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इंसानों के खून से चलने वाला खतरनाक टैंक बना रहा था हिटलर, जानें कैसे रुका ये प्रोजेक्ट

Hitler Dangerous Tank: हिटलर अपने जमाने का सबसे बड़ा तानाशाह था. वो एक ऐसे खतरनाक टैंक का निर्माण कर रहा था, जो कि इंसानों के खून से चलता. चलिए जानें कि इसको किसने और क्यों बंद कराया.

हिटलर को अब तक का सबसे बड़ा तानाशाह माना जाता है. बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि एडोल्फ हिटलर का सपना था कि वो दुनिया का सबसे मशहूर कलाकार बने, लेकिन वो तानाशाह बन गया. द्वितीय विश्व युद्ध में हिटलर की भूमिका की बात की जाए तो उस वक्त हिटलर की भूमिका केंद्रीय और विनाशकारी थी. उन्होंने जर्मनी के तानाशाह के रूप में युद्ध शुरू करने और उसे चलाने में अहम भूमिका निभाई थी. हिटलर की विस्तारवादी विचारधारा, आक्रामक विदेश नीति और यहूदियों के प्रति नफरत ने युद्ध के कारणों में और विनाशी योगदान दिया था. अगर हिटलर नहीं होता तो शायद द्वितीय विश्व युद्ध नहीं होता या फिर कुछ अलग तरीके से हो सकता था. क्या आप जानते हैं कि हिटलर एक ऐसे टैंक का निर्माण कर रहा था, जो कि खून से चलता था. चलिए जानें.

क्या था उस टैंक का नाम

शायद ही आपने ऐसा कभी सुना होगा कि हिटलर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपने इंजीनियर्स के साथ मिलकर एक ऐसा टैंक बना रहा था जो कि जिंदा इंसानों के खून से चलाया जाना था. इस टैंक का नाम था लैंडक्रूजर पी 1000 राटे, जो कि दुनिया का सबसे भारी टैंक था. यह 1000 टन का टैंक था, जो कि भारी भरकम वाहन था, इसके लिए 1942 में क्रुप कंपनी के निदेशक एडवर्ड ग्रोटे ने डिजाइन तैयार की थी. हिटलर को जब यह प्रोजेक्ट अच्छा लगा और उसने इसमें दिलचस्पी दिखाई तो इसे मंजूरी भी दे दी थी. 

क्या थी उस टैंक की खासियत

लैंडक्रूजर पी 1000 राटे की लंबाई 35 मीटर, चौड़ाई 14 मीटर और ऊंचाई 11 मीटर थी. इसमें मुख्य हथियार 280 मिमी. SK C/34 नौसैनिक बंदूकें, 128 मिमी KwK 44 बंदूकें, इसके अलावा दो तोपें 15 मिमी MG 151/15 तोपें, और 20 मिमी Oerlikon तोपें लगी थीं. उसका इंजन 8 डेमलर-बेंज MB 501 डीजल समुद्री इंजन होता और इसमें 20-40 लोग सवार हो सकते थे. 23 जून 1942 को जर्मन आयुध मंत्रालय ने 1000 टन के टैंक के लिए प्रस्ताव दिया था. हिटलर को इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी दिखाई दी और उसने इसमें मंजूरी दे दी. पी 1000 राटे को कभी भी वास्तविक रूप से नहीं बनाया गया था, क्योंकि यह बड़ा और भारी था. इसको द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कभी भी एक वास्तविक टैंक के रूप में लागू नहीं किया गया था. 

खून से टैंक चलाना चाहता था हिटलर

हिटलर चाहता था कि यह टैंक कैदियों और यहूदियों के शरीर से खून निकालकर उसको टैंक के खास हाइड्रोलिक सिस्टम में डालना चाहता था. लेकिन जब यह बात एलाइस स्पाइस को पता चली तो यह प्रोजेक्ट बंद करा दिया गया था. 1943 की शुरुआत में, आयुध मंत्री अल्बर्ट स्पीयर ने इस परियोजना को रद्द कर दिया गया.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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