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Air Turbulence: क्या मौसम की तरह टर्बुलेंस का पहले से लग सकता है पता, अगर हां तो कैसे काम करेगी यह तकनीक

फ्लाइट में टर्बुलेंस की घटनाएँं लगातार बढ़ती जा रही है. लेकिन क्या टर्बुलेंस का पहले से पता चल सकता है? जिससे इन घटनाओं को रोका जा सके. टर्बुलेंस में यात्री खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं.

फ्लाइट में ज्यादा सफर करने वाले यात्री टर्बुलेंस शब्द से परिचित होंगे. खासकर अंतरराष्ट्रीय विमान में सफर करने वाले यात्रियों का तो कई बार टर्बुलेंस से सामना भी हुआ होगा. बीते रविवार को भी दोहा से आयरलैंड के डबलिन जा रहे कतर एयरवेज के विमान में टर्बुलेंस के कारण 12 लोग घायल हुए थे. इससे पहले भी 21 मई के दिन सिंगापुर एयरलाइन्स की फ्लाइट म्यांमार के आसमान में एयर टर्बुलेंस में फंस गई थी. सवाल ये है कि आखिर मौसम की तरह क्या पहले से टर्बुलेंस के बारे में पता नहीं चल सकता है क्या? आज हम आपको टर्बुलेंस के बारे में बताएंगे. 

टर्बुलेंस की घटना

फ्लाइट में एयर टर्बुलेंस की घटना होना आम बात है. 21 मई के दिन लंदन से सिंगापुर के लिए उड़ान भरी फ्लाइट में जब टर्बुलेंस के झटके लगे थे, उस वक्त झटकों के कारण 73 साल के ब्रिटिश पैसेंजर की मौत हो गई है, वहीं 30 अन्य यात्री घायल थे. 

क्या होता टर्बुलेंस ?

सबसे पहले ये जानते हैं कि टर्बुलेंस क्या होता है? बता दें कि जब उड़ान के दौरान विमान के पंखों से हवा अनियंत्रित होकर टकराती है तो प्‍लेन में एयर टर्बुलेंस पैदा होता है. इस टर्बुलेंस के कारण विमान ऊपर नीचे होने लगता है. इससे यात्रियों को झटके लगने शुरू हो जाते हैं. 

टर्बुलेंस का कैसे चलेगा पता? 

बता दें कि फ्लाइट टेकऑफ से पहले उस सेक्‍टर के मौसम के बारे में आंकलन करके रिपोर्ट तैयार की जाती है. यह आंकलन दो तरह का होता है, पहला-आसमान में मौसम कैसा रहेगा और दूसरा उस एयरपोर्ट का मौसम कैसा होगा. वहीं क्लियर एयर टर्बुलेंस को लेकर पायलट को शेयर ग्रेडियंड्स चार्ट उपलब्‍ध कराया जाता है. हालांकि आसमान में मौजूद क्लियर एयर टर्बुलेंस का सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है. आसमान में वास्‍तविक स्थिति क्‍या होगी, यह वहां जाकर ही पता चल सकता है. इसके अलावा उस समय की परिस्थितियों पर निर्भर होता कि एयर टर्बुलेंस से कैसे बचा जा सकता है. इसके अलावा फ्लाइट में सेंसर भी लगे होते हैं, जो  मौसम संबंधी स्थिति के बारे में बताते हैं. 

सीट बेल्ट लगाना एक अच्छा उपाय

फ्लाइट में यात्री एयर टर्बुलेंस को रोक नहीं सकते हैं, ये एक बहुत सामान्य घटना है. लेकिन इस दौरान यात्री खुद को सुरक्षित रख सकते हैं. हालांकि फ्लाइट में सफर के दौरान आपने गौर किया होगा कि कई बार फ्लाइट टेकऑफ के बाद यात्री सीट बेल्ट खोल देते हैं. वहीं जब अचानक टर्बुलेंस आता है तो यात्री इस दौरान अनियंत्रित होकर ऊपर और इधर-उधर की तरफ गिरने लगते हैं. यही कारण है कि पायलट सफर के दौरान हमेशा अपनी सीट बेल्ट लगाकर रखते हैं. इसलिए एयर टर्बलेंस समेत किसी भी घटना से बचने के लिए फ्लाइट में सफर के दौरान सीट बेल्ट लगाना एक अच्छा और सुरक्षित विकल्प है. 

ये भी पढ़ें: हवाई जहाज में सीट बेल्ट बांधना क्यों होता है जरूरी, क्या ऐसा नहीं करने वाले पैसेंजर को मिलती है सजा?

गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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