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लोकसभा चुनाव: कुशीनगर सीट का इतिहास, राजीनीतिक आकलन और चुनावी मुद्दे

बता दें कि पिछले चुनाव में मोदी की लहर में यह सीट बीजेपी के खाते में गई थी लेकिन इस बार सपा और बसपा के गठजोड़ के कारण लड़ाई त्रिकोणीय होने की संभावना है.

कुशीनगर: कुशीनगर की सीट यूपी में वीआईपी सीट इसलिए मानी जाती है क्योंकि इस सीट पर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राहुल गांधी की टीम के महत्वपूर्ण सदस्य आरपीएन सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. आरपीएन सिंह केन्द्र की कांग्रेस सरकार में कई केन्द्रिय गृह राज्यमंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद संभाल चुके हैं. इसलिए इस सीट पर सभी राजनीतिक दलों की निगाह है. पिछले चुनाव में मोदी की लहर में यह सीट बीजेपी के खाते में गई थी लेकिन इस बार सपा और बसपा के गठजोड़ के कारण लड़ाई त्रिकोणीय होने की संभावना है. पिछले विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा में आने वाली पांच विधानसभाओं में से चार पर बीजेपी ने कब्जा जमाया और एक पर उसकी सहयोगी सुभासपा का कब्जा हो गया. इस लोकसभा सीट के पडरौना विधानसभा से स्वामी प्रसाद मौर्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और इस जिले में वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुसहरों की समस्याओं को लेकर काफी सक्रिय रहे है इसलिए इस सीट की गणना प्रदेश वीआईपी सीटों में होती है.

इस बार ये हैं मैदान में बीजेपी ने लोकसभा के लिए पूर्व विधायक विजय दूबे को प्रत्याशी बनाया है. विजय दूबे का राजीनीतिक इतिहास कोई बहुत बड़ा नहीं रहा है लेकिन वह योगी आदित्यनाथ जी के करीबी माने जाते हैं. कांग्रेस पार्टी ने पांचवी बार आरपीएन सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है. आरपीएन सिंह यूपीए -2 की सरकार में सड़क ट्रांसपोर्ट एवं कारपोरेट मंत्रालय में राज्यमंत्री और पेट्रोलियम व गृह राज्यमंत्री रहे थे. आपको बता दें कि 2009 में सांसद चुने जाने के पहले आरपीएन सिंह कुशीनगर जनपद की पडरौना विधानसभा सीट से 1996, 2002 और 2007 में तीन बार कांग्रेस पार्टी से विधायक रह चुके हैं. गठबंधन में सपा के खाते में रही इस शीट से नथुनी कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया गया है. आपको बता दें कि नथुनी कुशवाहा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं. नथुनी कुशवाहा आरएसएस के स्वयंसेवक भी रहे हैं. 1994 में जब देवरिया जिले से कुशीनगर जनपद का नवसृजन हुआ उस समय नथुनी कुशवाहा सपा के जिलाध्यक्ष बने थे.

वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पूरे विश्व को शांति और करूणा का संदेश देने वाले भगवान बुद्द ने कुशीनगर में अपने भौतिक शरीर का परित्याग किया था. बौद्ध धर्म के प्रवर्तक भगवान महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण प्राप्त करने के कारण विश्व के एक दर्जन से अधिक देशों के बौद्ध धर्मावलंबी और पर्यटक हर साल कुशीनगर आते हैं. देशी और विदेशी मोहमानों के बड़ी संख्या में कुशीनगर आने के कारण इस स्थान अन्तर्राष्ट्रीय महत्व है.

बौद्ध धर्म को मानने वाले अधिकांश देशों के मंदिर कुशीनगर में बने हुए हैं इसलिए इसे विदेशी मंदिरों का शहर भी कहा जाता है. अन्तर्राष्ट्रीय महत्व रखने वाली कुशीनगर लोकसभा का अधिकांश प्रतिनिधित्व बीजेपी ने ही किया है लेकिन इस सीट पर कांग्रेस का भी दबदबा रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के कारण इस पर बीजेपी के राजेश पाण़्डेय विजयी हुए लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनकी लोकप्रियता कम होती गई. हालांकि केन्द्र सरकार की जनकल्याणकारी नीतियां, पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक ऐसे तमाम मुद्दे हैं जिनको लेकर बीजेपी की स्थिति मजबूत है लेकिन वर्तमान सांसद राजेश पाण्डेय के खिलाफ लोगों में गुस्सा साफ नजर आता है.

