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कब बना था पहला डीपफेक वीडियो, कटरीना-रश्मिका के बाद अब काजोल को कर रहा परेशान

डीपफेक वीडियो की पहचान करना इतना आसान नहीं है, लेकिन अगर आप तीन चीजों को ध्यान से देखेंगे तो इसे पहचानने में आपको आसानी होगी. इसमें पहली चीज है फेस, दूसरी चीज है ऑडियो और तीसरी चीज है लाइटिंग.

डीपफेक वीडियो वाली तकनीक ऐसे तो इंसानों के बीच काफी समय से है, लेकिन बीते कुछ समय से इसने लोकप्रिय लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है. इस तकनीक से सबसे ज्यादा परेशान हैं अभिनेत्रियां. कटरीना कैफ, रश्मिका मंदाना और अब काजोल भी इसकी चपेट में आ गई हैं. दरअसल, आज के दौर में सोशल मीडिया के माध्यम से कोई भी चीज तेजी से वायरल हो जाती है. ऐसे में किसी लोकप्रिय व्यक्ति का अगर डीपफेक वीडियो बनता है तो वो रातों रात करोड़ों लोगों तक पहुंच जाता है. चलिए अब आपको बताते हैं कि ये तकनीक क्या है और ये पहली बार कब इस्तेमाल किया गया. 

पहली बार कब बना डीपफेक वीडियो

आज आप जिसे डीपफेक वीडियो के नाम से जान रहे हैं, 1997 के आसपास जब ये तकनीक इजाद हुई तो इसे वीडियो रीराइट प्रोग्राम के तौर पर जाना जाता था. इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, इसे सबसे पहले क्रिस्टोफ ब्रेगलर, मिशेल कोवेल और मैल्कम स्लेनी ने इस्तेमाल किया था. इस तकनीक की मदद से इन लोगों ने पहले से बने एक वीडियो में विजुअल से छेड़छाड़ की थी और एंकर द्वारा बोले जा रहे शब्दों को भी बदल दिया था. हालांकि, ये एक प्रयोग के तौर पर किया गया था.

डीपफेक शब्द कैसे बना

अब सवाल उठता है कि जब इसे वीडियो रीराइट प्रोग्राम के तौर पर जाना जाता था तो फिर ये डीफफेक वीडियो कैसे बन गया. दरअसल, जब इस तकनीक का इजाद हुआ तो इंटरनेट की पहुंच सब तक नहीं थी और ना ही सोशल मीडिया जैसी कोई चीज़ थी. लेकिन 2017 आते-आते सब कुछ पूरी तरह से बदल चुका था. दुनिया के हाथ में फास्ट इंटरनेट था और लोग सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव थे.

इसी दौरान कुछ लोगों ने वीडियो रीराइट तकनीक से ऐसे वीडियो बनाए जिससे आम लोगों की जिंदगी पर प्रभाव पड़ने लगा. यहां तक कि इस तकनीक की मदद से क्रिमिनल क्राइम भी करने लगे. यही वजह है कि 2017 में इस तकनीक के लिए 'डीपफेक' शब्द का इस्तेमाल होने लगा.

कैसे करें डीपफेक वीडियो की पहचान

ऐसे तो डीपफेक वीडियो की पहचान करना इतना आसान नहीं है, लेकिन अगर आप तीन चीजों को ध्यान से देखेंगे तो इसे पहचानने में आपको आसानी होगी. इसमें पहली चीज है फेस. वीडियो में दिख रहे चेहरे को ध्यान से देखें, अगर ये डीपफेक तकनीक से बना है, तो चेहरे पर बने आईब्रो, कुछ स्पॉट और सिर के बालों में गड़बड़ी मिल सकती है. वहीं दूसरी चीज है ऑडियो.

डीपफेक तकनीक से बने वीडियो में ऑडियो को या तो गायब कर दिया जाता है या फिर उसे मशीन से तैयार किया जाता है. जब आप इस आवाज को ध्यान से सुनेंगे तो ये आपको ओरिजिनल आवाज़ अलग अपने आप समझ आ जाएगा. इसके साथ ही वीडियो में लाइटिंग और रिफ्लेक्शन पर भी आपको ध्यान देना है. इसकी मदद से भी आप डीपफेक वीडियो की पहचान कर सकते हैं.

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