अमेरिका की ईरान से कितनी है दूरी, अगर मिसाइल से अटैक हुआ तो कितनी देर में मच जाएगी तबाही?
US Iran Distance: अमेरिका और ईरान के बीच हजारों किलोमीटर की दूरी है, लेकिन मिसाइल तकनीक इसे मिनटों में खत्म कर सकती है. आज की जंग में दूरी नहीं, समय और तकनीक सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं.

गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जो आमतौर पर कई वर्षों में एक बार ही नजर आता है. एपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने ईरान को बेहद सख्त और साफ शब्दों में संदेश दिया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप सिर्फ बयानबाजी या लंबी बैठकों में भरोसा नहीं करते, बल्कि जमीन पर ठोस कदम उठाने में विश्वास रखते हैं. उनका यह भी कहना था कि इस हिंसा को खत्म करने के लिए अमेरिका हर संभव विकल्प पर विचार करने को तैयार है. इसी क्रम में यह समझ लेते हैं कि अगर अमेरिका, ईरान पर हमला कर दे तो मिसाइल कितनी देर में पहुंचेगी.
अमेरिका और ईरान के बीच कितनी है दूरी?
भौगोलिक रूप से अमेरिका और ईरान के बीच सीधी दूरी करीब 10,500 से 11,000 किलोमीटर के आसपास मानी जाती है. यह दूरी अमेरिका के पूर्वी तट से ईरान तक की है. अगर अमेरिका अपने सैन्य ठिकानों की बात करे, तो मध्य पूर्व में मौजूद उसके बेस- जैसे कतर, कुवैत, बहरीन या यूएई- ईरान से सिर्फ 300 से 1,500 किलोमीटर की दूरी पर हैं. यही वजह है कि रणनीतिक नजरिए से यह दूरी बहुत मायने रखती है.
हमला सीधे अमेरिका से होगा या नजदीकी बेस से?
सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी संभावित हमले की स्थिति में अमेरिका सीधे अपनी मुख्य भूमि से नहीं, बल्कि मध्य पूर्व में मौजूद अपने सैन्य अड्डों से कार्रवाई करेगा. इससे दूरी काफी कम हो जाती है और प्रतिक्रिया का समय भी तेज होता है. यही कारण है कि ईरान के आसपास अमेरिकी बेस हमेशा चर्चा में रहते हैं.
मिसाइल से हमला हुआ तो कितना समय लगेगा?
मिसाइल की रफ्तार उसके प्रकार पर निर्भर करती है. क्रूज मिसाइल आमतौर पर 800 से 1,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ती हैं. अगर हमला किसी नजदीकी अमेरिकी बेस से हो, तो ईरान तक पहुंचने में 1 से 2 घंटे का वक्त लग सकता है. बैलिस्टिक मिसाइल की रफ्तार कहीं ज्यादा होती है. ये मिसाइलें हजारों किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती हैं. अगर मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल इस्तेमाल होती है, तो लक्ष्य तक पहुंचने में 10 से 15 मिनट भी काफी हो सकते हैं.
तबाही कितनी तेजी से फैल सकती है?
मिसाइल हमले की स्थिति में सबसे पहले सैन्य ठिकाने, रडार सिस्टम और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाता है. कुछ ही मिनटों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हो जाते हैं और बड़े शहरों में सायरन बजने लगते हैं. अगर हमला बड़े पैमाने पर हुआ, तो शुरुआती 30 मिनट में ही हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं.
ईरान की जवाबी क्षमता कितनी मजबूत?
ईरान के पास भी लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलें हैं, जिनकी मारक क्षमता 2,000 किलोमीटर तक मानी जाती है. इसका मतलब है कि ईरान, मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है. यही वजह है कि किसी भी एकतरफा हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की आशंका भी उतनी ही तेज होती है.
क्या तुरंत जंग में बदल सकते हैं हालात?
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा कोई भी हमला सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगा. क्षेत्रीय तनाव बढ़ते ही दूसरे देश भी सतर्क हो जाएंगे. तेल सप्लाई, वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर इसका असर तुरंत दिख सकता है.
दूरी से ज्यादा अहम है तकनीक
आज की आधुनिक युद्ध तकनीक में दूरी उतनी बड़ी बाधा नहीं रही. सैटेलाइट, मिसाइल गाइडेंस और रियल-टाइम निगरानी के चलते फैसले मिनटों में असर दिखाने लगते हैं. इसी कारण अमेरिका और ईरान के बीच की दूरी कागज पर भले ज्यादा लगे, लेकिन रणनीतिक रूप से यह बहुत कम मानी जाती है.
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Source: IOCL
























