एक्सप्लोरर

आजादी के बाद RSS पर भारत में लगा था कई बार बैन, ये थे बड़े कारण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर आजादी के बाद सरकार ने तीन बार बैन लगाया था. क्या आप जानते हैं कि आखिर आरएसएस पर बैन क्यों लगा था और अब सरकारी कर्मचारी कैसे कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकते हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों में अब सरकारी कर्मचारी भी हिस्सा ले सकते हैं. भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस के कार्यक्रमों में शामिल होने पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आरएसएस के कार्यक्रमों में कब-कब कौन सा बैन लगा था. आज हम आपको बताएंगे कि आरएसएस पर किन कारणों से बैन लगाया गया था. 

आरएसएस

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर कांग्रेस के कार्यकाल में तीन बार प्रतिबंध लगाया गया था. लेकिन इसके बावजूद आरएसएस की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया और निरंतर आरएसएस का कारवां आगे बढ़ रहा है. हालांकि गृह मंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए 1966, 1970 और 1980 में तत्कालीन सरकारों द्वारा जारी उन आदेशों में संशोधन किया है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की शाखाओं और उसकी अन्य गतिविधियों में शामिल होने पर रोक लगाई गई थी. इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने नरेंद्र मोदी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. वहीं इस फैसले को लेकर विपक्ष हमलावर हो चुका है.

संघ पर तीन बार लगा बैन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर कांग्रेस की सरकार में तीन बार प्रतिबंध लगाया जा चुका है. सबसे पहले आजादी के तुरंत बाद प्रतिबंध लगा था. सबसे पहले 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इसके पीछे की वजह ये थी कि महात्मा गांधी की हत्या को संघ से जोड़कर देखा गया था. उस दौरान 18 महीने तक संघ पर प्रतिबंध लगा था. ये प्रतिबंध 11 जुलाई, 1949 को तब हटा जब देश के उस वक्त के गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल की शर्तें तत्कालीन संघ प्रमुख माधवराव सदाशिव गोलवलकर ने मानी थी. जानकारी के मुताबिक इन शर्तों में संघ को अपना संविधान बनाने और उसे प्रकाशित करने की बात थी. जिसमें चुनाव की खास अहमियत होगी और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत चुनाव होगा. इसके साथ ही आरएसएस की देश की राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखेगा.

दूसरी बार क्यों लगा बैन

आरएसएस को दूसरी बार प्रतिबंध का सामना कांग्रेस सरकार में इमरजेंसी के दौरान करना पड़ा था. हालांकि इस दौरान सिर्फ संगठन ही नहीं पूरे देश बहुत सारे संगठन, मीडिया पर प्रतिबंध लगा था. दरअसल इंदिरा गांधी ने साल 1975 जब देश में इमरजेंसी लगाई थी, उस वक्त आरएसएस ने इसका जमकर विरोध किया था. इस विरोध के कारण बड़ी संख्या में आरएसएस के लोगों को जेल में डाला गया था. इस दौरान आरएसएस पर 2 साल तक पाबंदी लगी हुई थी. इमरजेंसी के बाद जब चुनाव की घोषणा हुई थी, तो जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हो गया था. इसके बाद साल 1977 में जनता पार्टी सत्ता में आई थी, उस वक्त संघ पर लगा प्रतिबंध हटाया गया था.

आरएसएस पर तीसरी बार बैन 

इसके अलावा आरएसएस पर तीसरी बार प्रतिबंध साल 1992 में लगा था. दरअसल पहली बार बीजेपी ने 1984 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, इस चुनाव में पार्टी महज 2 सीटों पर सिमट गई थी. लेकिन इसके बाद बाबरी मस्जिद ने राजनीतिक में बड़ा उलटफेर किया था. 1986 में अयोध्या के विवादित परिसर का ताला खोल दिया गया और वहां से मंदिर-मस्जिद की राजनीति गर्मा गई थी. जानकारी के मुताबिक 1986 से 1992 के बीच सामाजिक खूब टकराव हुआ था. इस कारण जगह-जगह हिंसा हुई और लोगों की जान गई थी. इसके बाद साल 1992 में अयोध्या में भीड़ ने विवादित ढांचे का गुंबद गिरा दिया था. उस वक्त देश की स्थिति देखकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने आरएसएस पर भी प्रतिबंध लगा दिया था. लेकिन लंबी जांच के बाद आरएसएस के खिलाफ कुछ नहीं मिला था. नतीजतन आखिर में तीसरी बार भी 4 जून 1993 को सरकार को आरएसएस पर से प्रतिबंध हटाना पड़ा था.

क्या है आरएसएस

बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) दुनिया का सबसे बड़ा स्वैच्छिक संगठन है और इसके स्वयंसेवक देश भर में सक्रिय हैं. भारतीय जनता पार्टी के ज्यादातर बड़े नेता संघ से जुड़े हुए हैं, जिनमें स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं, जिन्होंने संघ में लंबे समय तक अपनी सेवा दी है. गौरतलब है कि आरएसएस की स्थापना केशव बलराम हेडगेवार ने की थी. संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 विजयदशमी के दिन की गई थी. यही वजह है कि हर साल आरएसएस विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है. उस वक्त डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने एक छोटे समूह के साथ की थी. आरएसएस की कार्यशैली का मूल आधार दैनिक शाखा को माना जाता है. 

