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Hiroshima Day: परमाणु बम गिरने के बाद कैसा था हिरोशिमा का मंजर, एक साथ बिछ गई थीं इतनी लाशें

हिरोशिमा पर हुए परमाणु हमले के बाद जो भयावह मंजर देखा गया उसे आजतक पूरी दुनिया नहीं भूल पाई है. आने वाले समय में ऐसा मंजर फिर देखने को न मिले इसलिए हिरोशिमा दिवस मनाया जाता है.

Hiroshima Day 2024: हर साल 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस मनाया जाता है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुई ये घटना आज भी पूरी दुनिया को याद है. जब संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने जापानी शहर हिरोशिमा पर परमाणु बम गिरा दिया था. इसके बाद हिरोशिमा में जो मंजर था वो आज भी किसी की आंखों से गया नहीं है. इस परमाणु हमले के बाद की तस्वीरें देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

परमाणु हमले के बाद कैसा था हिरोशिमा का मंजर?

आज ही के दिन यानी 6 अगस्त, 1945 को अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था. जो शहर के केंद्र पर फटा था. इसके बाद हिरोशिमा पूरी तरह तबाह हो गया. हाइपोसेंटर के 1.2 मील के भीतर का क्षेत्र पूरी तरह से समतल हो गया या फिर जल गया. इस पूरे साल यहां लोग मरते गए. इस अटैक के चलते दिसंबर 1945 के अंत तक लगभग 140,000 लोग मारे गए थे.  उस समय मंजर ऐसा था कि हिरोशिमा में चारों ओर लाशों का ढेर बिछ गया था. कई लोगों की लाशें तो इतने टुकड़ों में बंट गई थीं कि उन्हें गिना भी नहीं जा सकता था. परमाणु बम विस्फोट के बल ने कुछ लोगों को कई गज दूर फेंक दिया, इमारतें पूरी तरह से चकनाचूर हो चुकी थीं, मानों पहले वहां कुछ था ही नहीं, जिससे उनमें रहने वाले लोग कुचले गए. लोगों के शरीर का भी पता नहीं चल रहा था, मानों एक ऐसा तूफान आया हो जो इमारतों सहित लोगों को अपने साथ ले गया.

बुरी तरह जल गए थे लोग

उस समय हिरोशिमा गए लोगों ने बताया कि वहां जाकर जब उन्होंने अपने साथियों को देखा तो वो सभी बुरी तरह जल गए थे. उनके कपड़े पूरी तरह फट चुके थे. उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो कोई राक्षस हो. यहां तक कि जो लोग अपनों की तलाश में परमाणु बम हमले के कुछ दिनों बाद हिरोशिमा गए उनके शरीर में भी कई बीमारियां हो गईं. उनकी त्वचा निकलने लगी और वो कई-कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे.

दशकों तक देखे गए नतीजे

परमाणु बम से निकलने वाला विकिरण मानव शरीर के लिए बहुत हानिकारक था. जिसके चलते परमाणु बम हमले के सदियों बाद तक हानिकारक रेडियोक्टिव वहां मौजूद रहे, लिहाजा दशकों तक लोगों को त्वचा से लेकर शरीर में होने वाली गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ा. लंबे समय तक लोगों को उल्टी, दस्त, बाल, झड़ना, त्वचा संबंधी विकार और बड़ी बीमारियों का शिकार होना पड़ा. आज भी इस दिन को याद करके जापान के लोगों की रूह कांप जाती है.

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