एक्सप्लोरर

लोकसभा चुनाव 2019: क्या कहता है फूलपुर लोकसभा सीट का इतिहास, कैसे हैं मौजूदा हालात और चुनौतियां?

बता दें कि फूलपुर सीट पर इस बार 19 लाख 75 हजार मतदाता हैं. इनमें 10 लाख 83 हजार पुरुष वोटर तो 08 लाख 91 हजार महिला वोटर हैं. इसके अलावा 184 वोटर थर्ड जेंडर के हैं. साल 2014 के मुकाबले इस बार यहां तकरीबन बासठ हजार वोटर बढ़े हैं.

प्रयागराज: यूपी की फूलपुर लोकसभा सीट को देश का पहला प्रधानमंत्री देने का रूतबा हासिल है. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू यहां से तीन बार साल 1952 - 1957 और 1962 में सांसद चुने गए थे. पंडित नेहरू के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह भी 1971 में यहां से सांसद रहे हैं. पंडित नेहरू की विरासत वाली इस सीट पर कई दिग्गज हस्तियों को जीत मिली है तो साथ ही डाक्टर राम मनोहर लोहिया, बीएसपी संस्थापक कांशीराम और पूर्व केंद्रीय मंत्री जनेश्वर मिश्र जैसे बड़े नेताओं को हार का सामना भी करना पड़ा है. बीजेपी को इस सीट पर सिर्फ एक बार 2014 की मोदी लहर में ही जीत मिली है. ऐसे में फूलपुर में फिर से फूल खिलाना बीजेपी के लिए कतई आसान नहीं होगा. इस चुनाव में यहां कोई स्थानीय मुद्दा नहीं है. बीजेपी जहां पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है तो वहीं सपा-बसपा गठबंधन जातीय समीकरण के सहारे मैदान मारने की फिराक में है. कांग्रेस के नजरिये से देखें तो उसका पैंतीस साल पुराना सूखा इस चुनाव में भी ख़त्म होने के आसार नहीं है.

देवबंद: मायावती-अखिलेश की सभा में लगे भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर जिंदाबाद के नारे

फूलपुर में वोटरों की संख्या और मिजाज़: फूलपुर सीट पर इस बार 19 लाख 75 हजार मतदाता हैं. इनमें 10 लाख 83 हजार पुरुष वोटर तो 08 लाख 91 हजार महिला वोटर हैं. इसके अलावा 184 वोटर थर्ड जेंडर के हैं. साल 2014 के मुकाबले इस बार यहां तकरीबन बासठ हजार वोटर बढ़े हैं. यहां आम तौर पर स्थानीय मुद्दों पर चुनाव नहीं होता. राष्ट्रीय राजनीति में छाए हुए मुद्दे ही यहां के वोटरों को ज़्यादा पसंद आते हैं. यहां सिर्फ बड़े नाम के सहारे ही चुनाव नहीं जीता जा सकता, क्योंकि डा. राम मनोहर लोहिया, बीएसपी संस्थापक कांशीराम, पूर्व केंद्रीय मंत्री जनेश्वर मिश्र और अपना दल संस्थापक डा. सोनेलाल पटेल और क्रिकेटर मोहम्मद कैफ जैसे दिग्गज यहां हार भी चुके हैं.

2019 के चुनाव के उम्मीदवार: इस बार के लोकसभा चुनावों के लिए फूलपुर में छठें चरण में बारह मई को वोट डाले जाएंगे. फूलपुर सीट पर बीजेपी और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार का एलान कर दिया है, जबकि सीट पर कब्ज़ा होने के बावजूद सपा-बसपा गठबंधन अभी तक अपना प्रत्याशी तय नहीं कर सकी है. कांग्रेस पार्टी ने नये-नवेले राजनीति में आए कुर्मी समाज के पंकज निरंजन को टिकट दिया है तो बीजेपी ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सीट रही फूलपुर में जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष रही केशरी देवी पटेल पर दांव लगाया है. केशरी गठबंधन में यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में आई है. बीजेपी की केशरी देवी पटेल साल 2004 में इसी फूलपुर सीट से बीएसपी के टिकट लड़ चुकी हैं, लेकिन उन्हें सपा के बाहुबली अतीक अहमद के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. 2014 में वह बीएसपी के टिकट पर ही इलाहाबाद सीट पर लड़ीं, लेकिन इस चुनाव में वह तीसरे नंबर पर थीं. पिछले साल हुए उप-चुनाव में समाजवादी पार्टी के नागेंद्र सिंह पटेल ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, लेकिन पार्टी इस बार उन पर दांव खेलने के मूड में नहीं है. समाजवादी पार्टी से मैनपुरी के मौजूदा सांसद और लालू यादव के दामाद तेज प्रताप यादव को टिकट मिलने की चर्चा है.

