एक्सप्लोरर
बर्थडे स्पेशल: सनी देओल के जन्मदिन के मौके पर पढ़िए उनके ये सुपरहिट डायलॉग
Happy Birthday Sunny Deol: फिल्मों में सनी द्वारा इस्तेमाल किए गए भारी-भरकम डायलॉग लोगों के दिलो दिमाग में आज भी रजिस्टर हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपके लिए सनी के ऐसे ही कुछ सुपरहिट डायलॉग लेकर आए हैं.

नई दिल्ली: 19 अक्टूबर, 2018 को सनी देओल अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं. सनी देओल ने अपने करियर में कई शानदार और सुपरहिट फिल्में दी हैं. इन फिल्मों में सनी द्वारा इस्तेमाल किए गए भारी-भरकम डायलॉग लोगों के दिलो दिमाग में आज भी रजिस्टर हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपके लिए सनी के ऐसे ही कुछ सुपरहिट डायलॉग लेकर आए हैं.
28 साल पहले आई फिल्म 'दामिनी' में सनी देओल का शानदार डायलॉग भला कौन भूल सकता है. ये डायलॉग है तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख...तारीख पर तारीख...तारीख ही मिलती रही है लेकिन इंसाफ नहीं मिला. माई लॉर्ड इंसाफ नहीं मिला...मिली है तो सिर्फ यह तारीख. इसी फिल्म का एक और डायलॉग है जो काफी मशहूर है, फिल्म में सनी देओल ये डायलॉग अमरीश पुरी से कहते हैं. चिल्लाओ मत. नहीं तो ये केस यहीं रफा दफा कर दूंगा. न तारीख, न सुनवाई, सीधा इंसाफ. वो भी ताबड़तोड़.

इसी फिल्म 'दामिनी' का एक और जानदार डायलॉग जिसमें सनी ने कहा था जब ये ढाई किलो का हाथ किसी पे पड़ता है, तो आदमी उठता नहीं...उठ जाता है.

साल 1996 में बनी फिल्म 'घातक' में सनी देओल ने विलेन डैनी डेन्जोंगपा (कातिया) को कहा, मर्द बनने का इतना ही शौक है, तो कुत्तों का सहारा लेना छोड़ दे कातिया.

ड्रामा से भरपूर साल 1997 में आई फिल्म 'जिद्दी' में एक्टर ने कहा, पत्थरों की दुनिया में देवता बनना तो बहुत आसान है, इंसान बनना बहुत मुश्किल.
वहीं, 1996 में आई फिल्म 'जीत' में सनी ने बेहद गंभीर डायलॉग के जरिए कहा, "इन हाथों ने हथियार छोड़े हैं, चलाना नहीं भूले".

सनी देओल के लीड रोल में बनी फिल्म 'कहर' जो साल 1997 में ही रिलीज हुई थी. इसमें भी सनी ने एक अलग ही तेवर में नजर आए और कहा, "गुंडे और गुंदागर्दी यहीं से जन्म लेते हैं, जिसे आप पुलिस स्टेशन कहते हैं."
साल 1997 में आई बेहतरीन फिल्म 'बॉर्डर' में सनी देओल पुलिस कप्तान की भूमिका में दिखते हैं और इस बीच गुस्से में कहते हैं कि- मथुरादास जी, आप खुश हैं कि आप घर जा रहे हैं. खुशी का यह बेहुदा नाच जो आप अपने भाइयों के सामने कर रहे हैं. अच्छा नहीं लगता. आपकी छुट्टी मंजूर हुई है क्योंकि आपके घर में प्रॉब्लम है. दुनिया में किसे प्रॉब्लम नहीं है. जिंदगी का दूसरा नाम प्रॉब्लम है.

1980 में आई फिल्म 'घायल' में सनी देओल के जरिए पुलिस को कहा गया ये बढ़िया आरोप- पुलिस स्टेशन अंधेर नगरी है ये. पुलिस से कहते हैं कि कमज़ोर लोगों को दिखाओ अपनी मर्दानगी.. वर्दी का रौब, इन्हीं के हाथों को बांध सकती हैं तुम्हारी हथकड़ियां, बलवंत राय के नहीं. जाकर दुम हिलाना उनके सामने, तलवे चाटना..

1996 में आई फिल्म 'घातक' में सनी देओल दुश्मन को ललकारते हुए कहा, रुक अभी रुक अगर सातों भाई एक पिता के बेटे हैं तो रुक.. नहीं तो कसम गंगा मैया की घर में घुस कर मारूंगा, सातों को साथ मारूंगा और एक साथ मारूंगा.
साल 2001 में आई फिल्म 'गदर: एक प्रेम कथा' में सनी ने बेहतरीन डायलॉग के जरिए उस समय ज्यादा से ज्यादा विलेन रोल प्ले करने वाले एक्टर अमरीश पुरी से कहा था कि, अशरफ अली! आपका पाकिस्तान ज़िंदाबाद है, इससे हमें कोई ऐतराज़ नहीं लेकिन हमारा हिंदुस्तान ज़िंदाबाद है, ज़िंदाबाद था और ज़िंदाबाद रहेगा! बस बहुत हो गया."

और पढ़ें























