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कैसे अमेरिका में आई भारतीय आमों की शॉर्टेज, क्या ईरान युद्ध का इस पर पड़ा है असर?

अमेरिका में भारतीय आमों की कमी ने लोगों को हैरान कर दिया है. क्या अंतरराष्ट्रीय तनाव और समस्याओं के कारण आमों की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं और उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ा है

गर्मी का मौसम आते ही आम की मिठास हर किसी के दिल को खुश कर देती है. खासकर भारतीय आम अल्फांसो, केसर और दशहरी जो दुनियाभर में अपनी खास खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर हैं. लेकिन इस बार अमेरिका में इन आमों की कमी ने लोगों को हैरान कर दिया है. भारत और अमेरिका के बीच आम का संबंध बहुत ही खास, मधुर और तेजी से बढ़ता हुआ व्यापारिक रिश्ता है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी क्या वजह बनी कि भारतीय आमों की सप्लाई कम हो गई? क्या इसके पीछे वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे हालात जिम्मेदार हैं?

भारत और अमेरिका के बीच कृषि उत्पादों का व्यापार लगातार बढ़ रहा है. भारतीय आम हर साल बड़ी मात्रा में अमेरिका भेजे जाते हैं, जहां भारतीय समुदाय के साथ-साथ विदेशी लोग भी इन्हें पसंद करते हैं. लेकिन इस बार सप्लाई चेन में रुकावट देखने को मिली है. इसका कारण है निर्यात की प्रक्रिया में देरी, लॉजिस्टिक समस्याएं और अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से आम समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे बाजार में शॉर्टेज हो गई है. 

ईरान, अमेरिका और इजरायल के तनाव का असर

हाल के समय में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने केवल भारत और अमेरिका व्यापार पर ही असर  नहीं डाला है बल्कि इसका असर पूरे वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है. हालांकि आमों की सप्लाई सीधे युद्ध क्षेत्र से नहीं जुड़ी होती, लेकिन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स और तेल की कीमतों पर इसका प्रभाव पड़ता है. वही जब किसी क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है, तो समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ जाता है और ऐसे में कई बार सुरक्षा कारणों की वजह रूट बदलने पड़ते हैं. इससे सामान पहुंचने में देरी होती है और लागत भी बढ़ जाती है. 

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अमेरिका में महंगाई की स्थिति

अमेरिका में इस समय महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है. रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली खाने-पीने की चीजों के दाम कभी बढ़ जाते हैं तो कभी थोड़े कम हो जाते हैं, जिससे लोगों के खर्च पर असर पड़ता है. अगर बात आम की करें, तो भारत से अमेरिका में आम भेजे जाते हैं. लेकिन जब किसी वजह से भारतीय आमों की सप्लाई कम होती है, तो उनकी कीमतें और बढ़ जाती हैं.  यही वजह है कि जो आम पहले आसानी से और सस्ते मिल जाते थे, अब वे महंगे हो गए हैं या कई जगह मिल ही नहीं रहे हैं. इसका सीधा असर वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है, क्योंकि उन्हें या तो ज्यादा पैसे देकर आम खरीदने पड़ते हैं या फिर वे इसे खरीद ही नहीं पाते. 

क्या भारत पर भी दिख रहा असर?

इस पूरी स्थिति का असर असर सिर्फ अमेरिका में ही नहीं बल्कि भारत पर भी देखने को मिल रहा है. साथ ही निर्यात कम होने से किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो सकता है. हालांकि देश के अंदर आमों की उपलब्धता बनी हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग कम होने से कीमतों में बदलाव आ रहा है. साथ ही, भविष्य में व्यापार को लेकर नई रणनीति बनाने की जरूरत महसूस हो रही है. 

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