एक्सप्लोरर

AI Impact Summit 2026: अब ट्रैक्टर भी हुआ ड्राइवरलेस, जानें यह खेती में कैसे करेगा मदद और कितना होगा कामयाब?

ड्राइवरलेस ट्रैक्टर को मोबाइल ऐप या रिमोट से ऑपरेट किया जा सकता है. इसके लिए ट्रैक्टर को मैन्युअली चलाकर खेत तक ले जाना होगा. इसके बाद उसके सिस्टम में खेत का साइज, खेती का टाइप आदि फीड करना होगा.

ड्राइवरलेस गाड़ियों की बात हो तो दिमाग में सबसे पहले टेस्ला की कारों का नाम आता है, लेकिन अब यही तकनीक खेती की दुनिया में भी धमाल मचाने के लिए तैयार है. दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में 16 फरवरी से शुरू हुए एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ऐसी ही नई तकनीक को शोकेस किया गया, जिसकी मदद से अब खेती का काम करने वाले ट्रैक्टर भी ड्राइवरलेस मोड में काम करेंगे. आइए जानते हैं कि यह सिस्टम कैसे काम करता है और किन ट्रैक्टर में इसे इस्तेमाल किया जा सकता है?

कैसा है ड्राइवरलेस ट्रैक्टर?

ड्राइवरलेस ट्रैक्टर का नाम सुनते ही आपके दिमाग में एक ऐसा ट्रैक्टर आया होगा, जिसे चलाने के लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं होगी. हालांकि, ऐसा नहीं है. इस ट्रैक्टर का प्रोटोटाइप फ्रांस की एक कंपनी ने तैयार किया है, जिसे 'एग्रीनकल्चर' नाम दिया गया है. कंपनी का कहना है कि अभी यह प्रोजेक्ट यूरोप में चल रहा है. इसे जल्द ही भारत में भी लॉन्च करने की तैयारी है.

कैसे काम करता है ड्राइवरलेस ट्रैक्टर?

ड्राइवरलेस ट्रैक्टर को मोबाइल ऐप्लिकेशन या रिमोट से ऑपरेट किया जा सकता है. इसके लिए ट्रैक्टर को मैन्युअली चलाकर खेत तक ले जाना होगा. इसके बाद उसके सिस्टम में खेत का साइज, खेती का टाइप आदि फीड करना होगा. ऐसे में ट्रैक्टर खुद ही जुताई और सीडिंग जैसे काम आसानी से कर देगा. इसके लिए अलग से मैनपावर लगाने की जरूरत नहीं होगी. 

किन ट्रैक्टर में काम करेगी यह तकनीक?

अब सवाल उठता है कि यह तकनीक किन ट्रैक्टर में काम करेगी? कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि यह एआई बेस्ड एक डिवाइस है, जिसे किसी भी ट्रैक्टर पर फिट किया जा सकेगा. आप एआई को जिस तरह की कमांड देंगे, ट्रैक्टर उसी तरह काम करता रहेगा.

हादसों पर भी लगेगी रोक

कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि भारत में खेतीबाड़ी के दौरान कई बार हादसे हो जाते हैं, जिसकी वजह से काफी लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं तो कुछ लोगों को जान भी गंवानी पड़ती है. हालांकि, इस तकनीक की मदद से ऐसे हादसों पर भी रोक लगाई जा सकेगी. दरअसल, डिवाइस में ऐसे सेंसर भी लगे हैं, जो आपात स्थिति में खुद ही ट्रैक्टर को रोक देंगे, जिससे हादसा टल सकता है. गौर करने वाली बात यह है कि इस डिवाइस की मदद से ट्रैक्टर को सिर्फ खेती में इस्तेमाल किया जा सकेगा, लेकिन उसे सड़क पर नहीं चलाया जा सकेगा. सड़क पर चलाने के लिए ट्रैक्टर को मैन्युअली ही चलाना होगा.

भारत के किसानों को कब तक मिलेगी यह सुविधा?

भारत में ट्रैक्टर को कब तक ड्राइवरलेस किया जा सकता है? इस सवाल पर कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि भारत में यह तकनीक आने में थोड़ा वक्त लग सकता है, क्योंकि अभी यह डिवाइस काफी महंगी है. अगर भारत सरकार इस पर सब्सिडी देती है तो भारतीय किसानों की मदद के लिए यह तकनीक जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद बढ़ जाएगी.

यह भी पढ़ें: चीन के रोबोटिक डॉग को अपना बताकर फंसी गलगोटिया यूनिवर्सिटी, यूजर्स ने ऐसे लिए मजे

खबर कोई भी हो... कैसी भी हो... उसकी नब्ज पकड़ना और पाठकों को उनके मन की बात समझाना कुमार सम्भव जैन की काबिलियत है. मुहब्बत की नगरी आगरा से मैंने पत्रकारिता की दुनिया में पहला कदम रखा, जो अदब के शहर लखनऊ में परवान चढ़ा. आगरा में अकिंचन भारत नाम के छोटे से अखबार में पत्रकारिता का पाठ पढ़ा तो लखनऊ में अमर उजाला ने खबरों से खेलना सिखाया. 

2010 में कारवां देश के आखिरी छोर यानी राजस्थान के श्रीगंगानगर पहुंचा तो दैनिक भास्कर ने मेरी मेहनत में जुनून का तड़का लगा दिया. यहां करीब डेढ़ साल बिताने के बाद दिल्ली ने अपने दिल में जगह दी और नवभारत टाइम्स में नौकरी दिला दी. एनबीटी में गुजरे सात साल ने हर उस क्षेत्र में महारत दिलाई, जिसका सपना छोटे-से शहर से निकला हर लड़का देखता है. साल 2018 था और डिजिटल ने अपना रंग जमाना शुरू कर दिया था तो मैंने भी हवा के रुख पकड़ लिया और भोपाल में दैनिक भास्कर पहुंच गया. 

