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Sheermal History: भारत तक कैसे आया शीरमाल, जानें क्या है इस अमीरों की रोटी का इतिहास?

Sheermal History: आज शीरमाल भारतीय खाने में अपनी एक पहचान बना चुका है. आइए जानते हैं क्या है इसका इतिहास और यह भारतीय रसोइयों तक कैसे पहुंचा.

Sheermal History: शीरमाल जिसे अक्सर अमीरों की रोटी भी कहा जाता है, साउथ एशियन खाने में सबसे शानदार पारंपरिक रोटियों में से एक है. आम रोटियों के उलट शीरमाल को दूध, केसर और शुद्ध घी से गूंधा जाता है. इस वजह से इसे एक रिच स्वाद और सॉफ्ट टेक्सचर मिलता है. इसका सफर पुराने पर्शिया से शुरू हुआ और मुगलों और अवध के नवाबों के जरिए भारत पहुंचा. समय के साथ यह शाही किचन का एक जरूरी हिस्सा बन गया. 

कहां से हुई इसकी शुरुआत? 

शीरमाल की शुरुआत पर्शिया में हुई. यहां दूध और केसर से बनी रोटी शाही खाने का हिस्सा थी. वहां से यह हिस्टोरिक सिल्क रूट से होते हुए अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया जैसे इलाकों से होते हुए इंडियन सबकॉन्टिनेंट पहुंचा. मुगल बादशाह भारत में  पर्शियन कल्चर और खाने को लाने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने ही नॉर्थ इंडिया में शीरमाल को पॉपुलर बनाने में एक बड़ा रोल निभाया.

लखनऊ में कैसे पॉपुलर हुआ शीरमाल?

18वीं और 19वीं सदी में अवध की राजधानी लखनऊ में शीरमाल को खास अहमियत मिली. अवध के नवाब अपनी शानदार लाइफस्टाइल और बढ़िया खाने के लिए मशहूर थे. ऐसा माना जाता है कि नवाब गाजीउद्दीन हैदर या नसरुद्दीन हैदर ने शाही शेफ को खास डिश बनाने के लिए कहा. इस वजह से लखनऊ के शाही किचन में शीरमाल को बेहतर और पॉपुलर बनाया गया.

स्थानीय कहानियों के मुताबिक लखनऊ के फिरंगी महल में ममदू नाम के एक बेकर ने निहारी के साथ खाने के लिए एक खास ब्रेड बनाई. निहारी शाही लोगों के बीच धीमी आंच पर पकने वाली मीट की डिश थी. उन्होंने आटा, केसर मिला दूध और घी का इस्तेमाल किया और इस पारंपरिक तंदूर में पकाया. नवाब इसके स्वाद से काफी खुश हुए और शीरमाल जल्द ही शाही खाने का हिस्सा बन गया. 

क्यों कहा जाता है शीरमाल को अमीरों की ब्रेड?

शीरमाल को अमीरों की ब्रेड कहा जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें केसर, घी, दूध, इलायची और कभी-कभी मावा जैसी महंगी चीजें होती हैं. इन चीजों की वजह से यह रेगुलर रोटियों से ज्यादा महंगा था. यही वजह है कि शीरमाल ज्यादातर शाही घरों और अमीर परिवारों में खाया जाता था.

भारत के अलग-अलग इलाकों की वैरायटी 

समय के साथ शीरमाल पूरे भारत में अलग-अलग इलाकों के स्टाइल में बदल गया. लखनऊ में यह गोल, नरम और केसरिया रंग का होता है. इसी के साथ भोपाल में यह अक्सर रैक्टेंगुलर होता है और इसमें लौंग का स्वाद आता है.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में कितने का मिल रहा 1 किलो आटा, अफगानिस्तान से कम या ज्यादा है महंगाई?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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