2000 से ऊपर पर MDR का असर, क्या महंगा हो जाएगा OTT सब्सक्रिप्शन? जान लीजिए पूरा गणित
UPI ऑटो पे और रिकरिंग मैंडेट पर नया एमडीआर ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगेगा. रिकरिंग यूपीआई मैंडेट्स और यूपीआई ऑटो पे को पूरी तरह नए एमडीआर चार्ज से बाहर रखा गया है.

मोदी सरकार ने यूपीआई पेमेंट पर चार्ज वसूलने का ऐलान किया है. जिसके मुताबिक 2000 रुपये से ऊपर 0.4% एमडीआर चार्ज देना होगा. वहीं जो लोग यूपीआई ऑटो पे के जरिए ओटीटी सब्सक्रिप्शन का पेमेंट करते हैं, उनके मन में नए 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (एमडीआर) के ऐलान से एक सवाल जरूर आया होगा कि क्या आपका नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो या किसी दूसरे स्ट्रीमिंग सर्विस का मंथली बिल अचानक महंगा हो जाएगा? चलिए इस रिपोर्ट में पूरा गणित समझते हैं.
क्या स्ट्रीमिंग सेवाओं के लिए बार-बार होने वाले पेमेंट पर MDR लगेगा?
बता दें कि अगर आप ऑटो पेमेंट करते हैं तो आपके लिए राहत की खबर है, आपको कोई चार्ज नहीं देना होगा. चाहें वो 2000 से ज्यादा पे कर रहे हों तब भी ऑटोमेटेड रिकरिंग स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन (जिन्हें UPI मैंडेट या ऑटो पे कहा जाता है) पर तय MDR ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगेगा.
-यानी मंथली यूटिलिटी बिल, OTT स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन और सभी तरह के रिकरिंग इन्वेस्टमेंट के लिए ऑटोमेटेड रिकरिंग ट्रांसफर से किए गए पेमेंट पर ट्रांजैक्शन के लिए कोई तय MDR चार्ज नहीं लगेगा.
-इसका मतलब है कि अगर मौजूदा यूपीआई ऑटो पे मैंडेट से OTT सब्सक्रिप्शन का पेमेंट हो रहा है, तो उस पर नया 0.4% एमडीआर चार्ज नहीं लगेगा, भले ही पेमेंट की रकम 2 हजार रुपये से ज्यादा हो.
-यह फर्क इसलिए जरूरी है क्योंकि यूपीआई का नया प्राइसिंग सिस्टम खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए बनाया गया है, जबकि रेगुलर पेमेंट (रिकरिंग मैंडेट) एक अलग सिस्टम के तहत काम करते हैं.
यूपीआई पेमेंट मे क्या हुआ है बदलाव?
15 अक्टूबर 2026 से, 2 हजार रुपये से ज्यादा के यूपीआई 'पर्सन-टू-मर्चेंट' ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा. वहीं 75 हजार और उससे ज़्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए ज्याजा से ज्यादा 300 रुपये का चार्ज लगेगा. जबकि 'पर्सन-टू-पर्सन' ट्रांसफर MDR के दायरे से बाहर रहेंगे.
सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया है कि ग्राहकों से सीधे यूपीआई ट्रांजैक्शन फीस नहीं ली जाएगी. MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के अंदर लगने वाला एक चार्ज है, न कि कोई ऐसी फीस जो यूजर्स को हर बार क्यूआर कोड स्कैन करने या पेमेंट करने पर देनी पड़े.
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ओटीटी ऑटो पे क्यों अलग है?
ओटीटी ऑटो पे खास तौर पर बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए बनाया गया है. इसमें ग्राहक किसी मर्चेंट को एक तय समय पर तय रकम काटने की मंजूरी देता है, जिसके बाद हर बार यूपीआई पिन डाले बिना ही आगे के पेमेंट अपने-आप हो जाते हैं.
OTT सब्सक्रिप्शन भी इसी बेसिक प्रिंसिपल पर काम करते हैं. एक बार जब कोई व्यूअर मैंडेट को मंजूरी दे देता है, तो स्ट्रीमिंग सर्विस मैंडेट की शर्तों के अनुसार सब्सक्रिप्शन की रकम ले सकती है.
नया MDR फ्रेमवर्क यूपीआई ऑटो पे के जरिए बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए 0.4% चार्ज तय नहीं करता है. मंजूरी प्राप्त यूपीआई मैंडेट के जरिए किए जाने वाले बार-बार के पेमेंट तय एमडीआर स्ट्रक्चर से बाहर रखे गए हैं.
आपके नेटफ्लिक्स या प्राइम सब्सक्रिप्शन के लिए इसका क्या मतलब है
- बता दें कि किसी ओटीटी सब्सक्रिप्शन की कीमत महीने में 2 हजार 500 है और पेमेंट यूपीआई ऑटो पे के जरिए लिया जा रहा है. ऐसे में नए 0.4% एमडीआर का मतलब यह नहीं है कि उस बार-बार होने वाले डेबिट में अपने-आप 10 रुपये और जुड़ जाएंगे.
- यही प्रिंसिपल UPI मैंडेट के जरिए तय किए गए दूसरे बार-बार होने वाले पेमेंट पर भी लागू होता है.
- फर्क एक रेग्यूलर एलिजिबल मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन और मंजूरी प्राप्त मैंडेट के तहत किए जाने वाले बार-बार के डेबिट के बीच है.
क्या फिर OTT की कीमतें नहीं बढ़ सकतीं?
ऐसा जरूरी नहीं है क्योंकि एमडीआर में बदलाव से कस्टमर पर ओटीटी ऑटो-पे डेबिट के लिए कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगता है. हालांकि, सब्सक्रिप्शन की कीमतें आखिर में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ही तय करते हैं, और कंपनियां अपने प्लान, टैक्स या अन्य लागू चार्ज में इंडिपेंडेंटली बदलाव कर सकती हैं.
इसलिए, अगर फ्यूचर में आपके ओटीटी बिल में कोई बदलाव होता है, तो इसे अपने आप यह नहीं माना जाना चाहिए कि नया यूपीआई MDR आप पर डाला जा रहा है.
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