राहुल-प्रियंका पर RSS प्रचारक इंद्रेश की आपत्तिजनक टिप्पणी, बोले- 'दोनों राजनीति के बेस्ट मेंटल केस'

विधानसभा सीटें: फूलपुर संसदीय क्षेत्र में प्रयागराज जिले की पांच विधानसभा सीटें (सिटी नार्थ, सिटी वेस्ट, फूलपुर, फाफामऊ और सोरांव) आती हैं. इनमें से चार सीटों फूलपुर, फाफामऊ, सिटी नार्थ और सिटी वेस्ट पर सीधे तौर पर बीजेपी का कब्ज़ा है, जबकि सोरांव सीट उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल एस के पास है. फूलपुर शहरी और ग्रामीण इलाके की मिली- जुली सीट है.

पूर्व के चुनाव परिणाम: साल 1952 में हुए पहले आम चुनाव चुनाव में कांग्रेस पार्टी के पंडित जवाहर लाल नेहरू फूलपुर से सांसद निर्वाचित होकर देश के पहले पीएम बने थे. पंडित नेहरू 1957 और 1962 में भी यहां से सांसद चुने गए थे. पंडित नेहरू के निधन के बाद हुए उपचुनाव और 1967 के आम चुनाव में पंडित नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुनी गईं. 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह कांग्रेस से सांसद बने तो इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए चुनाव में जनता पार्टी की कमला बहुगुणा को जीत हासिल हुई. 1980 में जनता पार्टी सेक्युलर से बीड़ी सिंह सांसद बने तो इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में कांग्रेस से राम पूजन पटेल चुनाव जीते. राम पूजन पटेल 1989 और 1991 में भी जनता दल से सांसद बनकर हैट्रिक बनाई तो 1996 और 1998 में समाजवादी पार्टी के जंग बहादुर पटेल चुनाव जीते थे. 1999 में सपा के धर्मराज पटेल और 2004 में सपा के ही बाहुबली अतीक अहमद यहां से सांसद चुने गए. 2009 में बीएसपी ने फूलपुर में अपना खाता खोला और उसके उम्मीदवार कपिलमुनि करवरिया ने जीत दर्ज की. साल 2014 में केशव मौर्य ने फूलपुर में पहली बार कमल खिलाया तो 2018 के उपचुनाव में सपा ने फिर से यहां बाजी मार ली.

2014 का लोकसभा और 2018 का उपचुनाव: 2014 में हुए पिछले आम चुनाव में फूलपुर में पहली बार कमल खिला था. पिछले आम चुनाव में यहां से यूपी के मौजूदा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य सांसद चुने गए थे. उन्होंने बीएसपी के तत्कालीन सांसद कपिलमुनि करवरिया, सपा के धर्मराज पटेल और कांग्रेस के क्रिकेटर मोहम्मद कैफ़ को हराकर तीन लाख से ज़्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी. हालांकि केशव मौर्य के डिप्टी सीएम बनने के बाद उनके इस्तीफे से खाली हुई सीट पर बीजेपी को फिर से हार का सामना करना पड़ा. पिछले साल मार्च महीने में हुए उपचुनाव में सपा उम्मीदवार नागेंद्र सिंह पटेल ने बीएसपी की मदद से वाराणसी के पूर्व मेयर कौशलेन्द्र पटेल को साठ हजार वोटों से हराया था.

