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Haircut Punishment: इस देश में बाल कटवाना मानी जाती थी मौत से भी बुरी सजा, जानें क्या था इसका कारण

Haircut Punishment: प्राचीन चीन में एक काफी अजीब मान्यता थी. दरअसल उस समय बाल कटवाना मौत से भी बदतर सजा माना जाता था. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

Haircut Punishment: आज की दुनिया में बाल कटवाना एक आम बात है. इतिहास की बात करें तो एक समय ऐसा था जहां पर किसी के बाल काटना मौत की सजा से भी ज्यादा अपमानजनक सजा मानी जाती थी. यह मान्यता प्राचीन चीन में सबसे ज्यादा मजबूत थी. वहां पर बाल सिर्फ शरीर का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे सम्मान, परिवार, नैतिकता और पहचान से जुड़े थे. बालों को काटने का मतलब था समाज में अपनी जगह खो देना.

बालों का माता-पिता के साथ संबंध

प्राचीन चीन में मानव शरीर के बारे में विचार कन्फ्यूशियस द्वारा गहराई से काफी ज्यादा प्रभावित थे. कन्फ्यूशियस फिलॉसफी के मुताबिक किसी भी व्यक्ति का शरीर, त्वचा और बाल उनके माता-पिता से मिले उपहार थे. उन्हें बदलना या फिर नुकसान पहुंचाना, खास कर जानबूझकर माता-पिता के प्रति अनादर माना जाता था.

बाल काटना मौत से भी बदतर सजा 

इस मान्यता के तहत किसी के बाल जबरदस्ती काटना सामाजिक बहिष्कार का एक रूप बन गया. कई मामलों में अपराधियों को मारकर नहीं बल्कि सार्वजनिक रूप से उनके बाल मुंडवाकर या काट कर सजा दी जाती थी. उस समय नागरिकों के लिए बिना बालों के जीना जीवन भर की शर्मिंदगी थी. समाज उन्हें तुरंत अपमानित व्यक्ति के रूप में पहचान लेता था. 

कुन सजा और सार्वजनिक अपमान 

प्राचीन चीनी कानूनी संहिताओं में कुन जैसी सजाएं शामिल थी. इसमें बाल काटना या मुंडवाना शामिल था. शारीरिक यातना के उलट यह सजा किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और वंश पर हमला करती थी. व्यक्ति को रोजाना अपमान के साफ सबूत के साथ जीना पड़ता था. विद्वान, अधिकारी या फिर बुजुर्गों के लिए यह अपमान न सिर्फ उनकी अपनी गरिमा को बल्कि उनके पूरे परिवार के गरिमा को खत्म कर देता था.

पूर्वी और मध्य एशिया में बाल पहचान और सम्मान के प्रतीक

यह ख्याल की बालों में सम्मान होता है सिर्फ चीन तक ही सीमित नहीं था. मंगोलियाई और तुर्क संस्कृतियों में भी ऐसा माना जाता था कि बालों में कुट होता है. यह एक तरह की आध्यात्मिक शक्ति या फिर दिव्य ऊर्जा होती है. एक योद्धा के बाल काटना उसे उसकी ताकत और दर्जे से अलग करने का प्रतीक था. कैदियों और गुलाम के बाल अक्सर उनकी स्वतंत्र पहचान को मिटाने और उनकी शक्ति खत्म करने के रूप में काटे जाते थे.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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