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क्या वाकई अंतरिक्ष से 'सारे जहां से अच्छा' दिखता है हिंदुस्तान? ISS से पृथ्वी पर क्या-क्या दिखाई देता है सच जान लीजिए

अंतरिक्ष से हमारी पृथ्वी कैसी दिखती है, यह जानने के लिए आपको कल्पनाओं की दुनिया में जाना होगा. कल्पना करिए कि आप अंतरिक्ष में उड़ान भर रहे हैं और पृथ्वी की सतह से करीब 300 किलोमीटर ऊपर हैं...

How Earth Look From Space: अंतरिक्ष में 286 दिन गुजारने के बाद हाल ही में पृथ्वी पर लौटी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स से जब यह सवाल किया गया कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है? तो उनके मुंह से निकला, 'अद्भुत, वाकई अद्भुत'. आज से चार दशक पहले ठीक यही सवाल तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से किया था. जवाब में उन्होंने कहा था, 'सारे जहां से अच्छा'.

अब सवाल यह है कि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा भारत में कही गई यह बात क्या वाकई सच है? क्या वाकई अंतरिक्ष से पृथ्वी और भारत को देखा जा सकता है? क्या अंतरिक्ष से सबकुछ इतना स्पष्ट दिखता है? चलिए जानते हैं... 

ISS से कैसी दिखती है अपनी पृथ्वी?

अंतरिक्ष से हमारी पृथ्वी कैसी दिखती है, यह जानने के लिए आपको कल्पनाओं की दुनिया में जाना होगा. कल्पना करिए कि आप अंतरिक्ष में उड़ान भर रहे हैं और पृथ्वी की सतह से करीब 300 किलोमीटर ऊपर हैं, यह दूरी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की कक्षा के बराबर है. अगर आप ISS से पृथ्वी की ओर देखेंगे तो आपको नीली गोलाकार आकृति दिखेगी. वैज्ञानिकों का कहना है कि दिन की रोशनी में अंतरिक्ष से पृथ्वी को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, इतना ही नहीं विभिन्न भौगोलिक आकृतियों को भी देखा जा सकता है. इसमें नदी, पहाड़, हिमालच पर्वत और कई महासागर भी दिखते हैं. अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने भी कहा था कि जब हम हिमालय के ऊपर से गुजरते थे, तो वह नजारा अद्भुत होता था. नासा की ओर से भी ऐसी कई तस्वीरें जारी की गई हैं, जिसमें पृथ्वी पर भू आकृतियां और कई देशों की सीमाएं स्पष्ट तौर पर दिखाई देती हैं. हालांकि, अगर आप रात के समय में पृथ्वी की ओर देखेंगे तो आपको बहुत सी जगमगाती रोशनी दिखेगी. 

चांद से कैसी दिखती है पृथ्वी

अगर में पृथ्वी की कक्षा से और ऊपर जाते हैं और चांद से पृथ्वी को देखने की कोशिश करेंगे तो पृथ्वी एक नीली चमकीली गेंद की तरह दिखेगी. इस दौरान आपको सपष्ट भू-आकृतियां नहीं दिखेंगी. बता दें, चांद से पृथ्वी की पहली तस्वीरें आपोलो मिशन से आई थीं. 1968 में आपोलो 8 पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलने वाला पहला मानव अंतरिक्ष यान था. 

यह भी पढ़ें: अल्ट्रासाउंड मशीन आने से पहले कैसे पता चल जाता था कि लड़का होगा या लड़की? हजारों साल पहले ऐसे होता था प्रेग्नेंसी टेस्ट 

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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