चीफ जस्टिस या फिर मुख्य चुनाव आयुक्त, कौन है ज्यादा ताकतवर?
प्रोटोकॉल में छठे स्थान पर आने वाले CJI के पास कानून को रद्द करने की ताकत है, जबकि 9वें स्थान वाले CEC सिर्फ चुनाव कराने के मालिक हैं, जानिए अधिकारों के मामले में कौन किस पर भारी है?

पिछले कुछ दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के बीच आंतरिक फैसलों को लेकर चल रहे मतभेदों ने देश का ध्यान खींचा है. इस विवाद और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता का मामला जब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंचा, तो सुप्रीम कोर्ट ने इसकी गंभीरता को देखते हुए इसे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के पास भेज दिया. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि संवैधानिक रूप से इन दोनों पदों में से कौन सबसे ज्यादा ताकतवर है? किसके पास ज्यादा अधिकार हैं?
प्रोटोकॉल रैंक में कौन है आगे?
भारत के प्रोटोकॉल वारंट ऑफ प्रिसिडेंस में CJI को रैंक 6 पर रखा गया है, जो लोकसभा स्पीकर के बराबर है. यह दिखाता है कि न्यायपालिका के मुखिया को विधायिका के प्रमुख के बराबर सम्मान दिया जाता है. इसके मुकाबले चुनाव आयुक्त को रैंक 9 में रखा गया है, जो सुप्रीम कोर्ट के जजों की रैंक 9के ठीक नीचे आती है. इसी रैंक में UPSC के चेयरमैन और कैग जैसे संवैधानिक संस्थानों के प्रमुख भी शामिल हैं. यानी सिर्फ प्रोटोकॉल के हिसाब से देखा जाए, तो CJI का पद CEC से ऊंचा माना जाता है.
नियुक्ति की प्रक्रिया में भी है फर्क
CJI की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जो मौजूदा मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश और सुप्रीम कोर्ट के दूसरे जजों से सलाह के आधार पर होती है, इसमें कार्यपालिका का सीधा दखल नहीं होता. वहीं CEC की नियुक्ति एक चेयरमेन समिति करती है, जिसमें प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते हैं. चूंकि इस समिति में सरकार का बहुमत होता है, इसलिए CEC की नियुक्ति प्रक्रिया में कार्यपालिका का प्रभाव CJI के मुकाबले कई ज्यादा होता है.
हटाने की प्रक्रिया लगभग एक जैसी
दिलचस्प बात यह है कि दोनों को पदों से हटाने की प्रक्रिया एक जैसी रखी गई है. CJI को अनुच्छेद 124(4) के तहत संसद में महाभियोग के जरिए ही हटाया जा सकता है, और इसके दोनों सदनों में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है. ठीक इसी तरह CEC को भी अनुच्छेद 324(5) के तहत सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी ही प्रक्रिया से हटाया जाता है, सामान्य सरकारी आदेश से इन्हें हटाना संभव नहीं है. हालांकि बाकी चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए CEC की सिफारिश जरूरी होती है, जो एक असमानता मानी जाती है.
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अधिकार क्षेत्र में कौन ज्यादा प्रभावशाली
अधिकारों के मामले में CJI के पास पूरी न्यायपालिका का अधिकार होता हैं, जिसमें मामलों का आवंटन, संविधान पीठों का गठन और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति दोनों पद खाली होने की स्थिति में कार्यवाहक जिम्मेदारी निभाना भी शामिल है. वहीं CEC का अधिकार क्षेत्र मुख्य रूप से चुनाव और उसकी निगरानी तक सीमित है, हालांकि यह जिम्मेदारी भी लोकतंत्र के लिए उतनी ही अहम मानी जाती है.
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