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देश में कितने आवारा कुत्ते? जानिए हर साल कितने लोगों की हो जाती है रेबीज से मौत; चौंका देंगे आंकड़े

भारत में आवारा कुत्तों के काटने से मौत के मामले बढ़े हैं. चलिए जानते हैं देश में कितने आवारा कुत्तों की संख्या कितनी है और रेबीस से कितनी मौतें होती है.

भारत में आवारा कुत्तों की समस्या एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है. 2019 की 20वीं पशु जनगणना के अनुसार, भारत में 1.53 करोड़ आवारा कुत्ते दर्ज किए गए थे जो 2012 में 1.71 करोड़ से कुछ कम थे. दिल्ली में 60,472 कुत्तों का अनुमान था, जो अब इससे भी अधिक हो सकता है. उत्तर प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में आवारा कुत्तों की संख्या सबसे अधिक है. उत्तर प्रदेश में 20 लाख से ज्यादा और महाराष्ट्र में 12.7 लाख कुत्ते दर्ज किए गए.

कुत्तों के काटने की संख्या

भारत में साल 2024 में कुत्ते के काटने की 37,15,713 घटना रिपोर्ट की गई. अगर राजधानी दिल्ली की बात की जाए तो यहां साल 2025 में केवल जनवरी के महीने में 3,196(प्रतिदिन लगभग 103) कुत्ते के काटने के मामले सामने आए. 2024 में 25,210 (प्रतिदिन लगभग 69), 2023 में 17,874 (प्रतिदिन लगभग 49), 2022 में 6,691 (प्रतिदिन लगभग 18) ये वो मामले हैं जो रिपोर्ट किए गए हैं.

भारत में रेबीज के कारण मृत्यु

रेबीज एक 100% घातक बीमारी है, जो समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित होती है. बीते कुछ महीनों में कई मामले सामने आए जिसमें कुत्ते के काटने से छोटी बच्ची से लेकर कबड्डी प्लेयर तक की मौत हो गई, ये मौत रेबीज से हुई. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल रेबीज के कारण लगभग 300 लोगों की मौत होती है. 

क्या कहती है WHO की रिपोर्ट

WHO के अनुसार भारत में हर साल रेबीज के कारण 18,000 - 20,000 लोगों की मौत होती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अधिकांश मामले रिपोर्ट नहीं किए जाते. भारत में (रिपोर्ट किए गए) कुत्ते के काटने के मामलों की संख्या की बात करें तो यहां साल 2024 में लगभग 37.16 लाख कुत्ते के काटने के मामले सामने आये थे. 2024 में सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और बिहार से सामने आए. 2023 में भारत में कुत्ते काटने के लगभग 30.53 लाख मामले सामने आए, 2022 में लगभग 21.9 लाख, 2021 में 17 लाख से अधिक और 2020 में 46 लाख से अधिक मामले सामने आए. 

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

इस समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2025 को दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को 6-8 सप्ताह के भीतर सड़कों से हटाकर शेल्टर में स्थानांतरित करने का आदेश दिया.  जिस पर जमकर बहस छिड़ गई. हालांकि, पशु कल्याण संगठनों ने इस आदेश को अव्यावहारिक और गैर-वैज्ञानिक बताया क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों के लिए शेल्टर की कमी है. 

कुत्तों की आबादी पर नियंत्रण

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2030 तक भारत से कुत्तों वाले रेबीज उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की है. भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग ने पशु जन्म नियंत्रण (कुत्ते) नियम, 2001 (2010 में संशोधित) अधिनियमित किया है जिसे आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्राधिकरण द्वारा लागू किया जाना है. नियमों का मुख्य फोकस जनसंख्या के साधन के रूप में आवारा कुत्तों के रेबीज रोधी टीकाकरण और आवारा कुत्तों के नसबंदी पर है.

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About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

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