नेपाल के रसुवा में 20 मिनट में मची तबाही, कैसे आई भयानक बाढ़? पूरी टाइमलाइन
नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी में अचानक आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई. कैसे 20 मिनट में सबकुछ हो गया तबाह? जानें भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ की पूरी टाइमलाइन.

नेपाल के उत्तरी जिले रसुवा में बुधवार (26 अगस्त) की सुबह अचानक ऐसा मंजर बना, जिसने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया. बताया जा रहा है कि तिब्बत से आने वाली भोटेकोशी नदी अचानक उफान पर आ गई. पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि रास्ते में आने वाले घर, दुकानें, गाड़ियां, पुल, सड़कें और बिजली परियोजनाएं बह गईं. इसका सबसे ज्यादा असर रसुवा के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके में देखने को मिला.
माना जा रहा है कि इस हादसे में काफी लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लापता बताए जा हे हैं. फिलहाल, नेपाल के पर्यटन बोर्ड ने प्रभावित इलाके से 384 यात्रियों के लापता होने की शुरुआती सूची दी है, जिनमें 105 भारतीय भी शामिल हैं.
आखिर रसुवा में हुआ क्या?
इस घटना को समझने के लिए सबसे पहले भोटेकोशी नदी को समझना जरूरी है. यह नदी तिब्बत की तरफ से नेपाल में आती है और रसुवा के पहाड़ी इलाके से गुजरती है. इसके बाद भोटोकोशी नदी का पानी त्रिशूली नदी में पहुंचता है. बुधवार सुबह इसी नदी में अचानक काफी ज्यादा पानी आ गया.
सबसे अहम बात यह है कि रसुवा में उस समय ऐसी भारी बारिश नहीं हो रही थी, जिससे सामान्य तौर पर इतनी बड़ी बाढ़ आ सके. नेपाल के मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले 24 घंटे के दौरान रसुवा के कुछ हिस्सों में बारिश हुई थी, लेकिन वह करीब 7 मिलीमीटर थी. ऐसे में बारिश को बाढ़ की मुख्य वजह नहीं माना जा रहा है.
8:37 बजे आया भूकंप, फिर भयावह हुआ हादसा
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में हादसे की शुरुआती जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था. अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण यानी USGS ने भी तिब्बती क्षेत्र में इसी समय करीब 4.4 तीव्रता के भूकंप की जानकारी दर्ज की है.
दावा है कि भूकंप के बाद बर्फीली चट्टान का भूस्खलन हुआ, जो ल्हेन्डे खोला नदी में जा गिरा और नदी के पानी का रास्ता रुक गया. कुछ समय तक यह पानी प्राकृतिक रुकावट के पीछे जमा रहा और जब यह रुकावट टूटी तो निचले इलाकों में जलप्रलय आ गई. अचानक आए इस पानी ने अपने रास्ते में आई हर चीज को तबाह कर दिया.
8:40 से 9 बजे के बीच पानी ने पकड़ी रफ्तार
जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 8:40 बजे भोटेकोशी में अचानक बाढ़ की स्थिति बनी. करीब 9 बजे तक पानी रसुवा के तिमुरे इलाके में बेहद खतरनाक रूप ले चुका था. अधिकारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सबकुछ बहुत तेजी से हुआ. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि सुबह बेहद तेज धमाके जैसी आवाज हुई. इसके बाद लोग चीखते हुए सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे.
महज 20-25 मिनट में सबकुछ तबाह
सुबह 8:37 बजे आए भूकंप और करीब 9 बजे बाढ़ को देखा जाए तो करीब 20-25 मिनट में सबकुछ तबाह हो गया. बाढ़ का असर सबसे पहले तिमुरे और उसके आसपास के इलाके में पड़ा. यह नेपाल-चीन सीमा के पास सबसे अहम इलाका है. यहां बाजार, सड़क, पुलिस चौकियां, वाहन और दूसरी संपत्तियां पानी और मलबे की चपेट में आ गईं.
इसके बाद स्याफ्रुबेसी और भोटेकोशी के किनारे बसे दूसरे इलाकों में भी तबाही आ गई. कई जगह घर और दुकानें बह गईं. सड़कें टूट गईं और पुल पानी में समा गए. रसुवागढ़ी सीमा से जुड़े व्यापारिक और परिवहन ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है.
नेपाल के सड़क विभाग के मुताबिक, बेत्रावती से रसुवागढ़ी तक करीब 42 किलोमीटर सड़क कई जगहों पर बाढ़ से डैमेज हो गई और कंक्रीट से बने कई पुल भी बह गए. स्याफ्रुबेसी से सीमा की ओर जाने वाले करीब 16 किलोमीटर हिस्से की स्थिति का आकलन अभी बाकी है.
बिजली परियोजनाओं को भी बड़ा नुकसान
बाढ़ सिर्फ बस्तियों और सड़कों तक सीमित नहीं रही. इसकी चपेट में कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और बिजली ट्रांसमिशन ढांचे भी आ गए. नेपाल विद्युत प्राधिकरण के मुताबिक, रसुवागढ़ी, चिलिमे, त्रिशूली-3A, त्रिशूली-3B हब 220 kV सबस्टेशन, त्रिशूली हाइड्रोपावर स्टेशन और देवीघाट हाइड्रोपावर स्टेशन समेत कई अहम पावर प्रोजेक्ट डैमेज हो गए, जिससे बिजली उत्पादन और सप्लाई दोनों पर असर पड़ा है.
कई इलाकों में अलर्ट जारी
रसुवा में तबाही मचाने के बाद पानी त्रिशूली नदी की ओर आगे बढ़ा. इस दौरान लोगों को नदी के किनारे से दूर रहने की चेतावनी दी गई. वहीं, बाढ़ का पानी धादिंग के गल्छी इलाके तक पहुंच गया. ऐसे में रसुवा के अलावा नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन आदि जिलों में नदी किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट जारी किया गया है.






