सरकारी कर्मचारियों पर कब लगा था बैन

केंद्र सरकार ने 1966, 1970 और 1980 में तत्कालीन सरकारों द्वारा जारी उन आदेशों में संशोधन किया है, जिनमें सरकारी कर्मचारियों के आरएसएस की शाखाओं और उसकी अन्य गतिविधियों से दूर रखने के लिए रोक लगाई थी. इतना ही नहीं आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने पर कर्मचारियों को सजा देने तक का प्रावधान भी लागू किया गया था. यही कारण है कि सरकारी सेवाओं से जुड़े लाभ लेने के लिए कर्मचारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों से दूर रहते थे. लेकिन अब 9 जुलाई 2024 को 58 साल का प्रतिबंध हटा दिया गया है. 

ये भी पढ़ें: कितना मुश्किल है यूएई की नागरिकता लेना, क्या है दुबई में रहने का तरीका?

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

इस्लामाबाद के जिस होटल में होगी पीस टॉक, कौन है उसका मालिक? जानें उसकी एक दिन की कमाई
इस्लामाबाद के जिस होटल में होगी पीस टॉक, कौन है उसका मालिक? जानें उसकी एक दिन की कमाई
क्या होर्मुज स्ट्रेट की तरह भारत भी किसी समुद्री मार्ग से वसूलता है टोल, जानें पानी में कहां है भारत का कब्जा?
क्या होर्मुज स्ट्रेट की तरह भारत भी किसी समुद्री मार्ग से वसूलता है टोल, जानें पानी में कहां है भारत का कब्जा?
Crude Oil Crisis : भारत के पास है हिंद महासागर, फिर वहां से क्यों नहीं निकाला जाता क्रूड ऑयल? जानें वजह
भारत के पास है हिंद महासागर, फिर वहां से क्यों नहीं निकाला जाता क्रूड ऑयल? जानें वजह
Indian Military Strait Of Hormuz: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कितने घंटे में अपने कब्जे में ले सकती है भारतीय सेना? देखता रह जाएगा अमेरिका
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को कितने घंटे में अपने कब्जे में ले सकती है भारतीय सेना? देखता रह जाएगा अमेरिका

वीडियोज

Sandeep Chaudhary: चुनाव आयोग के 'AI' ने कैसे छीना बंगाल का वोट? | Bengal Election 26 | Seedha Sawal
Pahalgam Attack Anniversary: पहलगाम हमले की बरसी पर पर्यटकों की घाटी पर सैलाब | Kashmir Terror
Chitra Tripathi: सीजफायर के पीछे ट्रंप की क्या है रणनीति? | Janhit | Iran US Ceasefire | Hormuz
Pratima Mishra: 'झालमुड़ी' के बाद चर्चा में 'माछ-भात'! | Bharat Ki Baat | PM Modi | Anurag Thakur
Pratima Mishra: क्या ट्रंप का 'माइंड गेम' उन पर ही उल्टा पड़ा? | Bharat Ki Baat | America

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
Exclusive: हार रहीं दीदी, बंगाल चुनाव से पहले शाह का बड़ा दावा- बताया सत्ता में आने पर क्या करेगी BJP
Exclusive: हार रहीं दीदी, बंगाल चुनाव से पहले शाह का बड़ा दावा- बताया सत्ता में आने पर क्या करेगी BJP
दिल्ली में आसमान से बरस रही आग! पारा 42 के पार, 24 अप्रैल से लू चलने पर और बढ़ेगी परेशानी
दिल्ली में आसमान से बरस रही आग! पारा 42 के पार, 24 अप्रैल से लू चलने पर और बढ़ेगी परेशानी
सेकंड प्रेग्नेंसी अनाउंसमेंट के बाद दीपिका की पहली तस्वीर आई सामने, रणवीर सिंह नहीं इस शख्स के साथ आईं नजर
सेकंड प्रेग्नेंसी अनाउंसमेंट के बाद दीपिका की पहली तस्वीर आई सामने, रणवीर सिंह नहीं इस शख्स के साथ आईं नजर
IPL के इतिहास में ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी बने जोफ्रा आर्चर, लिख डाला नया इतिहास
IPL के इतिहास में ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी बने जोफ्रा आर्चर, लिख डाला नया इतिहास
Explained: बंगाल चुनाव के पहले चरण में कितने लोग नहीं डाल पाएंगे वोट? SIR में कुल 91 लाख नाम कटने का कितना असर?
बंगाल चुनाव के पहले चरण में कितने लोग नहीं डाल पाएंगे वोट? SIR में 91 लाख नाम कटने का असर कितना
UP Board 12th Result 2026 Live: ​अब कुछ घंटे और शाम 4 बजे जारी होंगे 12वीं के नतीजे, जानें कैसे चेक कर सकेंगे रिजल्ट
UP Board 12th Result 2026 Live: ​अब कुछ घंटे और शाम 4 बजे जारी होंगे 12वीं के नतीजे, जानें कैसे चेक कर सकेंगे रिजल्ट
पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर पाकिस्तान का पहला रिएक्शन, शहबाज सरकार ने कहा- भारत हमें...
पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर पाकिस्तान का पहला रिएक्शन, शहबाज सरकार ने कहा- भारत हमें...
पाकिस्तानी-बांग्लादेशी जैसे कमेंट पर भड़कीं AIMIM पार्षद सहर शेख, 'किसी के बाप का...'
पाकिस्तानी-बांग्लादेशी जैसे कमेंट पर भड़कीं AIMIM पार्षद सहर शेख, 'किसी के बाप का...'
Embed widget