एक्सप्लोरर

भारत-पाकिस्तान की इस जंग में एक-दूसरे के खिलाफ लड़े थे ये दो भाई, एक को लगी गोली तो दूसरे ने क्या किया था?

1947-48 के पहले भारत-पाक युद्ध की तमाम कहानियां सुनने को मिलती है. एक ऐसी ही कहानी रामपुर के दो सगे भाइयों की है. जो कि भारत और पाकिस्तान की अलग अलग सेनाओं में एक-दूसरे के खिलाफ लड़े थे.

भारत और पाकिस्तान के पहले युद्ध (1947-48) से जुड़ी कई घटनाएं दर्ज हैं. इन्हीं में एक ऐसी घटना भी शामिल है, जिसमें दो सगे भाई युद्ध के मैदान में एक-दूसरे के खिलाफ लड़े. यह मामला भारतीय सेना के मेजर यूनुस खान और पाकिस्तानी सेना के मेजर साहिबजादा याकूब खान से जुड़ा है. दोनों रामपुर रियासत के एक ही परिवार में पले-बढ़े थे और बाद में विभाजन के बाद अलग-अलग देशों की सेना में चले गए. 

परिवार और शुरुआती पृष्ठभूमि

मेजर यूनुस खान और मेजर साहिबजादा याकूब खान, रामपुर रियासत के प्रमुख व्यक्ति सर अब्दुस समद खान के बेटे थे. उस दौर में कई रियासती और कुलीन परिवारों के युवा ब्रिटिश भारतीय सेना में शामिल होते थे. इन दोनों भाइयों ने भी यही रास्ता चुना. यूनुस खान को गढ़वाल राइफल्स में कमीशन मिला, वहीं याकूब खान, जिनका जन्म 1920 में हुआ था, 1940 में 18वीं किंग एडवर्ड्स ओन कैवलरी में शामिल हुए. दोनों ने एक जैसी सैन्य ट्रेनिंग ली और ब्रिटिश भारतीय सेना की परंपराओं के तहत सेवा की.

द्वितीय विश्व युद्ध का अनुभव

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दोनों भाइयों ने ब्रिटिश राज के अधीन सेवा की. याकूब खान ने उत्तरी अफ्रीका में लड़ाई लड़ी. 1942 में टोब्रुक के पास वे युद्धबंदी बना लिए गए थे. कई साल उन्होंने कैद में बिताए और 1945 में रिहा हुए. इस अनुभव का उनके जीवन पर गहरा असर पड़ा. बाद में उन्होंने सैनिक और राजनयिक दोनों भूमिकाएं निभाईं. जब वे युद्ध के बाद लौटे, तब तक ब्रिटिश राज का अंत करीब आ चुका था और भारतीय उपमहाद्वीप का विभाजन तय हो चुका था. 

1947 में सेना का बंटवारा

1947 में भारत का विभाजन सिर्फ जमीन का नहीं था, बल्कि संस्थाओं का भी था. ब्रिटिश भारतीय सेना को भी भारत और पाकिस्तान के बीच बांटा गया. रेजिमेंटों का बंटवारा हुआ, हथियार और संसाधन अलग किए गए और अधिकारियों से पूछा गया कि वे किस देश की सेवा करना चाहते हैं. 

इसी प्रक्रिया में दोनों भाइयों ने अलग-अलग फैसला लिया. यूनुस खान ने भारत की सेवा करने का विकल्प चुना, जबकि याकूब खान ने पाकिस्तान जाना चुना. कागजों पर यह प्रशासनिक प्रक्रिया थी, लेकिन इसका असर बाद में युद्ध के मैदान में देखने को मिला. बीबीसी की मानें तो याकूब खान के पाकिस्तान जाने की बात सुनकर उनकी मां बिल्कुल भी खुश नहीं थीं. जब वे पाक जा रहे थे, उस वक्त उनकी मां ने सफेद साड़ी पहनी, जो कि शोक के वक्त पहनी जाती है और तब कुरान की आयतें पढ़कर विदा किया. 

कश्मीर में पहला भारत-पाक युद्ध

अक्टूबर 1947 में जम्मू-कश्मीर को लेकर संघर्ष शुरू हुआ. कबायली लड़ाके कश्मीर में दाखिल हुए। महाराजा हरि सिंह द्वारा भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद भारतीय सेना ने कार्रवाई शुरू की. इसके बाद 1947-48 का पहला भारत-पाकिस्तान युद्ध छिड़ गया. 

यह युद्ध कश्मीर की पहाड़ों और दुर्गम इलाकों में लड़ा गया था. दोनों देशों की सेनाएं नई थीं और संसाधनों का बंटवारा अभी हाल ही में हुआ था. इसी दौरान दोनों भाई अपने-अपने मोर्चे पर मेजर के पद पर तैनात थे और अपनी-अपनी टुकड़ियों का नेतृत्व कर रहे थे. 

