटकर 10.5 प्रतिशत रह गई. 2011 में तो यह आंकड़ा 8.5 प्रतिशत पहुंच गया और 2022 की जनगणना के अनुसार हिंदू आबादी अब सिर्फ 7.95 प्रतिशत रह गई. आंकड़े बताते हैं कि 1901 में पूर्वी बंगाल में हिंदू आबादी करीब 33 प्रतिशत थी, जो 2022 तक घटकर 7.9 प्रतिशत रह गई है. गिरावट दशकों से जारी राजनीतिक स्थिरता और हिंसा की और इशारा मानी जाती है.
सिर्फ हिंदू ही नहीं, दूसरे अल्पसंख्यक भी प्रभावित
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट्स बताती है कि बांग्लादेश में हिंसा का असर सिर्फ हिंदुओं तक सीमित नहीं रहा. बौद्ध, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय भी अलग-अलग दौर में हिंसा, लूटपाट और जबरन बेदखली का शिकार हुए हैं. वहीं अल्पसंख्यकों की जमीन छीनी जाने, घर जलाए जाने और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाएं बांग्लादेश से समय-समय पर सामने आती रही है.
बांग्लादेश में हिंसा का लंबा इतिहास
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा कोई नई बात नहीं है. 1990 और 2000 के दशक की हिंसा और हाल के वर्षों में हुए हमले इस बात की गवाही देते हैं. वहीं, 2023 और 24 में बांग्लादेश में हिंसा की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई. 2024 में ही 2000 से ज्यादा घटनाओं की रिपोर्ट सामने आई, जिनमें ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया गया.
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