यूपी: मायावती के बयान पर चुनाव आयोग ने जिला प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

महत्व- मुद्दे व समस्याएं : गंगा नदी के दोनों किनारों पर स्थित फूलपुर सीट सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि देश की चुनिंदा विकसित सीटों में एक है. बिजली-पानी, सिंचाई, सड़क-शिक्षा और स्वास्थ्य के यहां काफी बेहतर इंतजाम हैं. यहां पूरब का आक्सफोर्ड कही जाने वाली इलाहाबाद सेंट्रल युनिवर्सिटी के साथ ही कई दूसरी युनिवर्सिटी व नामचीन एजूकेशनल इंस्टीट्यूट्स हैं. यहां के मेडिकल कालेज से कई बड़े अस्पताल संचालित होते हैं. नार्थ सेन्ट्रल रेलवे जोन का हेडक्वार्टर इसी सीट में पड़ता है तो केंद्र व यूपी सरकार के कई महत्वपूर्ण दफ्तर भी यहीं हैं. नेहरू- गांधी परिवार का पैतृक आवास आनंद भवन भी फूलपुर में ही आता है. बुनियादी विकास तो यहाँ खूब हुए लेकिन रोजगार के अवसर मुहैया न होना, उद्योग धंधों का न होना, संगम समेत कई महत्वपूर्ण स्थल होने के बावजूद प्रयागराज शहर को पर्यटक स्थल के तौर पर विकसित नहीं किया जाना यहां की प्रमुख समस्या है. रोज़गार की बड़ी समस्या की वजह से यहां की प्रतिभाएं बड़े शहरों की तरफ पलायन कर जाती हैं. पिछले महीने ख़त्म हुए कुंभ मेले के मद्देनजर फूलपुर समेत समूचे प्रयागराज जिले में विकास के काफी काम हुए. खासकर शहरी इलाके की सूरत बदल गई है. फूलपुर सीट शिक्षित वोटरों की सीट मानी जाती है, लेकिन इसके बावजूद यहां चुनावों में काफी कम मतदान होता है. शहरी इलाके में तो एक तिहाई के करीब ही वोट पड़ते हैं. सरकारी कर्मचारियों-वकीलों और साहित्य व शिक्षा से जुड़े हुए लोगों की सीट पर कम वोटिंग को लेकर चुनाव आयोग भी कई बार चिंता जता चुका है.

फूलपुर के समीकरण: फूलपुर में कुर्मी यानी पटेल वोटर निर्णायक भूमिका में हैं. इसके अलावा यादव - दलित व मुस्लिम भी किसी का गणिंत बनाने व बिगाड़ने की हालत में हैं. फूलपुर में आम तौर पर राष्ट्रीय मुद्दों के जातीय आधार पर वोट पड़ते हैं. ऐसे में यहां गैर यादव ओबीसी ही जीत हार का सबसे बड़ा आधार बनेंगे.

सियासी दलों की स्थिति व चुनौती: यहां एक तबका मोदी को फिर से पीएम के तौर पर देखते हुए बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने में लगा हुआ है तो जातीय समीकरण के आधार पर गठबंधन को कतई कम नहीं आंका जा सकता. कांग्रेस खुद तो जीतने की स्थिति में नहीं नजर आ रही है, लेकिन उसको मिलने वाले वोट सीधी लड़ाई में किसी एक का गणित बिगाड़ सकते हैं. सभी पार्टियों को यहां भितरघात की समस्या से जूझना पड़ सकता है. बीजेपी को जहां यूपी की सत्ता पर काबिज होने का फायदा मिल सकता है तो वहीं सपा बसपा गठबंधन को संगठन की मजबूती व युवा कार्यकर्ताओं के जोश का लाभ मिल सकता है. महिला उम्मीदवार देकर बीजेपी ने आधी आबादी को खुश करने की कोशिश की है तो गठबंधन के पक्ष में दलित-यादव व मुस्लिम का मजबूत जातीय समीकरण है.

