MIG 21: अमेरिका से लेकर इजरायल तक कांपते थे रूस के मिग विमान से, जानें कैसे चुराई थी रूसी टेक्निक?
MIG 21: भारतीय वायु सेना से मिग 21 रिटायर हो चुका है. आइए जानते हैं इस विमान का इतिहास और अमेरिका-इजराइल से जुड़ी इसकी कहानी.

MIG 21: एक समय भारतीय वायुसेना का गौरव रहा मिग 21 अब आधिकारिक तौर से रिटायर हो चुका है. भारत के पहले सुपरसोनिक फाइटर जेट के रूप में पहचाने जाने वाला मिग-21 1965, 1971 और कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों के लिए एक बड़ा खौफ था. लेकिन भारत की हवाई ताकत बनने से बहुत पहले मिग 21 दुनिया भर में चिंता का एक बड़ा कारण था. दरअसल 1960 के दशक में इसकी ताकत की वजह से अमेरिका इजरायल जैसे देश इसकी तकनीक को समझने के लिए काफी ज्यादा बेताब थे. इसके बाद उनकी यह ख्वाहिश एक जासूसी मिशन बन गई.
मिग 21 का इतिहास
मिग 21 ने सिर्फ दक्षिण एशिया में ही नहीं बल्कि पश्चिमी दुनिया में भी अपना डर फैला दिया था. खासकर इजराइल ने इस विमान को एक गंभीर खतरा माना क्योंकि यह सीरिया, इराक और मिस्र की वायु सेना में था. रूस ने इन देशों को मिग-21 की आपूर्ति सख्त शर्तों के साथ की. यह शर्तें थी कि पायलटों की ट्रेनिंग, रखरखाव और सुरक्षा पर रूस अपना नियंत्रण रखेगा. इसके पीछे कारण यह था कि विमान के रहस्य सुरक्षित रहें.
मोसाद की योजना
मिग 21 के रहस्य को जानने के लिए इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने एक योजना बनाई. 1963 में जनरल मोर्दकै होद और बाद में एजर वाइजमैन सहित सैन्य नेताओं के साथ कई बैठकों के बाद यह स्पष्ट था कि इजराइल को मिग 21 का एक विमान चाहिए. कई रणनीतियां बनाई गई जैसे लैंडिंग के दौरान विमान को जब्त करना, एयरबेस पर एजेंट भेजना या फिर पायलटों को रिश्वत देना. लेकिन आखिर में मोसाद ने तय किया कि अगर किसी अरब पायलट को मिग 21 के साथ इजराइल में शरण देने पर राजी कर लिया जाए तो इससे अच्छा और कुछ नहीं होगा.
शुरुआती चुनौतियां
मिस्त्र से मिग 21 को हासिल करने का इजराइल का पहला प्रयास तब फेल हुआ जब जीन थॉमस नाम के मिस्त्र में जन्मे एक आर्मेनियाई व्यक्ति ने 10 लाख डॉलर की रिश्वत लेने से मना कर दिया. इसी के साथ इराक में दो इराकी पायलटों को मिग 21 लाने का लालच देने का प्लान भी फेल रहा.
कैसे मिली सफलता
यह सफलता इराक के एक यहूदी जोसेफ की मदद से मिली. वह इजराइल भाग गया था. जोसेफ ने मोसाद को इराक एयरपोर्ट के ईसाई पायलट मुनीर रेडफा से मिलवाया. रेडफा अपने कम्युनिटी पर सरकार के अत्याचार से काफी ज्यादा नाराज था. बगदाद में अमेरिकी बनकर रह रही एक महिला मोसाद एजेंट की मदद से रेडफा के देश छोड़ने की इच्छा ने इस ऑपरेशन को सफल बनाया. इजराइल में मोसाद ने उसे मिग 21 विमान लाने के बदले 10 लाख डॉलर देने का वादा किया. उसे एक अच्छी नौकरी का भी वादा किया गया और साथ ही एक घर और इजरायल की नागरिकता का भी प्रस्ताव दिया. अच्छी प्लानिंग के बाद रेडफा को मिग 21 इजराइल ले जाने के लिए मनाया गया.
दुनिया भर में मचा हड़कंप
इस चोरी के बाद दुनिया भर में हड़कंप मच गया. इजराइल के इस ऑपरेशन से नाराज रूस ने विमान को वापस मांगा और कड़ी चेतावनी दी. इसी बीच अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस भी इजराइल पर मिग 21 उन्हें देने का दबाव डाल रहे थे. लेकिन इजराइल ने उस विमान को ना तो रूस को लौटाया और ना ही दूसरे देशों को दिया.
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Source: IOCL























