एक्सप्लोरर

Election 2023: कैसे मिलता है राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न? जानिए इससे जुड़े हर नियम

Election News: किसी भी पार्टी या निर्दलीय प्रत्याशी को चुनाव चिह्न आवंटित करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास होता है. अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों के चुनाव चिह्न एक जैसे भी हो सकते हैं.

Rules for Symbol Allotment: बात लोकसभा चुनाव की हो या फिर विधानसभा चुनाव की, सभी में चुनाव चिह्न की भूमिका काफी अहम होती है. चुनाव चिह्न के आगे बटन दबाकर ही हम किसी भी प्रत्याशी को वोट देते हैं. राष्ट्रीय पार्टियां हों या छोटी पार्टियां या फिर निर्दलीय प्रत्याशी, सभी को एक चुनाव चिह्न दिया जाता है.

रजिस्टर्ड पार्टियों को जहां पहले से सिंबल मिला होता है तो वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों को नॉमिनेशन प्रोसेस और चुनाव से कुछ दिन पहले यह चुनाव चिह्न मिल जाता है, लेकिन इसे लेने के लिए भी काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है. यहां हम आपको बता रहे हैं कि आखिर कैसे पार्टियों और उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न मिलता है.

इस अधिकार के तहत चुनाव आयोग देता है सिंबल

भारत में चुनाव कराने से लेकर पार्टियों को मान्यता और उन्हें चुनाव चिह्न देने का काम चुनाव आयोग ही करता है. चुनाव आयोग को संविधान के आर्टिकल 324, रेप्रजेंटेशन ऑफ द पीपुल ऐक्ट 1951 और कंडक्ट ऑफ इलेक्शंस रूल्स 1961 के माध्यम से यह पावर मिलती है. निर्वाचन आयोग The Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के मुताबिक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों को चुनाव चिन्ह आवंटित करने की पावर मिलती है.

इस प्रक्रिया के तहत चुनाव चिह्न का किया जाता है आवंटन

चुनाव आयोग के पास इस तरह के सिंबल की भरमार होती है. वह चुनाव चिह्नों के लिए दो लिस्ट बनाकर रखता है. पहली लिस्ट में वे सिंबल होते हैं, जिनका आवंटन पिछले कुछ साल में हुआ है, जबकि दूसरी लिस्ट में ऐसे सिंबल हैं जिनका आवंटन किसी को नहीं हुआ है. चुनाव आयोग अपने पास रिजर्व में कम से कम ऐसे 100 निशान हमेशा रखता है, जो अब तक किसी को नहीं दिए गए हैं. इनमें से ही किसी भी नए दल या फिर आजाद उम्मीदवार को चुनाव चिह्न दिया जाता है. हालांकि कोई दल अगर अपना चुनाव चिह्न खुद चुनाव आयोग को बताता है और वह सिंबल किसी के पास पहले से नहीं है तो आयोग उस पार्टी को उसे अलॉट कर देता है. वहीं राष्ट्रीय दलों को रिजर्व चुनाव चिह्न मिल जाता है.

राष्ट्रीय पार्टियों के रिजर्व चुनाव चिह्न नहीं होते दूसरे को अलॉट 

राष्ट्रीय दलों जैसे कांग्रेस, बीजेपी, टीएमसी, आप को जो चुनाव चिह्न मिले हैं वो रिजर्व कैटेगरी में आते हैं. इन चिह्नों को किसी और को नहीं दिया जाता है. क्षेत्रीय दलों को भी अपने राज्य या इलाके के लिए फिक्स चुनाव चिह्न मिलता है, लेकिन जब वह किसी और राज्य में चुनाव लड़ने जाते हैं तो वह बदल भी सकता है. यह पहले से उसकी उपलब्धता पर निर्भर करता है. जैसे महाराष्ट्र में शिवसेना का चुनाव चिह्न भी तीर-कमान था, जबकि झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा का सिंबल भी यही है.

पशु और पक्षी से जुड़े चुनाव चिह्न भी नहीं किए जाते हैं आंटित

चुनाव आयोग तरह-तरह के सिंबल प्रत्याशियों को अलॉट करता है, लेकिन अब पशु-पक्षी से जुड़े सिंबल कैंडिडेट्स को नहीं दिए जाते. ऐसा एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स के विरोध के बाद से हुआ है. पहले जब ऐसा सिंबल मिलता था, तो उक्त प्रत्याशी उस तरह के पशु या पक्षी को लेकर परेड कराने लगते थे. इसे क्रूरता माना गया था.

