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Kerala Name Change: केरल से केरलम, जानिए क्यों वामपंथी शुरू से चाहते थे ये नाम, क्या है इसके पीछे का इतिहास

Kerala Name Change: हाल ही में केरल का नाम केरलम करने के प्रपोजल को मंजूरी दे दी गई है. आइए जानते हैं कि वामपंथी यह नाम क्यों चाहते थे और क्या है इसका इतिहास.

Kerala Name Change:  यूनियन कैबिनेट ने हाल ही में केरल का नाम ऑफीशियली बदलकर 'केरलम' करने के प्रपोजल को मंजूरी दे दी है. हालांकि यह बदलाव काफी छोटा लग सकता है लेकिन इसका पॉलिटिकल, भाषाई और ऐतिहासिक तौर पर एक बड़ा महत्व है. दशकों से वामपंथियों का कहना है कि राज्य का नाम उसके असली मलयालम उच्चारण को दिखाना चाहिए ना कि उसके अंग्रेजी वाले कॉलोनियल रूप को. 

भाषाई पहचान और असली उच्चारण

मलयालम में राज्य का नाम हमेशा से ही 'केरलम' बोला जाता रहा है. जिसके आखिर में एक खास 'म' साउंड होता है.  ऐसा कहा जा रहा है कि केरल कॉलोनियल राज के दौरान लाया गया एक इंग्लिश बदलाव है जो लोकल उच्चारण को पूरी तरह से नहीं दिखाता.

 वामपंथियों ने लगातार कहा है कि संविधान के आठवें शेड्यूल में लिस्टेड सभी भाषाओं में राज्य का नाम 'केरलम' ही होना चाहिए, ना कि इंग्लिश से प्रभावित स्पेलिंग को बनाए रखना चाहिए. 

नाम की ऐतिहासिक जड़ें

केरल शब्द की शुरुआत पुराने इतिहास से हुई है. इसका सबसे पहले जिक्र 257 BCE के सम्राट अशोक के शिलालेखों में मिलता है. यहां इस इलाके का जिक्र 'केरलपुत्र' के तौर पर किया गया है. इसका मतलब है 'चेर जमीन का बेटा'. कई जानकारों का ऐसा मानना है कि यह शब्द चेरम से बना है. इसका मतलब है पुराने चेर वंश जिन्होंने दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों पर राज किया था. चेर शुरुआती भारतीय इतिहास के तीन बड़े तमिल वंश में से एक थे. माना जाता है कि समय के साथ 'चेरम' भाषा के हिसाब से 'केरलम' में बदल गया.  

ऐसा भी कहा जाता है कि यह नाम केरा और आलम से आया है. इसका मतलब होता है नारियल की जमीन. केरल के हरे भरे नारियल के पेड़ और तटीय इलाकों को देखते हुए यह मतलब संस्कृतिक रूप से आज भी लोकप्रिय है. 

ऐक्य केरल आंदोलन 

केरलम की मांग 1920 के दशक में शुरू हुए ऐतिहासिक ऐक्य केरल आंदोलन  से भी जुड़ी हुई है. इस आंदोलन का मकसद मलयालम बोलने वाले इलाकों को एक प्रशासनिक यूनिट में एक करना था. उस समय ये इलाके रियासत और मद्रास प्रेसीडेंसी के बीच बंटे हुए थे. लेफ्ट पार्टियों खासकर कम्युनिस्ट आंदोलन ने इस मांग को एक बड़े राजनीतिक कैंपेन में बदलने में बड़ी भूमिका निभाई. 1952 के त्रिशूर कॉन्फ्रेंस में कम्युनिस्ट पार्टी ने भाषाई पहचान के आधार पर एक एकीकृत केरल की जोरदार वकालत की. 

1956 में केरल का बनना

एकीकरण का सपना 1 नवंबर 1956 को स्टेट्स रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के लागू होने के साथ हकीकत बन गया. मलयालम बोलने वाले इलाकों को मिलाकर आज का केरल राज्य बनाया गया. हालांकि बनने के बाद भी ऑफिशियल इंग्लिश स्पेलिंग केरल में कोई बदलाव नहीं हुआ.

ये भी पढ़ें: किसी राज्य का नाम बदलने पर कितना आता है खर्च?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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