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MP and Minister Salary Rules : सांसद के साथ मंत्री भी, जानिए क्या ऐसे वक्त में दो तनख्वाह उठाते हैं नेताजी? क्या कहता है नियम

MP and Minister Salary Rules : ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या मंत्री बनने के बाद वह व्यक्ति सांसद और मंत्री दोनों पदों की अलग-अलग तनख्वाह लेता है.

MP and Minister Salary Rules : भारत में कई बार ऐसा होता है कि कोई नेता पहले सांसद चुना जाता है और बाद में उसे मंत्री बना दिया जाता है. ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या मंत्री बनने के बाद वह व्यक्ति सांसद और मंत्री दोनों पदों की अलग-अलग तनख्वाह लेता है और क्या उसे दो सैलरी मिलती है या फिर सिर्फ एक पद का वेतन मिलता है. इस सवाल को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि सांसद के साथ मंत्री बनने पर भी क्या नेताजी दो तनख्वाह उठाते हैं और इसे लेकर नियम क्या कहता हैं. 

सांसद के साथ मंत्री बनने पर भी क्या नेताजी दो तनख्वाह उठाते हैं?

अगर कोई सांसद (MP) बाद में केंद्रीय मंत्री बन जाता है, तो उसे सांसद और मंत्री दोनों पदों की अलग-अलग पूरी तनख्वाह नहीं मिलती है. भारत में ज्यादातर केंद्रीय मंत्री पहले से लोकसभा या राज्यसभा के सदस्य होते हैं, लेकिन मंत्री बनने के बाद उन्हें मंत्री पद के लिए तय वेतन, भत्ते और सरकारी सुविधाएं दी जाती हैं. सांसद और मंत्री की दो अलग-अलग बेसिक सैलरी जोड़कर नहीं दी जाती है. हालांकि मंत्री बनने के बाद भी वह सांसद बना रहता है, इसलिए उसे सांसद के तौर पर मिलने वाले कुछ अधिकार और सुविधाएं मिल सकती हैं, लेकिन वेतन मुख्य रूप से मंत्री पद के नियमों के अनुसार ही मिलता है.
 
नियम क्या कहते हैं?

मंत्रियों के वेतन, भत्तों और सुविधाओं को मंत्रियों का वेतन और भत्ते अधिनियम, 1952 (The Salaries and Allowances of Ministers Act, 1952) के तहत तय किया जाता है. इस कानून के सेक्शन 3(1) में साफ किया गया है कि जो सांसद मंत्री बनते हैं, उन्हें मंत्री के रूप में वेतन दिया जाता है यानी मंत्री बनने के बाद उन्हें सांसद और मंत्री दोनों पदों का अलग-अलग वेतन नहीं मिलता है. 

मंत्री बनने के बाद क्या सुविधाएं मिलती हैं?

मंत्री पद के अनुसार कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं. इसमें सरकारी आवास, स्टाफ, वाहन और अन्य आधिकारिक सुविधाएं शामिल होती हैं. हालांकि सांसद के रूप में मिलने वाले कुछ संसदीय अधिकार और भत्ते नियमों के अनुसार जारी रह सकते हैं, लेकिन दो अलग-अलग मूल वेतन नहीं दिए जाते हैं. 

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सांसद का वेतन कितना होता है?

सांसदों की सैलरी और भत्ते समय-समय पर संशोधित किए जाते हैं. वर्तमान व्यवस्था के अनुसार सांसदों का मूल वेतन 1.24 लाख रुपये प्रति माह है. इसके अलावा संसद या समिति की बैठकों में शामिल होने पर उन्हें 25,000 रुपये प्रतिदिन का दैनिक भत्ता मिलता है. सांसदों को हर महीने 87,000 रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और कार्यालय संचालन साथ ही मतदाताओं से संपर्क बनाए रखने के लिए अलग-अलग भत्ते भी दिए जाते हैं. वहीं अगर कोई सांसद मंत्री बन जाता है तो उसे सांसद की मूल सैलरी नहीं, बल्कि मंत्री पद के लिए तय वेतन और सुविधाएं मिलती हैं. 

मंत्री का वेतन कितना होता है?

मुख्यमंत्री को मिलने वाला वेतन हर राज्य में अलग-अलग होता है.आमतौर पर किसी मुख्यमंत्री को हर महीने करीब 1 लाख रुपये से लेकर 4.5 लाख रुपये तक वेतन मिल सकता है, जिसमें मूल वेतन के साथ कई तरह के भत्ते भी शामिल होते हैं. वेतन के अलावा मुख्यमंत्री को सरकारी बंगला, आधिकारिक वाहन और ड्राइवर, यात्रा सुविधा, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाएं, कार्यालय स्टाफ, टेलीफोन और इंटरनेट जैसी कई सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं. कई राज्यों में कार्यकाल पूरा होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों को पेंशन और अन्य रिटायरमेंट फायदे भी दिए जाते हैं. 

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