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लोकसभा चुनाव: कोर वोटर भी नहीं संभाल पाईं बीएसपी-एसपी, बीजेपी को जिताने के लिए टूटी जाति की दीवार!

देश की 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव के ऐतिहासिक नतीजे आ चुके हैं. बीजेपी ने ना सिर्फ बहुमत के लिए जरूरी 272 का आंकड़ा हासिल किया बल्कि इसे पार करते हुए 303 का आंकड़ा छुआ. 2014 के चुनाव में बीजेपी को 282 सीटें मिली थीं.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में जिस तरह बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टियों की बंपर जीत मिली है उससे एक बात साफ है कि जाति-पाति की राजनीति को बड़ा झटका लगा है और जाति की दीवार टूटी है. बीजोपी को मिला वोट शेयर इसका सबका बड़ा सबूत है, देश के 17 राज्य ऐसे हैं जहां बीजेपी को 50% से ज्यादा वोट मिला है. कल जीत के बाद अपने पहले भाषण में पीएम मोदी ने भी कहा था कि अब देश में सिर्फ दो ही जाति है, एक गरीब और दूसरा जो गरीबी मिटाने में मदद कर रहा है.

वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कल कहा, ''मैंने 2018 की भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में अपने कार्यकर्ताओं से कहा था कि महागठबंधन के विरुद्ध 50% की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में उतरें. आज भाजपा अध्यक्ष के नाते मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि देश के 17 राज्यों में जनता ने हमको 50% से ज़्यादा आशीर्वाद दिया है.''

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां मायावती की बीएसपी और अखिलेश यादव की एसपी ने जाति के चक्रव्यूह से मोदी के विजय रथ को रोकने कोशिश की लेकिन इसमें बुरी तरह नाकामयाब हुए. एसपी और बीएसपी गठबंधन का आधार ये था कि यूपी में 20% मुस्लिम, 20% अनुसूचित जाति और 7% यादव हैं. इस हिसाब से कुल 47% इस गठबंधन के साथ जाएंगे. उन्हें ये भी लगा कि 47% वोट में अगर एंटी इनकम्बेंसी वेव के वोट भी मिल गए तो जीत पक्की है, सारे पॉलिटिकल पंडित भी इसी जातीय गणित में बह गए.

इसे इस उदाहरण के समझें कि अखिलेश यादव की पत्नी और दो भाई भी हार गए यानी दोनों को मिलाकर 37.3% वोट मिला. अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव की सीट कन्नौज में मुस्लिम यादव और अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या ही 55% थी. लेकिन डिंपल को सिर्फ 48.2 फीसदी वोट मिले, जबकि बीजेपी के सुब्रत पाठक को 49.3% वोट मिले.

गठबंधन में बीएसपी को सीटों का फायदा तो हुआ लेकिन उसका वोट शेयर कम हो गया, वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के ना सिर्फ वोट शेयर में गिरावट आई बल्कि सीटें भी घटी हैं. वहीं दूसरी ओर बीजेपी के प्रदर्शन की बात करें तो भले ही यूपी में सीटें घटी हों लेकिन करीब 50% वोट शेयर मिला है. बीएसपी को इस बार 19% वोट मिला है तो समाजवादी पार्टी को 18% वोट मिले हैं. सीटों पर नजर डालें तो बीजेपी को 61 सीटें, बहुजन समाज पार्टी को 10 सीटें और समाजवादी पार्टी को 5 सीटें ही मिली हैं. 2014 के प्रदर्शन की बात करें तो बीजेपी को 43%, बीएसपी को 20% और एसपी को 22% वोट मिला था.

इस परिणाम से साफ है कि उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर बीजेपी को सभी जातियों का वोट मिला है वहीं बीएसपी-एसपी अपने कोर वोटर को भी नहीं संभाल पायी है. दलितों को बीएसपी का कोर वोटर माना जाता है तो वहीं समाजवादी पार्टी का कोर वोटर यादव है. वहीं अगर मुस्लिम वोट की बात करें तो एसपी, बीएसपी और कांग्रेस में बंटता रहा है. वोट प्रतिशत पर नजर साफ पता चलता है कि गठबंधन की दोनों पार्टियाों नए वोटरों को जोड़ने के बजाए अपना वोट बैंक भी खो दिया. वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने ना सिर्फ सवर्ण वोटर को जोड़े रखा बल्कि बीएसपी और एसपी के वोटरों में भी सेंध लगाई.

सिर्फ यूपी ही नहीं बीजेपी ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपने वोट शेयर में इजाफा किया है. देश के 17 राज्य ऐसे हैं जहां बीजेपी ने 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट शेयर हासिल किया है. इनमें दिल्ली, झारखंड, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान और मध्यप्रदेश ऐसे राज्य 50% से भी ज्यादा वोट प्रतिशत मिला है. बीजेपी अब इसी वोट शेयर के दम पर दावा कर रही है कि प्रधानमंत्री मोदी को जिताने के लिए जनता ने जाति की दीवारों को तोड़ कर वोट किया है.

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