जब आमने-सामने आए दो सगे भाई

कश्मीर के मोर्चे पर एक मुठभेड़ के दौरान मेजर यूनुस खान ने भारतीय सैनिकों का नेतृत्व करते हुए पाकिस्तानी चौकी पर हमला कर दिया. इस कार्रवाई में एक पाकिस्तानी अधिकारी घायल हो गया. बाद में जानकारी मिली कि घायल अधिकारी यूनुस खान के छोटे भाई मेजर याकूब खान थे. बीबीसी की मानें तो पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर अपने लेख स्टोरी ऑफ टू खान्स में लिखते हैं कि मेजर यूनुस खां ने बंदूक से चलाई तो इससे उनके छोटे भाई याकूब खां घायल हो गए. जब यूनुस खां को पता चला कि घायल होने वाला शख्स उनका छोटा भाई है तो उन्होंने चिल्लाकर कहा, ‘दुखी मत हो छोटे हम सैनिक हैं और हमने अपना कर्तव्य निभाया है.’

सैम मानेकशॉ ने की थी तारीफ

उस समय भारतीय सेना में वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर काम कर रहे सैम मानेकशॉ ने यूनुस खान की बहादुरी की सराहना की थी. बाद में सैम मानेकशॉ भारतीय सेना प्रमुख बने. युद्ध के दौरान कई ऐसे फैसले लिए गए, जिनमें व्यक्तिगत भावनाओं से ऊपर उठकर सैन्य कर्तव्य निभाया गया.

यह भी पढ़ें: भारतीयों की तुलना में कितने अमीर होते हैं इजरायल के लोग, एक दिन में वहां कितनी होती है कमाई?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

केरोसीन ऑयल को क्यों कहते हैं मिट्टी का तेल, क्या यह सच में मिट्टी से तैयार होता है?
केरोसीन ऑयल को क्यों कहते हैं मिट्टी का तेल, क्या यह सच में मिट्टी से तैयार होता है?
Dictators Food: कोबरा के दिल से कुत्ते के मांस के सूप तक, जानें खाने में क्या-क्या पसंद करते थे बड़े तानाशाह?
कोबरा के दिल से कुत्ते के मांस के सूप तक, जानें खाने में क्या-क्या पसंद करते थे बड़े तानाशाह?
Nuclear Power India: भारत में कब खुला था पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट, जानें कैसे हुई थी इसकी शुरुआत
भारत में कब खुला था पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट, जानें कैसे हुई थी इसकी शुरुआत
अयातुल्ला अली खामेनेई से अमीर नासिरजादेह तक, ईरान के कितने बड़े लीडर अब तक गंवा चुके जान?
अयातुल्ला अली खामेनेई से अमीर नासिरजादेह तक, ईरान के कितने बड़े लीडर अब तक गंवा चुके जान?
Advertisement

वीडियोज

Bharat Ki Baat: ट्रंप का 19 मिनट वाला 'टाइम पास'! | Iran US Israel War | Trump | Netanyahu
Sansani: Trump के पस्त हौसले देख दुनिया हैरान, क्या ईरान से डर गया अमेरिका? | Iran-israel War
Saas Bahu Aur Saazish: Anu-Arya की बढ़ती नजदीकियों से डरा अनु का परिवार, धोखे का साया या सच्चा प्यार? | Tum se Tum Tak
Khabar Filmy Hai: फिल्मी सितारों से जुड़ी चटपटी खबरें | Entertainment News
Bharat Ki Baat: ट्रंप बताएं...आखिर 'वो' चाहते क्या हैं? | Iran US Israel War | Trump | Netanyahu
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement
Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
ईरान जंग में फंसे डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एक्शन,  अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया
ईरान जंग में फंसे डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एक्शन,  अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया
राज्यसभा उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का पहला पोस्ट, इस इमोजी के साथ डाला वीडियो
राज्यसभा उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का पहला पोस्ट, इस इमोजी के साथ डाला वीडियो
होर्मुज पर 60 से ज्यादा देशों की बड़ी बैठक, तनाव पर भारत की खरी-खरी, कहा- कोई हमारा दर्द तो पूछे
होर्मुज पर 60 से ज्यादा देशों की बड़ी बैठक, तनाव पर भारत की खरी-खरी, कहा- कोई हमारा दर्द तो पूछे
SRH से मिली हार के बाद कोलकाता के नाम दर्ज हुआ शर्मनाक रिकॉर्ड, लेकिन ट्रॉफी भी पक्की?
SRH से मिली हार के बाद कोलकाता के नाम दर्ज हुआ शर्मनाक रिकॉर्ड, लेकिन ट्रॉफी भी पक्की?
चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, जज ने लगाई फटकार, बोलीं- 'हमें कमजोर मत समझो'
चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव पर सख्त हुआ हाईकोर्ट, जज ने लगाई फटकार, बोलीं- 'हमें कमजोर मत समझो'
फ्लाइट में 60% सीटें मुफ्त देने के फैसले पर सरकार ने लगाई रोक, जानें क्यों लिया ये फैसला?
फ्लाइट में 60% सीटें मुफ्त देने के फैसले पर सरकार ने लगाई रोक, जानें क्यों लिया ये फैसला?
Beetroot Lip Balm: होंठ होंगे इतने गुलाबी कि तमन्ना भाटिया भी आपके सामने लगेगी फीकी, चुकंदर से ऐसे बनाएं लिप बाम
होंठ होंगे इतने गुलाबी कि तमन्ना भाटिया भी आपके सामने लगेगी फीकी, चुकंदर से ऐसे बनाएं लिप बाम
UPTET vs Super TET: Teacher बनने का सपना है तो पहले समझ लीजिए ये पूरा सिस्टम
Teacher बनने का सपना है तो पहले समझ लीजिए पूरा सिस्टम
Embed widget