यह थी मुगल साम्राज्य की सबसे ताकतवर महिला, अपने सबसे करीबी से मिला था धोखा
आमतौर पर हम मुगल इतिहास में अकबर, हुमायूं या औरंगजेब जैसे शासकों के बारे में पढ़ते हैं, लेकिन इस साम्राज्य में कुछ ऐसी शक्तिशाली महिलाएं भी थीं जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर सत्ता को प्रभावित किया.

मुगल साम्राज्य भारत के इतिहास का एक बहुत बड़ा और प्रभावशाली दौर रहा है. इसकी शुरुआत 1526 में बाबर ने की थी और कई सदियों तक इसने भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया. इस दौरान कला, संस्कृति, वास्तुकला और प्रशासन में बड़े बदलाव आए. आमतौर पर हम मुगल इतिहास में अकबर, हुमायूं या औरंगजेब जैसे शासकों के बारे में पढ़ते हैं, लेकिन इस साम्राज्य में कुछ ऐसी शक्तिशाली महिलाएं भी थीं जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर सत्ता को प्रभावित किया. तो आइए जानते हैं कि मुगल साम्राज्य की सबसे ताकतवर महिला कौन थी और कैसे उन्हें अपने सबसे करीबी से धोखा मिला था.
मुगल साम्राज्य की सबसे ताकतवर महिला कौन थी
मुगल साम्राज्य की सबसे ताकतवर महिला माहम अंगा थी, जिन्हें मुगल साम्राज्य की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में भी गिना जाता है. उन्होंने न सिर्फ सम्राट अकबर के बचपन की देखभाल की, बल्कि उनके शासन के शुरुआती वर्षों में राजनीति पर भी गहरा असर डाला. माहम अंगा सम्राट अकबर की पालक मां (दूधमाता) थीं. उन्होंने अकबर को बचपन से पाला और उनकी देखभाल की, इसी वजह से अकबर उनसे बहुत करीब थे और उन पर पूरा भरोसा करते थे. वह सिर्फ एक देखभाल करने वाली महिला ही नहीं थीं, बल्कि बहुत समझदार और चतुर राजनीतिज्ञ भी थीं. धीरे-धीरे उन्होंने मुगल दरबार में अपनी एक मजबूत पहचान बना ली.
सत्ता में बढ़ता प्रभाव
जब अकबर बहुत छोटे थे, तब शासन की जिम्मेदारी उनके सेनापति बैरम खान के हाथ में थी, लेकिन माहम अंगा को यह पसंद नहीं था कि सारी शक्ति बैरम खान के पास रहे. उन्होंने दरबार में एक ऐसा समूह तैयार किया जो बैरम खान के खिलाफ था. धीरे-धीरे उन्होंने अकबर को समझाया कि उन्हें खुद शासन की बागडोर संभालनी चाहिए. आखिरकार, अकबर ने बैरम खान को सत्ता से अलग कर दिया और हज के लिए भेज दिया. इसके बाद कुछ समय तक मुगल दरबार में माहम अंगा का बहुत प्रभाव रहा.
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माहम अंगा का योगदान
माहम अंगा ने सिर्फ राजनीति ही नहीं संभाली, बल्कि समाज के लिए भी काम किए. उन्होंने दिल्ली में खैरुल मनाजिल नाम की एक इमारत बनवाई, जिसमें मस्जिद और मदरसा था. माना जाता है कि यह जगह खासतौर पर महिलाओं के लिए बनाई गई थी. वे शिक्षा और धर्म दोनों के क्षेत्र में योगदान देना चाहती थीं.
कैसे उन्हें अपने सबसे करीबी से धोखा मिला था
माहम अंगा अपने बेटे अधम खान को ऊंचे पद पर देखना चाहती थीं. उनकी कोशिशों से अधम खान को मुगल सेना में बड़ा पद मिला, लेकिन अधम खान का व्यवहार ठीक नहीं था. उसने युद्ध में जीती हुई संपत्ति को अपने पास रख लिया, जिससे अकबर नाराज हो गए. माहम अंगा की ताकत और प्रतिष्ठा उनके बेटे की वजह से ही कम हो गई. जब अकबर ने अपने भरोसेमंद मंत्री अतगा खान को प्रधानमंत्री बनाया, तो अधम खान को यह बात पसंद नहीं आई. गुस्से में आकर उसने अतगा खान की हत्या कर दी. यह घटना अकबर को बहुत क्रोधित कर गई. उन्होंने अधम खान को किले से नीचे फेंकने का आदेश दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. यही वह क्षण था जब माहम अंगा की सारी शक्ति खत्म हो गई. अपने बेटे की मौत का दुख माहम अंगा सहन नहीं कर पाईं. कुछ ही समय बाद उनकी भी मृत्यु हो गई. उनकी मृत्यु के बाद अकबर पूरी तरह स्वतंत्र हो गए. हरम और अन्य प्रभावों से मुक्त होकर खुद शासन करने लगे.
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