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भारत में शेख हसीना, क्या पाकिस्तानी नेताओं को भी शरण देती है सरकार?

भारत में शेख हसीना पिछले दो साल से रह रही हैं, लेकिन अब इस साल के अंत तक उनके वापस अपने देश जाने की बात सामने आ रही है. तो क्या ऐसे में भारत पाकिस्तान के नेताओं को भी शरण दे सकता है कि नहीं.

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  • शरण देना सरकार की विदेश नीति व रणनीतिक प्राथमिकता है।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पिछले दो साल से भारत में रह रही हैं. हाल ही में उनके द्वारा अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बांग्लादेश लौटने और वहां की अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताने वाले बयान ने दोनों पड़ोसी देशों में हलचल पैदा कर दी है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या भारत सरकार पाकिस्तान के राजनीतिक नेताओं को भी अपने यहां पनाह दे सकती है? आइए समझते हैं कि इस मामले पर भारत की कूटनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, कानूनी नियम, राजनीतिक शरण का दायरा क्या कहता है.

राजनीतिक शरण का मतलब क्या है?

राजनीतिक शरण वह कानूनी सुरक्षा है जो किसी व्यक्ति को दूसरे देश से तब मिलती है जब उसे अपने ही देश में जीवन या स्वतंत्रता का गंभीर खतरा हो. नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी जाति, धर्म, राष्ट्रीयता, किसी विशेष सामाजिक समूह से जुड़ाव या अपनी राजनीतिक विचारधारा के कारण प्रताड़ित किया जा रहा हो और अपने देश में रहने में असुरक्षित महसूस कर रहा हो, तो वह किसी अन्य देश से राजनीतिक शरण की मांग कर सकता है.

 दूसरे देश में शरण पाने की प्रक्रिया 

किसी भी देश में असाइलम या राजनीतिक शरण हासिल करने की प्रक्रिया काफी लंबी और जटिल होती है. इसके लिए आवेदक को ठोस दस्तावेजों के माध्यम से यह साबित करना होता है कि उसे अपने देश में वास्तव में जान का खतरा है. कई मामलों में दावों की पुष्टि के लिए गवाहों की जरूरत होती है. इसके बाद आवेदक का एक इंटरव्यू लिया जाता है, जिसमें उसे अपनी आपबीती और भारत आने की वजहों को विस्तार से स्पष्ट करना पड़ता है.

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भारत में शेख हसीना, क्या पाकिस्तानी नेताओं को भी शरण देती है सरकार?

शरण पाने वाले के मौलिक अधिकार क्या हैं?

जब किसी विदेशी नागरिक को किसी देश में राजनीतिक शरण मिल जाती है, तो उसे कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त होते हैं. सबसे पहले तो उसे उस देश में सुरक्षित रहने का वैध अधिकार मिल जाता है. इसके अलावा, कई देश शरणार्थियों को अपनी आजीविका चलाने के लिए काम करने की अनुमति देते हैं. इसके साथ ही, शरणार्थी परिवार के बच्चों को स्थानीय स्कूलों में मुफ्त शिक्षा प्राप्त करने और मूलभूत नागरिक सुविधाएं हासिल करने का भी पूरा अधिकार मिलता है.

तो क्या पाकिस्तानी नेताओं को भी मिल सकती है भारत में शरण?

पाकिस्तान के किसी भी राजनीतिक चेहरे को भारत में पनाह मिलने की संभावना एकदम न के बराबर मानी जाती है. आजादी के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में लगातार तनाव और कड़वाहट रही है, यह बात तो सभी जानते हैं. ऐसे माहौल में पड़ोसी देश के किसी नेता को भारतीय सीमा के भीतर शरण देना बेहद पेचीदा और संवेदनशील मामला बन जाता है. इस तरह के किसी भी निर्णय से दोनों मुल्कों के द्विपक्षीय संबंधों पर बहुत गहरा कूटनीतिक असर पड़ सकता है. इसलिए बहुत ही मुश्किल है कि पाकिस्तान के नेता को भारत में शरण मिले.

कूटनीतिक संतुलन और आपसी रिश्ते

भारत अपनी सीमाओं में आने वाले शरणार्थियों को सुरक्षा तो देता है, लेकिन राजनीतिक शरण का मामला पूरी तरह से अलग होता है. पाकिस्तान के नेताओं को पनाह देने से पहले भारत सरकार को कई राजनीतिक और रणनीतिक पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करना होता है. इसमें दोनों देशों के आपसी रिश्ते, आंतरिक सुरक्षा की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय दबाव शामिल हैं. इतिहास गवाह है कि दोनों देशों के रिश्ते कभी इतने सहज नहीं रहे कि कोई भारतीय या पाकिस्तानी नेता एक-दूसरे के देश में शरण ले सके.


भारत में शेख हसीना, क्या पाकिस्तानी नेताओं को भी शरण देती है सरकार?

मामले की गंभीरता और सरकार के विशेषाधिकार

सैद्धांतिक रूप से किसी भी पाकिस्तानी नागरिक या नेता को भारत में शरण मिल सकती है, लेकिन यह निर्णय पूरी तरह से भारत सरकार की विदेश नीति पर टिका होता है. इसके लिए मामले की असाधारण गंभीरता, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को देखा जाता है. चूंकि भारत के पास राजनीतिक शरण से जुड़ा कोई एक निश्चित ढांचा नहीं है, इसलिए सरकार हर आवेदन पर किसी स्थायी नियम के बजाय अपनी सहूलियत और स्थिति के आधार पर अलग-अलग फैसला लेती है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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