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जब इंडिया गेट बना था, उस पर कितना पैसा हुआ था खर्च? आज इसे बनवाएं तो कितनी आएगी लागत

राजधानी में स्थित इंडिया गेट को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. 42 मीटर ऊंचाई वाले इस स्मारक को पहले विश्व युद्ध और तीसरे एंग्लो अफगान युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया था.

राजधानी दिल्ली का नाम जब भी आता है, तो सबसे पहले दिमाग में इंडिया गेट की तस्वीर सामने आती है. देश की राजधानी में स्थित इंडिया गेट को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. 42 मीटर ऊंचाई वाले इस स्मारक को पहले विश्व युद्ध और तीसरे एंग्लो अफगान युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया था. वहीं आपने इंडिया गेट की कहानियों के बारे में तो खूब सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे बनाने में उस समय कितना खर्चा आया था और आज अगर ऐसा दूसरा इंडिया गेट बनाया जाए तो उसका खर्च कितना आएगा. 

इंडिया गेट और उसका निर्माण 

राजधानी दिल्ली में स्थित इंडिया गेट का निर्माण 1921 में शुरू हुआ था और 12 फरवरी 1931 को यह बनकर तैयार हो गया था. इसे बनाने में लगभग 10 साल लगे थे.  इंडिया गेट को मशहूर ब्रिटिश वास्तुकार एड्विन लैंडसियर लूट्यन्स ने डिजाइन किया था. वहीं शुरुआत में इसका नाम ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल रखा गया था. इंडिया गेट लाल और पीले बलुआ पत्थरों और ग्रेनाइट से बनाया गया था. वहीं आपको बता दें कि इंडिया गेट की दीवारों पर हजारों सैनिकों के नाम लिखे हुए हैं.  वहीं 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद इसके नीचे अमर जवान ज्योति स्थापित की गई, जो शहीदों को श्रद्धांजलि का प्रतीक बनी. 

इंडिया गेट को बनाने में कितना आया था खर्च?

बताया जाता है कि ब्रिटिश काल में नई राजधानी के निर्माण का अनुमानित खर्च 1913 में करीब 1050 लाख रुपये लगाया गया था. हालांकि 1914 में पहले विश्व युद्ध के कारण काम की रफ्तार धीमी पड़ गई थी. वहीं 1914-15 से 1919-20 के बीच हर साल 39 से 54 लाख रुपये तक राजधानी को बनाने में खर्च हुए. इसके अलावा 1920 से 21 के बाद निर्माण कार्य में फिर से तेजी आई और राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक के साथ इंडिया गेट के निर्माण का कुल खर्च मिलाकर करीब 13.07 लाख रुपये आया था. वहीं, इंडिया गेट बनाने में कुल कितना खर्च आया था, उसका अलग से खर्च सामने नहीं आया. हालांकि, यह रकम करीब 2 से 3 लाख रुपये मानी जाती है. आपको बता दें कि राजधानी के निर्माण के साथ ही इंडिया गेट का निर्माण 1921 में शुरू हुआ और 1931 में पूरा हुआ, जिसे ब्रिटिश सरकार ने फंड किया था.   

अगर आज बना इंडिया गेट बनाया जाए तो कितनी होगी लागत?

ब्रिटिश काल में बना इंडिया गेट आज देश की ऐतिहासिक धरोहर है. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार अगर अनुमान लगाया जाए तो  इंडिया गेट के आकार और डिजाइन का स्मारक आज के समय में तैयार किया जाए तो निर्माण के सामान, श्रम लागत और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से इसका खर्च करोड़ों रुपये से भी ज्यादा हो सकता है. 

ये भी पढ़ें: सूर्य ग्रहण के दौरान कैसे बनता है रिंग ऑफ फायर, क्या है इसके पीछे का विज्ञान?

कविता एबीपी नेटवर्क नोएडा के साथ बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही है. वर्तमान में कविता का मुख्य फोकस शिक्षा, करियर और नौकरी से जुड़ी खबरों पर रहता है.

करीब 3.5 साल से पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी कव‍िता एबीपी नेटवर्क से पहले राजस्थान पत्रिका में काम कर चुकी है. यहां  उन्होंने नेशनल एडिशन और अलग-अलग सप्लीमेंट्स के लिए काम किया. राजस्थान पत्रिका में करियर की उड़ान और सी न्यूज जैसे कॉलम वह कवर करती थी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो के साथ काम करने का अवसर मिला, जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन की बारीकियों को समझने का अनुभव दिया. वहीं पत्रकारिता के अलावा कविता की खास रुचि खेल, विशेष रूप से क्रिकेट में है. राजस्थान पत्रिका में रहते हुए कविता ने मदर्स डे स्पेशल स्पोर्ट्स एडिशन में भी काम किया है.

पढ़ाई की बात करें तो कविता ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की.

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