ये भी पढ़ें

Chhattisgarh Election 2023: 'फूट डालो और राज करो की योजना यहां नहीं चलेगी', CM बघेल का गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

खरगे-दिग्विजय से रवनीत सिंह बिट्टू तक, ये 24 सांसद राज्यसभा से होंगे रिटायर, जानें कैसे बदलेगा गणित
खरगे-दिग्विजय से बिट्टू तक, ये 24 सांसद राज्यसभा से होंगे रिटायर, जानें कैसे बदलेगा गणित
Rajya Sabha Election 2026: गुजरात से राजस्थान तक, 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान, जानिए कब होगी वोटिंग
गुजरात से राजस्थान तक, 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का ऐलान, जानिए कब होगी वोटिंग
फाल्टा सीट पर री-पोलिंग पूर्ण, 87.73 प्रतिशत हुई वोटिंग, BJP उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने किया जीत का दावा, जानें कब आएंगे नतीजे
फाल्टा सीट पर री-पोलिंग पूर्ण, 87.73 प्रतिशत हुई वोटिंग, BJP उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने किया जीत का दावा, जानें कब आएंगे नतीजे
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने विधायक के रूप में शपथ ली
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने विधायक के रूप में शपथ ली

वीडियोज

Bollywood News: रश्मिका वर्सेस कृति! इंस्टाग्राम पर शुरू हुई जुबानी जंग, क्या है इसके पीछे का बड़ा सच? (22-05-26)
Vasudha: Chauhan parivaar में लौटी खुशियां! अब फैमिली ट्रिप पर करीब आएंगे Dev-Vasudha
Cocktail 2 Song ‘माशूका’ पर Copy विवाद, Trolls को Pritam ने बताया अपना “Unpaid PR Team”
कॉकरोच जनता पार्टी को मिला बॉलीवुड का Support, Instagram Followers में BJP-Congress को छोड़ा पीछे
Twisha Sharma Case: पुलिस स्टेशन में मीडिया पर भड़के वकील, Giribala ने साधी चुप्पी! | Breaking | MP

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
Heat Wave India: दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में भारत के 97! ओडिशा में पारा 48 पार, प्रचंड गर्मी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में भारत के 97! ओडिशा में पारा 48 पार, टूट गए सारे रिकॉर्ड
Twisha Sharma Case Live: ट्विशा के पति समर्थ सिंह पर काउंसिल ऑफ इंडिया का चला चाबुक, वकालत का लाइसेंस रद्द
Live: ट्विशा के पति समर्थ सिंह पर काउंसिल ऑफ इंडिया का चला चाबुक, वकालत का लाइसेंस रद्द
'करो या मरो' मैच से पहले KKR को 440 वोल्ट का झटका, टीम का सबसे बड़ा धुरंधर IPL 2026 से बाहर
'करो या मरो' मैच से पहले KKR को 440 वोल्ट का झटका, टीम का सबसे बड़ा धुरंधर IPL 2026 से बाहर
Box Office: 11 साल पहले आई कंगना रनौत की इस फिल्म ने कमाया था 541% प्रॉफिट, शाहरुख खान को दी थी मात
11 साल पहले आई कंगना रनौत की इस फिल्म ने कमाया था 541% प्रॉफिट, शाहरुख खान को दी थी मात
OBC में क्रीमी लेयर के लिए आरक्षण की मांग करने वालों से SC ने पूछा- तुम्हारे माता-पिता IAS, फिर भी चाहिए कोटा?
OBC में क्रीमी लेयर के लिए आरक्षण की मांग करने वालों से SC ने पूछा- तुम्हारे माता-पिता IAS, फिर भी चाहिए कोटा?
'पंजाब राज्यसभा सीट बेचने पर कितना पैसा मिला बताऊं', 'गद्दार' कहा गया तो बुरी तरह भड़के हरभजन सिंह
'पंजाब राज्यसभा सीट बेचने पर कितना पैसा मिला बताऊं', 'गद्दार' कहा गया तो बुरी तरह भड़के हरभजन सिंह
खड़े-खड़े डिस्चार्ज हो जाती है कार की बैटरी, इन आसान टिप्स से बच जाएंगे हजारों रुपये
खड़े-खड़े डिस्चार्ज हो जाती है कार की बैटरी, इन आसान टिप्स से बच जाएंगे हजारों रुपये
SDM से ADM बने यूपी के 104 अधिकारी, जानें प्रमोशन के बाद कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?
SDM से ADM बने यूपी के 104 अधिकारी, जानें प्रमोशन के बाद कितनी बढ़ जाएगी सैलरी?
Embed widget