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Space Mission: अंतरिक्ष से लौटने पर एस्ट्रोनॉट्स को झेलनी पड़ती हैं ये दिक्कतें, शरीर पर कैसा पड़ता है असर?

Space Mission: अंतरिक्ष से लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

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  • अंतरिक्ष से लौटने पर संतुलन और तालमेल बिगड़ जाता है।
  • माइक्रोग्रैविटी के कारण मांसपेशियाँ, हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं।
  • पैरों की संवेदनशीलता बढ़ती, रक्त प्रवाह में भी बदलाव आता है।

Space Mission: अंतरिक्ष की यात्रा इंसानों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. लेकिन पृथ्वी से बाहर रहने का इंसानी शरीर पर काफी ज्यादा गहरा असर पड़ता है. अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष के माइक्रोग्रेविटी वाले माहौल में हफ्तों, महीनों या फिर उससे भी ज्यादा का समय बिताते हैं. यहां शरीर धीरे-धीरे उन हालात के हिसाब से ढल जाता है जो पृथ्वी से बिल्कुल अलग होते हैं. हालांकि जब अंतरिक्ष यात्री घर लौटते हैं तो उन्हें अक्सर कई तरह की शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. आइए जानते हैं उन सभी चुनौतियों के बारे में.

संतुलन की समस्या और चक्कर आना 

धरती पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को सबसे पहले संतुलन और तालमेल से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. अंतरिक्ष में शरीर का वेस्टिबुलर सिस्टम जो संतुलन बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है भारहीन माहौल के हिसाब से ढल जाता है. क्योंकि अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक तैरते रहते हैं इस वजह से उनका दिमाग गुरुत्वाकर्षण के लगातार खिंचाव के बिना काम करने का आदी हो जाता है.

जब वे धरती पर लौटते हैं तो वेस्टिबुलर सिस्टम को तेजी से फिर से  तालमेल बिठाना पड़ता है. यही वजह है कि अंतरिक्ष यात्रियों को अक्सर चक्कर आना, दिशा का पता न चलना और सीधी रेखा में चलने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है. 

मांसपेशियों की कमजोरी 

इंसानी शरीर को गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ काम करने के लिए बनाया गया है. धरती पर रोजमर्रा की गतिविधि जैसे चलना, खड़े होना और सीढ़ियां चढ़ने से मांसपेशियों की लगातार कसरत होती रहती है. हालांकि अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री तैरते रहते हैं और उन्हें अपने शरीर का वजन उठाने की जरूरत नहीं पड़ती. इस वजह से मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं. स्टडीज से यह पता चला है कि लंबे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री अपनी मांसपेशियों की ताकत का 20% से 30% तक हिस्सा खो सकते हैं. 

अंतरिक्ष में बोन डेंसिटी कम होना 

माइक्रोग्रेविटी का असर न सिर्फ मांसपेशियों पर बल्कि हड्डियों पर भी पड़ता है. क्योंकि अंतरिक्ष में हड्डियों पर वजन उठाने का सामान्य दबाव नहीं पड़ता इस वजह से वे धीरे-धीरे मिनरल खो देती हैं और उनकी डेंसिटी कम होने लगती है. लंबे मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री हर महीने अपने बोन मास्क का लगभग 1% से 2% हिस्सा खो सकते हैं. हड्डियों के नुकसान से फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है और पूरी तरह ठीक होने में महीनों या फिर साल भी लगा सकते हैं.

बेबी फीट इफेक्ट 

क्योंकि अंतरिक्ष यात्री अपना ज्यादातर समय हवा में तैरते हुए बिताते हैं इस वजह से उनके पैरों के तलवों पर चलने फिरने से होने वाला लगातार दबाव और रगड़ नहीं पड़ती. समय के साथ पैरों के तलवों की मोटी त्वचा नर्म हो जाती है और निकल जाती है. जब अंतरिक्ष यात्री धरती पर लौटते हैं और फिर से चलना शुरू करते हैं उनके पैर काफी ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं. 

खून के बहाव और दिल में बदलाव 

अंतरिक्ष में शरीर के अंदर तरल पदार्थ के घूमने का तरीका भी बदल जाता है. धरती पर गुरुत्वाकर्षण खून और शरीर के दूसरे तरल पदार्थ को शरीर के निचले हिस्से की तरफ खींचता है. अंतरिक्ष में ये तरल पदार्थ ऊपर की तरफ और सिर और छाती की तरफ चले जाते हैं. इस बदलाव की वजह से अक्सर ऑर्बिट में रहने के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों के चेहरे सूजे हुए दिखते हैं और नाक बंद हो जाती है. धरती पर लौटने के बाद तरल पदार्थ नीचे की तरफ चले जाते हैं. इस अचानक बदलाव से ऑर्थोस्टैटिक  हाइपरटेंशन नाम की स्थिति पैदा हो सकती है. इसमें खड़े होने पर ब्लड प्रेशर गिर जाता है. इसके बाद चक्कर आते हैं और बेहोशी  महसूस हो सकती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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