लोगों का मानना है कि सांसद राजेश पाण्डेय ने विकास कार्य पर जोर नहीं दिया जिससे जिले का समुचित विकास नहीं हुआ. लोगों का कहना है कि सांसद राजेश पाण्डेय क्षेत्र में कम सक्रिय रहे. इस चुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन और कांग्रेस से आरपीएन सिंह जैसा मजबूत प्रत्याशी उतरने से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं.

चुनावी मुद्दे 1- कुशीनगर गन्ना बहुल इलाका है. यहां के किसान गन्ने के अलावा केला, हल्दी, मूंगफली का उत्पादन करते हैं. पहले इस जिले में 10 चीनी मिलें चलती थी लेकिन सरकारों की लापरवाही के कारण 5 चीनी मिलें बंद हो गयीं इस समय पांच चीनी मिले चल रही हैं. चीनी मिलों के बंद होने से गन्ना किसान बेहल हो गया. बंद पड़ी चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करोड़ों रूपया आज भी बकाया है जिसे पाने के लिए गन्ना किसान भटक रहे हैं.आज भी गन्ना किसान पर्ची के लिए भटकता है जिसका फायदा बिचौलिए उठाते हैं. समय से पर्ची ना मिलने के कारण किसान औने-पौने दाम में अपना गन्ना बेचने को मजबूर हो जाते हैं. हल्दी और केला उपजाने के बाद मण्डी ना होने के कारण किसान विचौलिओं के हाथ अपनी उपज बेचने को मजबूर है.

2 - अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल होने के कारण हर साल हजारों की संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक कुशीनगर घूमने के आते हैं. इतना सब होने के बाद भी कुशीनगर ना तो हवाई मार्ग से और ना ही रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है. कई बार सरकार ने कुशीनगर में अन्तर्राष्ट्रीय एअरपोर्ट शुरू करने की पहल की लेकिन चुनाव तक तो तेजी से काम हुआ लोकिन चुनाव बीतते ही काम ठप हो गया इस बार भी चुनाव के पहले एअरपोर्ट चलने की संभावना थी लेकिन अभी तक एअरपोर्ट शुरू नहीं हो सका हालांकि अब केवल एटीसी बिल़्डिंग का काम ही अधूरा है जिसके बनने के बाद उड़ान शुरू होने की संभावना है.

कुशीनगर को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए भी लगभग सभी पार्टियों की सरकारों ने घोषणाएं की लेकिन अभी तक इस कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है. इस जिले का आंशिक हिस्सा ही रेल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है. बड़े शहरों से हवाई और रेल मार्ग से कनेक्टिविटी इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा है. कुशीनगर में पर्यटन बढ़ाने के लिए मैत्रेय परियोजना शुरू की गई पिछली प्रदेश सरकार ने किसानों को मुआवजा देने के बाद उनकी जमीनों का अधिग्रहण भी कर लिया. जमीन लेने के बाद शिलान्यास भी किया गया लेकिन आज तक यह योजना घरातल पर नहीं उतर पाई है.

3 - हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलना इस जनपद के लोगों की मजबूरी बन गई है. जिले के दो तहसील खड्डा और तमकुहीराज को अधिकांश क्षेत्र में नेपाल से निकलने वाली नारायणी नदी (गण्डक नदी) हर साल भीषण तबाही मचाती है. तमकुहीराज और खड्डा क्षेत्र में बने बंधों पर हर साल कटान होती है जिसे रोकने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जाता है लेकिन इसे रोकने के लिए कोई स्थाई उपाय नहीं किया जाता है जिससे हर साल सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट होती है.

