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कैसे काम करता है एंटी बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम, जिसे डेवलप करने जा रहे भारत और इजरायल

भारत और इजरायल मिलकर हवाई सुरक्षा का नया अध्याय लिख सकते हैं. आइए जानें कि एंटी बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम कैसे काम करता है और भारत व इजराइल इसे क्यों डेवलप करने जा रहे हैं.

दुनिया में जंग का तरीका तेजी से बदल रहा है. अब सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि दुश्मन को रोकने के लिए और भी नई-नई तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे से पहले एक बड़ी रक्षा डील की चर्चा है, जिसमें एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम और लेजर हथियार शामिल हो सकते हैं. अगर यह समझौता होता है, तो भारत की हवाई सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो सकती है. अब सवाल है, यह सिस्टम आखिर काम कैसे करता है?

एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम क्या है?

एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम, जिसे संक्षेप में ABMD कहा जाता है, एक ऐसी बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है जो दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने के लिए बनाई जाती है. बैलिस्टिक मिसाइलें लंबी दूरी तय करती हैं और ऊंचाई पर जाकर फिर तेज रफ्तार से लक्ष्य की ओर गिरती हैं. इनको रोकना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण काम है. 

इस सिस्टम में आमतौर पर तीन मुख्य हिस्से होते हैं- लंबी दूरी के रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलें. रडार दुश्मन की मिसाइल को लॉन्च होते ही ट्रैक करता है. कमांड सेंटर खतरे का आकलन करता है और इंटरसेप्टर मिसाइल को दागने का आदेश देता है. इंटरसेप्टर हवा में जाकर दुश्मन की मिसाइल से टकराकर उसे नष्ट कर देता है. इसे हिट टू किल तकनीक भी कहा जाता है. 

भारत पहले से ही अपना दो-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम विकसित कर रहा है, जिसमें ऊंचाई पर रोकने के लिए अलग और निचली परत में रोकने के लिए अलग इंटरसेप्टर बनाए गए हैं. अब इजरायल के साथ संभावित सहयोग इस क्षमता को और मजबूत कर सकता है. 

भारत-इजरायल रक्षा सहयोग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 फरवरी को इजरायल दौरे पर रहेंगे. इस दौरान भारत और इजराइल के बीच एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के संयुक्त विकास पर बड़ा समझौता होने की संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ मिसाइल, एडवांस ड्रोन और लेजर आधारित हथियारों के जॉइंट डेवलपमेंट पर भी बातचीत हो सकती है. 
भारत पहले ही इजरायल के साथ कई रक्षा प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुका है. ऐसे में यह नया कदम भारत की एयर डिफेंस रणनीति को नई दिशा दे सकता है. 

लेजर डिफेंस सिस्टम आयरन बीम की ताकत

इजरायल का लेजर डिफेंस सिस्टम आयरन बीम दुनिया के सबसे एडवांस सिस्टम्स में गिना जाता है. इसे दिसंबर 2025 में इजरायली डिफेंस फोर्स में शामिल किया गया है. यह पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर से अलग तरीके से काम करता है. सबसे बड़ी बात इसकी रफ्तार है. जहां पारंपरिक मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने में कुछ सेकंड लगते हैं, वहीं लेजर बीम प्रकाश की गति से हमला करती है, जो लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड मानी जाती है. इसका मतलब है कि जैसे ही खतरा दिखा, तुरंत जवाब मिलेगा.

दूसरी खासियत इसकी लागत है. पारंपरिक इंटरसेप्टर मिसाइलों की कीमत लाखों डॉलर तक हो सकती है, जबकि लेजर सिस्टम में हर शॉट की लागत बहुत कम होती है, क्योंकि इसमें गोला-बारूद नहीं बल्कि बिजली का इस्तेमाल होता है. जब तक पावर सप्लाई है, सिस्टम लगातार काम कर सकता है.

ड्रोन और रॉकेट हमलों से बचाव

आजकल युद्ध में ड्रोन स्वार्म यानी एक साथ कई ड्रोन से हमला बड़ा खतरा बन चुका है. लेजर सिस्टम एक साथ कई छोटे टारगेट को तेजी से निशाना बना सकता है. यह रॉकेट, मोर्टार और छोटे ड्रोन को हवा में ही जला सकता है. इसकी पिनप्वाइंट सटीकता इसे खास बनाती है, क्योंकि यह सीधे लक्ष्य के इंजन या विस्फोटक हिस्से को निष्क्रिय कर देता है. पारंपरिक सिस्टम कई बार छोटे और कम समय में गिरने वाले मोर्टार शेल को रोक नहीं पाते, लेकिन लेजर आधारित सिस्टम इस चुनौती से निपटने में सक्षम माना जाता है.

भारत के लिए क्या मायने?

अगर भारत और इजरायल के बीच यह समझौता होता है, तो भारत की बहु-स्तरीय एयर डिफेंस ढांचा और मजबूत हो सकता है. बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन और रॉकेट जैसे अलग-अलग खतरों से निपटने के लिए एक इंटीग्रेटेड सिस्टम तैयार किया जा सकता है. बदलते युद्ध के दौर में हथियारों की सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि तकनीक अहम है. एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और लेजर हथियारों का मेल आने वाले समय में हवाई सुरक्षा का नया मानक तय कर सकता है. भारत के लिए यह सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा रणनीति में बड़ा कदम साबित हो सकता है.

यह भी पढ़ें: 1 किलोमीटर चलने पर नमो भारत में कितना आता है खर्च, जान लीजिए पूरे रूट की लागत

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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