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

राज्यसभा के लिए BJP ने 11 नामों की घोषणा की, जानें किन दो पुराने चेहरों को दोबारा नहीं मिला टिकट?
राज्यसभा के लिए BJP ने 11 नामों की घोषणा की, जानें किन दो पुराने चेहरों को दोबारा नहीं मिला टिकट?
Uttrakhand Election 2027: बीजेपी के पहले इलेक्शन मोड में कांग्रेस, फोन से अल्मोड़ा रैली को संबोधित कर राहुल गांधी ने फूंका 2027 चुनाव का बिगुल
बीजेपी के पहले इलेक्शन मोड में कांग्रेस, फोन से अल्मोड़ा रैली को संबोधित कर राहुल गांधी ने फूंका 2027 चुनाव का बिगुल
'महाराष्ट्र जैसी टूट की ओर बढ़ रही है ममता बनर्जी की पार्टी TMC', पश्चिम बंगाल के मंत्री ने दावा करते हुए क्या कहा
'महाराष्ट्र जैसी टूट की ओर बढ़ रही है ममता बनर्जी की पार्टी TMC', पश्चिम बंगाल के मंत्री ने दावा करते हुए क्या कहा
'जनता गुस्से में थी इसलिए...', अग्निमित्रा पॉल ने अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर हुए हमले क लेकर क्या कह दिया
'जनता गुस्से में थी इसलिए...', अग्निमित्रा पॉल ने अभिषेक और कल्याण बनर्जी पर हुए हमले क लेकर क्या कह दिया

वीडियोज

Cannes में भारत का प्रतिनिधित्व कर भावुक हुईं Nidhi Kumar Malhotra, बताया खास अनुभव
'Peddi' में Ram Charan का शानदार प्रदर्शन, क्लाइमैक्स ने छोड़ी गहरी छाप
Madhuri Dixit के नए अवतार ने जीता दिल, 'Maa Behen' बनी मजेदार एंटरटेनर
Breaking | Malviya Nagar Fire Update: होटल जला तो पता चला, सब मिले हैं जी! | Delhi News | Fire
Malviya Nagar Fire | Janhit: 'करप्शन' की 'आग' में पूरा परिवार खत्म! | Delhi News | Chitra Tripathi

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
राज्यसभा में NDA की नजर दो-तिहाई बहुमत पर, 24 सीटों से कितना बदलेगा समीकरण, किसकी बढ़ेगी ताकत?
राज्यसभा में NDA की नजर दो-तिहाई बहुमत पर, 24 सीटों से कितना बदलेगा समीकरण, किसकी बढ़ेगी ताकत?
मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में क्या एक्शन लेंगे निशांत कुमार? चुप्पी के बाद आया स्वास्थ्य मंत्री का पहला बयान
मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में क्या एक्शन लेंगे निशांत कुमार? चुप्पी के बाद आया स्वास्थ्य मंत्री का पहला बयान
24 साल पहले हड़पी संपत्ति, 42 दिनों में होनी थी जांच, अब तक नहीं... इतनी लापरवाही देख भड़का SC, जो कहा जरूर पढ़ें
24 साल पहले हड़पी संपत्ति, 42 दिनों में होनी थी जांच, अब तक नहीं... इतनी लापरवाही देख भड़का SC, जो कहा जरूर पढ़ें
पाकिस्तानी दिग्गज का बेतुका बयान, कहा- IPL में विराट से ज्यादा रन बना देंगे बाबर आजम
पाकिस्तानी दिग्गज का बेतुका बयान, कहा- IPL में विराट से ज्यादा रन बना देंगे बाबर आजम
Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai Review: डेविड धवन स्टाइल टाइमपास एंटरटेनर, बिना दिमाग लगाए  देखेंगे तो करेंगे एंजॉय
है जवानी तो इश्क होना है रिव्यू: डेविड धवन स्टाइल टाइमपास एंटरटेनर, बिना दिमाग लगाए  देखेंगे तो करेंगे एंजॉय
Russian President Putin: रूस ने यूक्रेन को खुशखबरी, इस बात के लिए राजी पुतिन, NATO पर क्यों खींची रेड लाइन?
रूस ने यूक्रेन को खुशखबरी, इस बात के लिए राजी पुतिन, NATO पर क्यों खींची रेड लाइन?
Khan sir life story: कभी कमाते थे 40 रुपये आज करोड़ों के हैं मालिक, जानिए कैसे फैजल खान बन गए खान सर
कभी कमाते थे 40 रुपये आज करोड़ों के हैं मालिक, जानिए कैसे फैजल खान बन गए खान सर
Sonakshi Sinha House: लग्जरी और क्रिएटिविटी का कॉम्बो है सोनाक्षी सिन्हा का बांद्रा वाला पेंटहाउस, देखें शानदार फोटोज
लग्जरी और क्रिएटिविटी का कॉम्बो है सोनाक्षी सिन्हा का बांद्रा वाला पेंटहाउस, देखें शानदार फोटोज
Embed widget