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'19 के खिलाड़ी': बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती बने हुए हैं नवीन पटनायक

ओडिशा में लोकसभा की 21 सीटों के साथ-साथ विधानसभा की कुल 147 सीटों पर चार चरणों में चुनाव हो रहे हैं. तीन चरणों के चुनाव खत्म हो चुके हैं और एक चरण बाकी है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में नवीन पटनायक की पार्टी ने 21 में से 20 सीटें जीती थीं, वहीं विधानसभा चुनाव में भी जबरदस्त सफलता हासिल की थी.

Lok Sabha Election 2019: पिछले लोकसभा चुनाव में ‘मोदी लहर’ सबसे चर्चित शब्द रहा. बीजेपी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे के साथ चुनावी समर में उतरने का फैसला किया. नजीते आए तो बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और अकेले बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया. देश के सियासी मानचित्र पर ‘मोदी लहर’ ने बीजेपी को उभार दिया लेकिन ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य में इस लहर को प्रभावहीन कर दिया. उनकी पार्टी बीजू जनता दल ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों को बुरी तरह से हराया. राज्य की 21 लोकसभा सीटों में से बीजेडी को 20 सीटों पर जीत मिली, जबकि एक सीट बीजेपी के खाते में गई. मुख्य विरोधी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाई थी.

इस बार भी नवीन पटनायक पर सबकी नजरें होंगी. साल 2014 के आंकड़ें बताते हैं कि वे इस बार बड़े खिलाड़ी हैं. वे अकेले चुनाव लड़ रहे हैं. ओडिशा में एक साथ लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव (147 सीटें) चार चरणों में हो रहे हैं. नतीजे 23 मई को आने हैं लेकिन नवीन पटनायक इतने आत्मविश्वास में हैं कि उन्होंने नतीजों से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्यौता दे दिया.

ओडिशा में साल 2014 के विधानसभा चुनाव में नवीन पटनायक ने 147 में से 117 सीटें हासिल की. वहीं कांग्रेस के 16 कैंडिडेट ही चुनाव जीतने में कामयाब हो पाए. बीजेपी ने उस चुनाव में 10 सीटें जीती थीं. दो सीटें निर्दलीय और समता क्रांति दल और सीपीएम एक-एक सीट जीतने में कामयाब हुई थी. वोट प्रतिशत के मामले में भी नवीन पटनायक दूसरी पार्टियों के मुकाबले कहीं ज्यादा आगे रहे. 2014 के विधानसभा चुनाव में नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी को कुल 43.4 फीसदी वोट हासिल हुए थे. 25.7 फीसदी वोट के साथ कांग्रेस पार्टी दूसरे नंबर पर रही थी. वहीं लोकसभा चुनाव में भी वोट शेयर के मामले में बीजेडी सबसे आगे रही. बीजेडी को 44.10% वोट मिले थे. वोट शेयर के मामले में कांग्रेस 26% वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रही हालांकि उसे एक भी सीट नहीं मिली. बीजेपी को 21.50% वोट मिले थे.

यूपी में एसपी-बीएसपी के गठबंधन के बाद से माना जा रहा है ओडिशा बीजेपी की सत्ता में वापसी के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण राज्य है. लेकिन बीजेपी को इस राज्य में जीत हासिल करने के लिए नवीन पटनायक की मुश्किल चुनौती का सामना करना है.

72 साल के नवीन पटनायक 2000 में पहली बार ओडिशा के सीएम बने थे. तब से लेकर अब तक नवीन पटनायक लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं और 19 साल से सीएम की कुर्सी पर बने हुए हैं. 2009 के चुनाव से पहले नवीन पटनायक ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था और अकेले ही राज्य का चुनाव लड़ा. नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल पर एनडीए से अलग होने का कोई प्रभाव नहीं पड़ा. बीजेडी ना सिर्फ 2009 का चुनाव जीतने में कामयाबी हुई, बल्कि 2014 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद पटनायक की जीत का अतंर विरोधी पार्टियों के मुकाबले बढ़ गया.

हालांकि चुनाव से पहले नवीन पटनायक को झटका भी लगा. क़रीब 10-12 सालों तक उनके बेहद करीबी रहे बैजयंत जे पांडा उनका साथ छोड़ दिया और अब बीजेपी के साथ चले गए. ओडिशा के केंद्रपारा सीट से बीजेपी ने इस बार उन्हें उम्मीदवार बनाया है. 2018 जनवरी में नवीन पटनायक ने बिजयंत पांडा को पार्टी से निलंबित कर दिया था. उनपर पार्टी विरोधी गतिविधि खासकर मुखयमंत्री नवीन पटनायक के खिलाफ बयानबाजी करने का आरोप लगाया था. हालांकि इस सबके बीच चुनाव जारी है, नतीजे का इंतजार सबको है लेकिन ये कहने में कोई दोराय नहीं है कि नवीन पटनायक बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती बने हुए हैं.

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