4 - जनपद में पीने के शुद्ध पानी की बड़ी समस्या है अशुद्ध पानी पीने के कारण हर साल सैकड़ों लोग कई तरह की जलजनित बीमारियों की चपेट में आते हैं.

5 - इस जनपद की एक बड़ी आबादी को अभी भी कच्चे और घास-फूस के मकानों में अपना जीवन बिताना पड़ता है,गर्मी के दिनों हर साल आग लगने की घटनाएं होती हैं जिससे कई परिवार तबाह होते हैं करोड़ों का नुकसान होता है.

6 - सड़कों के मामले में कुशीनगर समृद्धिशाली माना जा सकता है जनपद की अधिकांश सड़के राष्ट्रीय या राजकीय राजमार्ग की श्रेणी में है जिससे सड़कें ठीक हैं बावजूद इसके कई सड़कें अभी भी बदहाल हैं जो लोगों की लिए समस्या का सबब बनी हुई हैं.

7 - इन समस्याओं के अलावा इस जनपद में शिक्षा और स्वास्थ्य में अभी भी काफी सुधार की आवश्यकता है. अभी भी इस जिले में कोई इंजीनियरिंग कॉलेज या फिर अच्छा उच्च शिक्षा संस्थान नहीं है जिसके कारण यहां के प्रतिभावान बच्चे दूसरे शहरों में जाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. इस जिले के प्रथमिक विद्यालय में लक्ष्य के सापेक्ष काफी कम नामांकन हो पाता है.

8 - इसके अलावा सड़क. बिजली, पानी, तमाम ऐसे स्थानीय मुद्दे थे जो पिछले चुनाव में उठे थे लेकिन इस चुनाव में ये मुद्दे पीछे छूटने वाले हैं. पिछले चुनाव में मोदी का मैजिक खूब चला लेकिन इस बार के चुनाव में वह मैजिक चलने वाला नहीं है बावजूद इसके लोगों में अभी भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्रेज है जो पाकिस्तान में एअर स्ट्राईक के बाद और बढ़ गया है.

9 - कुशीनगर में कानून व्यवस्था हमेशा से कटघरे में रही है. कभी जंगल दस्यु के संगीनों की आवाजों से थर्राने वाले इस जिले से जंगल दस्यु का तो सफाया हो गया लेकिन इस जनपद में आज भी संगठित अपराध होते रहते हैं. जमीनी विवाद में हत्या होना तो जैसे आम बात हो गई है जो प्रशासनिक और पुलिसिया असफलता का नतीजा होता है.

10 - बिहार में हुई शराब बंदी के बाद बिहार सीमा से सटे इलाकों में अवैध देशी शराब बनाने का दौर शुरू हो गया है. पुलिसिया संरक्षण में बड़ी संख्या में अवैध शराब बनाने और बेचने का काम धड़ल्ले से चल रहा है इसी का नतीजा रहा कि पिछले दिनों जहरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत हो गई थी जिसके बाद अवैध शराब बनने से रोकने की पुलिस और प्रसाशन की ओर से कवायद तो हुई लेकिन अब धीरे-धीरे से यह अवैध धंधा फिर से शुरू हो रहा है. जिले की यह बहुत बड़ी समस्या है.

11 - जिले में बड़ी संख्या में मुसहर जाति के लोग रहते हैं. मुसहरों की बदहाली का मुद्दा वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सांसद रहते हुए लोकसभा में उठाया था और मुसहरों के उत्थान के लिए आंदोलन भी किया था. योगी आदित्यानाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे अधिक खुशी मुसहर समुदाय के लोगों को हुआ था.योगी आदित्यानाथ की प्राथमिकता होने के कारण शुरूआत में प्रशासनिक अमले ने मुसहरों के तमाम योजनाएं चलाई लेकिन धीरे-धीरे प्रशासनिक अमला भी उदासीन होता गया. तमाम कसरतों के बाद भी मुसहरों की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ है.

