Ajit Pawar Plane Crash: अगर खेत में क्रैश हो जाए विमान तो क्या मिट्टी हो जाती है बंजर, जानें क्या दोबारा वहां हो सकती है खेती
Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एक विमान हादसे में मौत हो गई है. आइए जानते हैं कि जिस खेत में विमान गिरा क्या वहां की जमीन हमेशा के लिए खराब हो गई या नहीं.

Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र के बारामती के पास एक प्राइवेट प्लेन क्रैश की खबर ने पूरे राज्य में दहशत और दुख फैला दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान एक खेत में गिरा और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या जिस खेत में प्लेन क्रैश हुआ है वहां खेती करना संभव हो पाएगा या फिर जमीन हमेशा के लिए खराब हो गई.
प्लेन क्रैश के बाद मिट्टी का क्या होता है
जब भी कोई विमान खेत में गिरता है तो नुकसान सिर्फ सतह पर दिखने तक ही सीमित नहीं होता. विमान में जमा जेट फ्यूल, लुब्रिकेंट्स, हाइड्रोलिक फ्लूइड्स और दूसरे केमिकल अक्सर टक्कर के बाद मिट्टी में रिस जाते हैं. यह पदार्थ मिट्टी की रासायनिक बनावट को बदल सकते हैं और साथ ही यह कुछ समय के लिए जहरीली हो जाती है. इस तरह का प्रदूषण सीधे मिट्टी के स्वास्थ्य पर असर डालता है और खेती अगर काफी जल्दी शुरू कर दी जाए तो फसलों के लिए खतरा पैदा हो सकता है.
मिट्टी की उर्वरता और सूक्ष्मजीवों पर असर
स्वस्थ मिट्टी लाखों सूक्ष्मजीवों पर निर्भर करती है जो ऑर्गेनिक पदार्थ को तोड़ने और पौधों के लिए पोषक तत्व को मौजूद करने में मदद करते हैं. गिरे हुए एवियशन फ्यूल और तेल इन फायदेमंद रोगाणुओं को मार सकते हैं. इससे नतीजा यह होगा की मिट्टी कुछ समय के लिए अपनी प्राकृतिक उर्वरता खो सकती है. ऐसे प्रदूषण के तुरंत बाद उगाई गई फसलों में खराबी दिख सकती है या वे हानिकारक अवशेषों को सोख सकती है. इस वजह से यह फसल खाने के लिए असुरक्षित हो जाती हैं.
क्या उसी खेत में खेती फिर से शुरू की जा सकती है
ऐसे मामलों में खेती हमेशा के लिए बंद नहीं होती लेकिन इसे तुरंत फिर से शुरू नहीं किया जा सकता. खेत की मिट्टी का सुधार करना काफी ज्यादा जरूरी है. इसमें मिट्टी की ऊपरी प्रदूषित परत को हटाना, जमीन का खास न्यूट्रलाइजिंग एजेंट से इलाज करना या फिर प्रदूषकों के प्राकृतिक रूप से खत्म होने के लिए समय देना शामिल हो सकता है. कुछ मामलों में फाइटोरेमेडियेशन यानी जहर को सोखने के लिए खास पौधों का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी जाती है.
कोई भी फसल दोबारा बोने से पहले वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी की जांच करना काफी जरूरी है. कृषि और पर्यावरण विशेषज्ञ ईंधन के अवशेषों, भारी धातुओं और मिट्टी के पीएच में बदलाव की जांच करते हैं. जब अधिकारी यह सर्टिफाई कर देते हैं कि प्रदूषण का स्तर सीमा के अंदर है तभी खेती सुरक्षित रूप से दोबारा शुरू की जा सकती है.
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Source: IOCL
