झीलों के शहर की खूबसूरती ने दिल और दिमाग पर काबू तो किया, लेकिन जरूरतों ने वापस दिल्ली ला पटका और जनसत्ता में काफी कुछ सीखा. यह पहला ऐसा पड़ाव था, जिसकी आदत धारा के विपरीत चलना थी. इसके बाद अमर उजाला नोएडा में करीब तीन साल गुजारे और अब एबीपी न्यूज में बतौर फीचर एडिटर लोगों के दुख-दर्द और तकलीफ का इलाज ढूंढता हूं. करीब 18 साल के इस सफर में पत्रकारिता की दुनिया के हर कोने को खंगाला, चाहे वह रिपोर्टिंग हो या डेस्क... प्रिंटिंग हो या मैनेजमेंट... 

काम की बात तो बहुत हो चुकी अब अपने बारे में भी चंद बातें बयां कर देता हूं. मिजाज से मस्तमौला तो काम में दबंग दिखना मेरी पहचान है. घूमने-फिरने का शौकीन हूं तो कभी भी आवारा हवा के झोंके की तरह कहीं न कहीं निकल जाता हूं. पढ़ना-लिखना भी बेहद पसंद है और यारों के साथ वक्त बिताना ही मेरा पैशन है. 

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

China Protests : चीन में तानाशाही तो फिर वहां कैसे होते हैं सरकार के खिलाफ प्रदर्शन?
चीन में तानाशाही तो फिर वहां कैसे होते हैं सरकार के खिलाफ प्रदर्शन?
क्या होते हैं अजूबे? दुनिया में सात ही क्यों, 8 वां अब तक क्यों नहीं बन पाया
क्या होते हैं अजूबे? दुनिया में सात ही क्यों, 8 वां अब तक क्यों नहीं बन पाया
हिंदू धर्म ही नहीं, खुद पैगंबर मोहम्मद को भी नहीं पसंद था लहसुन प्याज- होश उड़ा देगी सच्चाई
पैगंबर मोहम्मद क्यों नहीं खाते थे लहसुन-प्याज? जानें यह सच
पाकिस्तान में कौन है नेता प्रतिपक्ष? राहुल गांधी के मुकाबले क्या है उनकी शिक्षा
पाकिस्तान में कौन है नेता प्रतिपक्ष? राहुल गांधी के मुकाबले क्या है उनकी शिक्षा

वीडियोज

गोरखपुर की लेडी नटवरलाल का करोड़ों वाला मायाजाल!
Pati Brahmachari:💔Isha-Suraj के बीच फिर आई Avni, तकरार के बीच पनपने लगा प्यार। #sbs
Bollywood News: बिग बॉस के टीज़र से मचा तहलका: क्या टीवी पर फिर दिखेगी 'करण-अर्जुन' की जोड़ी? ( 05.08.26 )
Jharkhand Job Protest: झारखंड नौकरी आंदोलन से घिरी सरकार! इस्तीफा देंगे हेमंत सोरेन? ABPLIVE
Mannat: Dhairya का खतरनाक खेल फेल, Mannat ने बचा लिया Vikrant को मौत के मुंह से!

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
मानसून सत्र का बढ़ेगा समय या बुलाया जाएगा विशेष सत्र? सरकार ने किया साफ
मानसून सत्र का बढ़ेगा समय या बुलाया जाएगा विशेष सत्र? सरकार ने किया साफ
'संप्रभुता का अपमान', शेख हसीना की PC से भड़क उठी बांग्लादेश सरकार
'संप्रभुता का अपमान', शेख हसीना की PC से भड़क उठी बांग्लादेश सरकार
यूपी चुनाव पर राहुल गांधी की बड़ी बैठक, बनाया ये खास मास्टर प्लान!
यूपी चुनाव पर राहुल गांधी की बड़ी बैठक, बनाया ये खास मास्टर प्लान!
वैभव सूर्यवंशी का भी होगा कांबली और शॉ जैसा हाल? दिग्गज के बयान से दुनिया हैरान 
वैभव सूर्यवंशी का भी होगा कांबली और शॉ जैसा हाल? दिग्गज के बयान से दुनिया हैरान 
ऋषभ पंत, संजू सैमसन या ईशान किशन, किसे मिलना चाहिए 2027 वनडे वर्ल्ड कप में मौका? 
ऋषभ पंत, संजू सैमसन या ईशान किशन, किसे मिलना चाहिए 2027 वनडे वर्ल्ड कप में मौका? 
Xप्लेन: विकसित भारत के ख्वाब के बीच कुपोषण ने 'दोहरी तस्वीर' कैसे बना दी?
विकसित भारत के ख्वाब के बीच कुपोषण ने 'दोहरी तस्वीर' कैसे बना दी?
'पाकिस्तान कर रहा यौम-ए-इस्तेहसाल की नौटंकी', भारत बोला- बंद करो प्रोपेगेंडा
'पाकिस्तान कर रहा यौम-ए-इस्तेहसाल की नौटंकी', भारत बोला- बंद करो प्रोपेगेंडा
परिसीमन बिल पर सरकार ने मांगा समर्थन तो अड़ गए राहुल गांधी, बोले- 'No, पहले...'
परिसीमन बिल पर सरकार ने मांगा समर्थन तो अड़े राहुल, बोले- 'पहले सदन में आएं गृहमंत्री'
Embed widget