Unique Wedding Tradition: यहां लड़के से पहले खंजर से शादी करती है लड़की, बारात में दूल्हे की जगह जाता है 'छुरा'
Unique Wedding Tradition: भारत का एक ऐसा राज्य है जहां पर खंजर वाली शादी की जाती है. इसमें दुल्हन खंजर से शादी करती है. आइए जानते हैं इस अनोखी परंपरा के बारे में...

Unique Wedding Tradition: भारत अलग-अलग परंपराओं और संस्कृतियों का देश है. यहां कदम-कदम पर बोली बदल जाती है और साथ ही रीति रिवाज भी. कुछ ऐसे ही अनोखे रीति रिवाज और परंपराएं हिमाचल प्रदेश में भी निभाई जाती हैं. हिमाचल प्रदेश 'छुरा वाली शादी' या 'खंजर वाली शादी' के लिए जाना जाता है. इस रिवाज में दूल्हा, दुल्हन के घर शादी में खुद नहीं जाता, बल्कि उसका छुरा उसकी मौजूदगी को दर्ज करता है और शादी के रीति रिवाज और बारात में वह छुरा ही शामिल होता है.
क्या है यह परंपरा
आपको बता दें कि कुल्लू, किन्नौर और शिमला जैसी जगहों पर छुरे को दूल्हे का प्रतीक माना जाता है. 5 से 11 लोग दुल्हन के घर पर जाते हैं और सभी रस्में करते हैं. दूल्हे का बड़ा भाई या फिर कोई भी करीबी रिश्तेदार छुरे को लेकर जाता है. यह छुरा दूल्हे की मौजूदगी का प्रतीक होता है. दुल्हन के घर पर रस्मों के दौरान हल्दी, मेहंदी और शादी की सभी रस्में उस छुरे के साथ ही की जाती हैं.
दूल्हे के घर पर होती हैं सभी रस्में पूरी
दुल्हन के घर रस्मों को पूरा करने के बाद उसे खंजर के साथ दूल्हे के घर ले जाया जाता है. यहां पर वह पहली बार अपने पति से मिलती है और आखिरी रस्मों को पूरा करती है. इसके बाद दूल्हा अपने खंजर को वापस ले लेता है और दुल्हन को सिंदूर लगता है.
कैसे हुई इस परंपरा की शुरुआत
ऐसा कहा जाता है कि खंजर वाली शादी की शुरुआत आर्थिक चुनौतियों की वजह से हुई थी. दरअसल हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में बड़ी बारात, भोज और शादी की सभी रस्मों को करना अक्सर मुश्किल और महंगा होता था. दूल्हे की जगह खंजर को भेजने से परिवार शादी की पवित्रता का सम्मान तो कर सकते थे लेकिन साथ ही दुल्हन के परिवार पर कोई दबाव भी नहीं पड़ता था. इसी के साथ खंजर दूल्हे का प्रतीक होता है और इस वजह से यह भी माना जाता है कि वह दुल्हन की रक्षा करता है.
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