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Country Name Change: क्या कोई देश बदल‌ सकता है अपना नाम, जानें क्या होती है पूरी प्रक्रिया

Country Name Change: हम सभी नए राज्यों का नाम बदलते हुए तो देखा है लेकिन क्या कोई देश भी अपना नाम बदल सकता है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब और क्या होती है इसकी प्रक्रिया.

Country Name Change: किसी भी देश का नाम बदलना ना तो प्रतीकात्मक होता है और ना ही आसान. अंतरराष्ट्रीय कानून किसी भी देश पर यह चुनने से कोई रोक नहीं लगाता कि वह खुद को कैसे पहचानना चाहता है. हर संप्रभु देश को अपना नाम बदलने की पूरी आजादी है. हालांकि यह एक लंबी, कानूनी रूप से जटिल और आर्थिक रूप से महंगी प्रक्रिया है.

घरेलू कानून सबसे पहले आता है 

यह प्रक्रिया हमेशा देश के अंदर से ही शुरू होती है. ज्यादातर देशों में देश का नाम संविधान के पहले हिस्से में ही लिखा होता है. इसका मतलब होता है कि संवैधानिक संशोधन जरूरी है. ऐसे संशोधन के लिए आमतौर पर विशेष बहुमत की जरूरत होती है. अक्सर संसद के दो तिहाई सदस्यों की. संघीय देशों में तो बाधा और भी बड़ी होती है. जैसे भारत देश में इंडिया से भारत करने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के अनुच्छेद 1 में संशोधन करना होगा. इसके लिए संसद में दो तिहाई बहुमत और यदि संघीय सिद्धांत प्रभावित होता है तो कम से कम 50% राज्य विधानसभाओं की सहमति की जरूरत होगी. 

अंतरराष्ट्रीय मान्यता जरूरी है 

किसी भी देश का नया नाम औपचारिक अंतरराष्ट्रीय मान्यता के बाद ही विश्व स्तर पर प्रभावी होता है. इसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव को भेजे गए एक आधिकारिक संचार के जरिए संयुक्त राष्ट्र को सूचित किया जाता है. सरकार को साफ तौर पर यह बताना होगा कि नया नाम संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाओं में कैसे लिखा जाना चाहिए. एक बार स्वीकार हो जाने के बाद संयुक्त राष्ट्रीय अपने आधिकारिक रिकॉर्ड और डेटाबेस को अपडेट करता है. इसमें UNTERM भी शामिल है. 

खर्च करना पड़ता है काफी ज्यादा पैसा

किसी भी देश को अपना नाम बदलने में काफी मोटा खर्चा करना पड़ता है. यह पैसा पासपोर्ट, पहचान पत्र, करेंसी नोट और सिक्कों को फिर से जारी करने, मिलट्री यूनिफॉर्म, सरकारी लेटर हेड, दूतावासों, सड़क के साइन बोर्ड, आधिकारिक नक्शे और सरकारी वेबसाइटों और डोमेन जैसी डिजिटल संपत्तियों को अपडेट करने में खर्च किया जाता है.

देश अपना नाम क्यों बदलते हैं 

देश आमतौर पर औपनिवेशिक काल की पहचान से छुटकारा पाने, सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करने या फिर वैश्विक भ्रम को खत्म करने के लिए अपना नाम बदलते हैं. श्रीलंका ने 1972 में सीलोन नाम हटा दिया और म्यांमार ने 1989 में बर्मा की जगह यह नाम अपनाया था.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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