Lok Sabha Election: मिशन 2024 के लिए बीजेपी ने NDA के सहारे बनाया मास्टर प्लान, क्या मिनिमम इन्वेस्टमेंट से निकलेगा मैक्सिमम आउटपुट?
BJP Master Plan: मिशन 2024 के लिए बीजेपी के मास्टर प्लान मिनिमम इन्वेस्टमेंट और मैक्सिमम आउटपुट का उद्देश्य क्या है, क्या इस इन्वेस्टमेंट के सहारे बीजेपी अपना पिछला प्रदर्शन दोहरा पाएगी?

BJP Plan For Lok Sabha Election: बीजेपी ने विपक्षी गठबंधन 'INDA' के जवाब में इस बार कुछ अन्य घटक दलों को जोड़कर 38 पार्टियों का महा एनडीए गठबंधन तैयार किया है. बीजेपी को मिलाकर यह संख्या 39 हो जाएगी. पिछली बार 2019 में अकेले दम बीजेपी ने 303 सीटें जीतीं थीं. वहीं, एनडीए गठबंधन को कुल 353 सीटें मिली थीं. अकेले बहुमत हासिल करने वाली बीजेपी को आखिर कई अन्य छोटे-छोटे दलों को अपने साथ जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी?
आइये जानते हैं कि बीजेपी के मिशन 2024 के लिए बनाए गए इस मास्टर प्लान मिनिमम इन्वेस्टमेंट और मैक्सिमम आउटपुट का क्या है उद्देश्य. बड़ा सवाल यह है भी है कि इस इन्वेस्टमेंट के सहारे क्या बीजेपी अपना पिछला प्रदर्शन दोहरा पाएगी?
एनडीए में ये है बीजेपी की ताकतः एनडीए और बीजेपी के पिछले लोकसभा चुनाव पर अगर नजर डाली जाए तो आंकड़े खुद-ब-खुद सारी कहानी बयां कर देंगे. बीजेपी ने पिछले दो आम चुनाव 2014 और 2019 दोनों में लगातार अपना प्रदर्शन सुधारा है. सीटों के लिहाज से भी और वोट परसेंट के लिहाज से भी.
बीजेपी ने जहां 2014 के लोकसभा चुनाव में 282 सीटें हासिल की थीं. वहीं, 2019 में यह आंकड़ा 303 तक पहुंच गया. इतना ही नहीं, उसे 2014 के मुकाबले करीब 33 प्रतिशत वोट भी अधिक मिले. सिर्फ 2019 के वोट परसेंट की बात की जाए तो बीजेपी को अकेले 37.36 परसेंट वोट मिले थे, जबकि गठबंधन एनडीए को कुल 45 परसेंट.
एनडीए की जीत में बीजेपी को हटा दें तो अन्य दलों को सिर्फ 7.64 परसेंट ही वोट मिले थे. सीटों की बात की जाए तो एनडीए के सभी दलों ने मिलकर 50 सीटें जीतीं थीं. कमोवेश यही आंकड़ा इस बार भी रहने वाला है.
बीजेपी ने क्यों बढ़ाई दलों की संख्या?: अगर इस पर गौर किया जाएगा तो यहीं बीजेपी का मिनिमम इन्वेस्टमेंट है. एनडीए में 5 से अधिक ऐसे दल हैं जिनके पास एक भी सीटें नहीं हैं, लेकिन उनका वोट बैंक हैं. इसी तरह से 9 दल ऐसे हैं जिनके पास मात्र एक सीट है.
इसी तरह दो सीटों वाली पार्टियां भी हैं. गठबंधन से इन सभी पार्टियों के वोटबैंक का बीजेपी को सीधे फायदा होगा. अगर उनकी सरकार बनती है तो अन्य दलों को उसे कम से कम भागीदारी देनी होगी. जैसा कि पिछली सरकार में भी उसने किया था.
नीतीश के नुकसान की एनडीए कर चुका है भरपाईः पिछले लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जेडयू एनडीए में शामिल थी. जिसकी बदौलत एनडीए को बिहार में 40 में 39 सीटें मिली थीं. इसमें से 17 बीजेपी और 16 नीतीश कुमार के खाते में गईं थीं.