महागंठबन्धन का क्या होगा असर

जब दो महत्वपूर्ण दल एक होकर चुनाव मैदान में उतरते हैं निश्चित तौर पर वह मजबूत माना जाता है. कुशीनगर जिले मे इस बार सपा और बसपा मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ रही है. यह सीट सपा के खाते में गई है जिससे इस सीट की ल़ड़ाई दिलचस्प हो गई है .कांग्रेस के दिग्गज नेता आरपीएन सिंह के मैदान में उतरने और सपा-बसपा गठबंधन के आने से लड़ाई पूरी तरह त्रिकोणीय हो गई है. सपा-बसपा के अनुसूचित जाति और यादव वोट महागठबन्धन के प्रत्याशी को मिलेगा और अन्य दल के प्रत्याशी इसे तोङने मे जुटे रहेंगे.लेकिन पुलवामा हमले के बाद जिस तरह से राष्ट्रीय का मुद्दा उठा है उससे बीजेपी मजबूत हुई है. सर्जिकल स्ट्राईक करके पाकिस्तान से बदला लिया जिसके बाद चारो तरफ बीजेपी की जय-जय कार राजनैतिक दल दबी जुबान से करने लगे. जब जनता पोलिंग स्टेशन पर पहुचेगी तो इस बात को जरुर याद करेगी. क्योंकि वोट जनता को ही देना है. बावजूद इसके कुछ मत जाति के आधार पर जरुर पड़ेंगे. जिससे साफ जाहिर होता है कि महागठबन्धन पर कुछ असर जरुर पड़ेगा.

2014 लोकसभा चुनाव के मुद्दे

2014 के लोकसभा चुनाव में पडरौना की बंद चीनी मिल सबसे बड़ा मुद्दा था. खुद प्रधानमंत्री ने अपनी चुनावी जनसभा में पडरौना चीनी मिल बंद होने पर कांग्रेस सरकार के कटघरे में खड़ा किया था. उन्होंने सरकार बनने पर पडरौना चीनी मिल को चलवाने का वायदा भी किया था लेकिन बीजेपी की सरकार और मोदी के प्रधाननमंत्री बनने के बाद भी पडरौना शुगर मिल नहीं चल सकी. इसके अलावा कुशीनगर इंटरनेशनल एअरपोर्ट को शुरू करने का वायदा भी बीजेपी प्रत्याशी ने किया था लेकिन एअरपोर्ट से उड़ान अभी भी शुरू नहीं हो सका. इसके अलावा सड़क बिजली पानी और रोजगार जैसे गंभीर मुद्दे थे जिसे जनता के सामने उठाकर बीजेपी इस सीट पर विजय प्राप्त की लेकिन इन समस्याओं से जनता को अभी भी राहत नहीं मिली है. आज भी युव रोजगार के भटकने के लिए मजबूर है.

कुशीनगर का राजीनीतिक आकलन कुल जनसंख्या - 3560830 लाख शहरी जनसख्या - 4.87 प्रतिशत साक्षरता - 67.66 प्रतिशत लिंगानुपात - 1000- 955 ग्राम - 1620 क्षेत्रफल - 2873.5 किमी

31 जनवरी 2019 को जिला प्रशासन द्वारा प्रकाशित किये गये अंतिम मतदाता सूची के अनुसार जिले में कुल मतदाता - 1736750 पुरूष मतदाता - 945308 महिला मतदाता - 791305

जातिगत आंकड़ा -- अनुसूचित - 15 प्रतिशत मुस्लिम - 14 प्रतिशत कुशवाहा (कुर्मी)- 13 प्रतिशत ब्राम्हण - 11 प्रतिशत सैंथवार - 12 प्रतिशत वैश्य - 10 प्रतिशत यादव - 8 प्रतिशत भूमिहार - 4 प्रतिशत अन्य - 13 प्रतिशत

जिले के पांच विधानसभाओं को मिलाकर कुशीनगर लोकसभा क्षेत्र बना है  1 - पडरौना विधानसभा 2 - कसया विधानसभा 3 - खड्डा विधानसभा 4 - रामकोला विधानसभा 5 - हाटा विधानसभा

इनमें से चार पर भारतीय जानता पार्टी और एक पर सहयोगी दल सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी का कब्जा है.

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