Chhath Puja 2025: बिहार के अलावा कहां-कहां मनाई जाती है छठ? जान लें हर एक जगह का नाम
Chhath Puja 2025: छठ का त्योहार लगभग पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन कुछ ऐसे राज्य हैं जहां इसे बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है. बिहार से सटे उत्तर प्रदेश में छठ पूजा की परंपरा बहुत गहरी रही है.

Chhath Puja 2025: आज यानी 25 अक्टूबर से छठ महापर्व की शुरुआत हो गई है. छठ पर्व सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि यह आस्था, आत्म संयम और संस्कृति का महापर्व है. चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना को समर्पित होता है, जिसमें व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए उगते हुए और अस्त होते हुए सूर्य को अर्घ्य देती है. बिहार से शुरू हुई यह परंपरा आज पूरे भारत में अपनी गहरी जड़े जमा चुकी हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको उन जगहों के बारे में बताते हैं, जहां छठ का त्योहार बिहार जितना ही भव्य रूप से मनाया जाता है.
उत्तर प्रदेश में गंगा किनारे गूंजती है छठ की आस्था
वैसे तो छठ का त्योहार लगभग पूरे देश में ही मनाया जाता है, लेकिन कुछ ऐसे राज्य हैं जहां इसे बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है. ऐसे में बिहार से सटे उत्तर प्रदेश में छठ पूजा की परंपरा बहुत गहरी रही है. यहां वाराणसी और प्रयागराज के घाटों पर हर साल लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं. वाराणसी के घाट पर सूर्य को अर्घ्य देने का नजारा एक अनोखा नजारा माना जाता है. वहीं प्रयागराज में संगम तट पर श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर पूजा अर्चना करते हैं. संगम किनारे जलते दिए और भीड़ छठ की भव्यता को और बढ़ा देते हैं.
दिल्ली के यमुना घाट पर आधुनिकता के बीच परंपरा छठ
राजधानी दिल्ली में भी छठ पूजा का त्योहार हर साल बड़ी ही भव्यता के साथ मनाया जाता है. यमुना घाट पर हजारों की संख्या में छठ के दौरान श्रद्धालु एकत्रित होते हैं. यहां महिलाएं सूर्योदय से पहले ही पहुंच जाती है और नदी किनारे सूर्य को अर्घ्य देती है. वहीं दिल्ली सरकार यमुना किनारे छठ मनाने के लिए हर साल विशेष व्यवस्था करती है, जिसमें सफाई और सुरक्षा से लेकर पूजा सामग्री की व्यवस्था तक कई चीजें शामिल होती है. दिल्ली में यमुना किनारे छठ पूजा को आधुनिकता में लोक परंपरा को संजोए रखने का अनुभव माना जाता है.
झारखंड में छठ पूजा की सादगी
झारखंड के जमशेदपुर में सुवर्णरेखा नदी के किनारे छठ पूजा बड़ी श्रद्धा और सादगी के साथ मनाई जाती है. यहां स्थानीय परिवार बिना किसी दिखावे के नदी किनारे दीप जलाकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं. दीपों की लौ और भक्ति गीतों की गूंज से पूरा घाट एक आध्यात्मिक माहौल में डूब जाता है. यहां छठ की पूजा में सादगी के साथ गहरी आस्था झलकती है.
पश्चिम बंगाल में भी छठ का महत्व
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी छठ पूजा परंपरा का अहम हिस्सा बन चुकी है. शहर के रविंद्र सरोवर झील पर हर साल बड़ी संख्या में बिहार और पूर्वांचल के लोग एकत्रित होते हैं. इस झील के किनारे सैकड़ों दिए जलाकर श्रद्धालु सूर्य देव की आराधना करते हैं. वहीं शहर के बीच यह शांत माहौल, दीपों की रोशनी और लोकगीतों की गूंज एक अलग नजारा पेश करती है.
छत्तीसगढ़ में भी बढ़ने लगा छठ का उत्साह
छठ का त्योहार पारंपरिक रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है, लेकिन पिछले काफी समय छठ पर्व का छत्तीसगढ़ में भी उत्साह रहता है. छत्तीसगढ़ में बिलासपुर सहित राज्य के कई हिस्सों में अब पूर्वांचल के लोगों के साथ स्थानीय लोग भी इस पर्व में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं.
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Source: IOCL

























