Hilton Hotel Nepal: नेपाल की हिंसा में राख हो गया 5 अरब का हिल्टन होटल, जानें अब कितना मिलेगा बीमा क्लेम?
Hilton Hotel Nepal: हिल्टन होटल का राख होना सिर्फ प्रॉपर्टी का नुकसान नहीं, बल्कि नेपाल की अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र के लिए भी करारा झटका है. चलिए जानें कि इसके लिए कितना बीमा क्लेम मिल सकता है.

Hilton Hotel Nepal: नेपाल इन दिनों हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है. इसी बीच काठमांडू की शान माना जाने वाला हिल्टन होटल भी आगजनी और हिंसक भीड़ की चपेट में आ गया. बताया जा रहा है कि इस होटल में करीब 5 अरब नेपाली रुपये (लगभग 310 करोड़ भारतीय रुपये) का निवेश हुआ था. लेकिन Gen-Z के विरोध ने इस होटल को कुछ ही घंटों में राख में तब्दील कर दिया. चलिए जानें कि इसके लिए अब कितना क्लेम मिलेगा.
क्या है हिल्टन होटल का महत्व?
नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित यह होटल पर्यटन के लिहाज से बेहद अहम था. यहां हर साल हजारों विदेशी पर्यटक रुकते थे. रिपोर्ट्स की मानें तो नेपाल की GDP में पर्यटन क्षेत्र का योगदान लगभग 6.7% है और विदेशी मुद्रा का बड़ा हिस्सा इसी इंडस्ट्री से आता है. ऐसे में इस होटल का नुकसान सिर्फ मालिक के लिए ही नहीं, बल्कि नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा झटका है.
कितना हो सकता है बीमा क्लेम?
नेपाल के बीमा नियमों के तहत बड़े कमर्शियल भवनों का बीमा कई चरणों में होता है, जिसमें भवन संरचना, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और थर्ड-पार्टी कवर शामिल रहते हैं. रिपोर्ट्स बताती हैं कि होटल का क्लेम उसकी बीमा पॉलिसी पर निर्भर करता है. आमतौर पर कवर अमाउंट 70% से 85% तक ही क्लेम किया जा सकता है.
यानि कि अगर होटल का कुल नुकसान 5 अरब नेपाली रुपये का हुआ है, तो बीमा कंपनी करीब 3.5 से 4.25 अरब रुपये तक का भुगतान कर सकती है. लेकिन नेपाल इंश्योरेंस एसोसिएशन की मानें तो बीमा कंपनी को 31अरब रुपये से ज्यादा के क्लेम का सामना करना पड़ सकता है.
क्लेम मिलने में लगेगा समय
नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता और हाल की हिंसा को देखते हुए बीमा कंपनियां नुकसान की जांच करने में समय ले सकती हैं. क्लेम प्रक्रिया में प्रॉपर्टी वैल्यूएशन, फॉरेन्सिक रिपोर्ट और पुलिस इन्वेस्टिगेशन जरूरी होते हैं. जानकारों का मानना है कि हिल्टन होटल को क्लेम की पूरी राशि पाने में 6 महीने से 1 साल तक का समय लग सकता है.
यह भी पढ़ें: कुत्तों को कहां ट्रेंड करती है इंडियन आर्मी, क्या इनके लिए भी बनाए गए हैं ट्रेनिंग सेंटर्स
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