अगर वोट परसेंट की बात की जाए तो बीजेपी को नीतीश की पार्टी से अधिक 23.58 परसेंट वोट मिले थे, जबकि जेडयू को 21.81 परसेंट वोट मिला था. इस बार नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन इंडिया का हिस्सा बन चुके हैं. इसकी भरपाई बीजेपी ने महाराष्ट्र में कर ली है.
बीजेपी ने वहां नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) और शिवसेना में दो फाड़ कराकर अजित पवार और एकनाथ शिंदे को अपने साथ कर लिया है. इसके अलावा बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी के दोनों धड़े चिराग पासपान और लोक जनशक्ति पार्टी (नेशनलिस्ट) के पशुपति पारस और चंदन सिंह भी एनडी के साथ आ गए हैं.
ये हैं एनडीए के खेवनहारः एनडीए की लीडर बीजेपी को जोड़कर 39 पार्टियां होती हैं. एनडीए की दिल्ली में हुई पहली बैठक में 38 पार्टियों में किस पार्टी से कौन-कौन शामिल हुआ था, उसकी सूची इस प्रकार है-
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से चिराग पासवान
- लोक जनशक्ति पार्टी (नेशनलिस्ट) से पशुपति पारस और चंदन सिंह
- HAM से जीतन राम मांझी और संतोष कुमार सुमन
- राष्ट्रीय लोक जनता दल से उपेंद्र कुशवाहा
- आजसू से सुदेश महतो
- जेजेपी से अजय चौटाला और दुष्यंत चौटाला
- शिरोमणि अकाली दल यूनाइटेड से सुखदेव सिंह ढींडसा और जस्टिस निर्मल सिंह
- अपना दल से अनुप्रिया पटेल और राजकुमार पाल.
- निषाद पार्टी से संजय निषाद और श्रवण निषाद
- सुहेलदेव भारतीय समाज से ओमप्रकाश राजभर
- महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी से दीपक धवलीकर
- शिवसेना शिंदे ग्रुप से एकनाथ शिंदे और राहुल शेवाले
- आरपीआई से रामदास अठावले
- प्रहार जनशक्ति पार्टी से ओमप्रकाश काडू और राजकुमार पटेल
- जन सुराज जनशक्ति पार्टी से विनय कोरे और सुमित कदम
- एनसीपी (अजित पवार) से अजित पवार और प्रफुल्ल पटेल
- गोरखा लिबरेशन फ्रंट से मान घीसिंग
- जनसेना पार्टी से पवन कल्याण और नाडेंडला मनोहर
ये भी हैं एनडीए में शामिलः एआईएडीएमके से पलानीसामी और एम थंबीदुरई, पीएमके से एके मुर्थी, टीएमएमके पार्टी से देवनाथ यादव और गुना सीलन, पीएनके पार्टी से एसी षणमुगम, पुथिया तामिलगाम पार्टी से के कृष्णासामी, टीएमएमके पार्टी से जॉन पांडियन, आईजेके पार्टी से टीआर परिवेंद्र, भरथधर्मा जनसेना पार्टी से तुसार बेलापल्ली, जीआरपी पार्टी से सीके जानी, ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस से एन रंगास्वामी, असम गण परिषद से अतुल बोरा और केशव महांता और यूपीपीएल से प्रमोद बोरो बैठक में शामिल हुए.
वहीं, एनडीपीपी से नेफ्यू रियो और अबू मेथा, नागा पीपल फ्रंट से डॉक्टर लोरो और आवांगबो न्यूमै, एनपीपी से कोनराड संगमा इसमें शामिल हुए. यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी से एलांट्री एफ ढकर (Allantry Fr Dkhar) खराब सेहत की वजह से बैठक में शामिल नहीं हो सके थे लेकिन उन्होंने सहमति पत्र भेज दिया था. इसके अलावा, एसकेएम से प्रेम सिंह तमांग, आईपीएफटी से शुक्लाचरण नोटिया, मिजो नेशनल फ्रंट से सी लालरोशंगा और तमिल मनीला कांग्रेस से जीके वासन दिल्ली में हुई एनडीए पहली बैठक में शामिल हुए थे.
ये भी पढ़ेंः Lok Sabha Election: इन राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट से तय होगी लोकसभा की तस्वीर, जानें पूरा गणित
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL

















