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क्या कभी बूढ़े नहीं होते मगरमच्छ और हमेशा रहते हैं जिंदा, जानें क्या है इनके अमर होने का राज?

कई लोग मान लेते हैं कि मगरमच्छ अमर होते हैं या सैकड़ों–हजारों साल तक जिंदा रह सकते हैं. लेकिन क्या यह सच है? अगर मगरमच्छ बूढ़े नहीं होते तो फिर दुनिया में मरे हुए मगरमच्छ क्यों मिलते हैं.

मगरमच्छ एक ऐसा जीव है जिसे देखकर ही डर लग जाता है. उसका विशाल शरीर, तेज दांत, और पानी में अद्भुत तेजी से तैरने की क्षमता इसे बेहद रहस्यमयी बना देती है. कई बार आपने सुना होगा कि मगरमच्छ बूढ़े नहीं होते या बहुत धीरे-धीरे बूढ़े होते हैं. इसलिए कई लोग मान लेते हैं कि मगरमच्छ अमर होते हैं या सैकड़ों–हजारों साल तक जिंदा रह सकते हैं, लेकिन क्या यह सच है?

अगर मगरमच्छ बूढ़े नहीं होते तो फिर दुनिया में मरे हुए मगरमच्छ क्यों मिलते हैं, क्या कोई मगरमच्छ 500 या 1000 साल तक जिंदा रह सकता है. तो आइए जानते हैं कि क्या मगरमच्छ कभी बूढ़े नहीं होते और हमेशा जिंदा रहते हैं और इनके अमर होने का राज क्या है 

क्या मगरमच्छ कभी बूढ़े नहीं होते

वैज्ञानिकों के अनुसार, मगरमच्छों में नेग्लिजिबल सेंसेन्स नाम की एक खास क्षमता होती है. इसका मतलब है कि वे उम्र बढ़ने पर भी इंसानों और बाकी जानवरों की तरह कमजोर नहीं होते हैं. उम्र बढ़ने के बाद भी उनकी ताकत, शिकार करने की क्षमता और शरीर की एनर्जी लगभग वैसी ही रहती है, बल्कि कई बार बड़े मगरमच्छ छोटे मगरमच्छों से ज्यादा ताकतवर होते हैं. इसी वजह से कई लोग ये समझ लेते हैं कि मगरमच्छ कभी बूढ़े नहीं होते या हमेशा जिंदा रह सकते हैं. 

मगरमच्छ मरते क्यों हैं?

1. भूख से मौत - मगरमच्छ कई महीनों तक बिना खाए रह सकते हैं, लेकिन अगर लंबे समय तक भोजन न मिले तो वे कमजोर पड़ जाते हैं और अंत में भूख से मर जाते हैं. कई बार 1 साल तक भी खाना न मिलने पर उनकी मौत हो जाती है. 

2. आपसी लड़ाई - बड़े नर मगरमच्छ बहुत ही टेरीटोरियल होते हैं. अपने इलाके की रक्षा करने के लिए वे एक-दूसरे से भयंकर लड़ाई करते हैं. इन लड़ाइयों में गंभीर चोटें लग सकती हैं, संक्रमण हो सकता है और शिकार करने की ताकत खत्म हो सकती है. वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग 30 प्रतिशत नर मगरमच्छ आपसी लड़ाई में मारे जाते हैं. 

3. इंसानों की वजह से मौत - सबसे ज्यादा मगरमच्छ इंसानों की वजह से मरते हैं. उनकी कीमती खाल की वजह से हर साल हजारों मगरमच्छों का अवैध शिकार किया जाता है. अनुमान है कि लगभग 60 प्रतिशत मगरमच्छ इंसानों की वजह से मरते हैं. 

4. चोट, बीमारी और हादसे - किसी शिकारी जानवर का हमला, मछली पकड़ने के जाल में फंसना, नावों से टकराना या बीमारी भी उनकी मौत का कारण बन सकता है. 
 
क्या मगरमच्छ 500 या 1000 साल तक जिंदा रहते हैं?

अब तक वैज्ञानिकों को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि कोई मगरमच्छ 500 या 1000 साल जिया हो. हालांकि वे लंबे समय तक जीते हैं. कई मगरमच्छ 70 से 100 साल तक आसानी से जी लेते हैं. कुछ असाधारण मामलों में 120 साल तक भी जीने के संकेत मिले हैं, पर इससे ज्यादा नहीं. 
 
सॉल्टवॉटर क्रोकोडाइल रहस्यमयी मगरमच्छ

सॉल्टवॉटर क्रोकोडाइल को दुनिया के सबसे ताकतवर मगरमच्छों में माना जाता है. इसमें कई अनोखी बातें छिपी हैं. जैसे ये घंटों तक बिना हिले रहते हैं क्योंकि वे कोल्ड-ब्लडेड यानी ठंडे खून वाले जानवर हैं. अपने शरीर का तापमान बनाए रखने और एनर्जी बचाने के लिए वे लंबे समय तक चुपचाप लेटे रहते हैं. इसके अलावा महीनों तक बिना खाए रह सकते हैं. धूप सेंक कर और कम एनर्जी खर्च करके वे कई महीनों तक बगैर खाने जिंदा रह पाते हैं. साथ ही ये समुद्र में भी रहते हैं. हालांकि इनका रंग हरा नहीं बल्कि भूरा या जैतूनी होता है, फिर भी इन्हें सॉल्टवॉटर कहा जाता है क्योंकि ये खारे पानी में भी रह सकते हैं और सैकड़ों किलोमीटर तैरकर एक द्वीप से दूसरे द्वीप पहुंच जाते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि वे सूर्य की स्थिति और धरती के चुंबकीय क्षेत्र का यूज करके दूर-दराज के सफर के बाद भी अपने जन्मस्थान तक लौट आते हैं. 
 
मगरमच्छों का जन्म और बच्चों की सुरक्षा

जब अंडों से बच्चे निकलते हैं तो वे तुरंत अपनी मां की आवाज पहचान लेते हैं. मां उन्हें अपने मुंह में भरकर पानी तक ले जाती है. कुछ ही मिनटों में वे तैरना सीख जाते हैं. लेकिन छोटे मगरमच्छ बहुत कमजोर होते हैं और पक्षी, बड़े मछलियों या अन्य जानवरों  के कारण आसानी से शिकार बना लिए जाते हैं. 

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