IAS-IPS का सपना पूरा करने वाली UPSC आखिर बनी कैसे? जानिए पूरा इतिहास
UPSC History: UPSC की शुरुआत ब्रिटिश काल में 1926 में लोक सेवा आयोग के रूप में हुई थी. साल 1950 में यह भारतीय संविधान के तहत संघ लोक सेवा आयोग बना.

संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC आज देश की सबसे टॉप भर्ती संस्थाओं में गिना जाता है. IAS, IPS, IFS जैसी शीर्ष सेवाओं में अधिकारियों की भर्ती इसी आयोग के जरिए होती है. लेकिन UPSC की शुरुआत आजाद भारत में नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन के दौर में हुई थी. समय के साथ इसमें बड़े बदलाव हुए और यह संस्था भारतीय लोकतंत्र व प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ बन गई.
UPSC की कहानी 1854 से शुरू होती है, जब मैकॉले समिति (Macaulay Committee) की सिफारिशों के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी की सिफारिश आधारित भर्ती प्रणाली को खत्म कर मेरिट आधारित चयन की व्यवस्था शुरू की गई. इसी के बाद इंडियन सिविल सर्विस (ICS) की प्रतियोगी परीक्षाएं शुरू हुईं. हालांकि शुरुआत में ये परीक्षाएं केवल लंदन में आयोजित होती थीं, जिससे भारतीय युवाओं की पहुंच काफी सीमित थी.
1922 में भारत में हुई पहली ICS परीक्षा
भारतीयों की बढ़ती मांग और प्रशासन में उनकी भागीदारी को देखते हुए 1922 में पहली बार ICS परीक्षा भारत में आयोजित करने की अनुमति दी गई. इससे भारतीय छात्रों को उच्च प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश का बड़ा अवसर मिला.
1926 में बनी पहली पब्लिक सर्विस कमीशन
इसके बाद 1 अक्टूबर 1926 को ली आयोग (Lee Commission, 1924) की सिफारिशों और भारत सरकार अधिनियम 1919 के आधार पर भारत में पहली पब्लिक सर्विस कमीशन की स्थापना की गई. इसके पहले अध्यक्ष सर रॉस बार्कर बने. यह संस्था सरकारी नौकरियों में निष्पक्ष भर्ती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी.
1935 में मिला नया स्वरूप
ब्रिटिश सरकार ने भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत इस संस्था को और मजबूत किया और इसका नाम फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन रखा गया. अब यह केंद्र और प्रांतीय सरकारों दोनों के लिए भर्ती परीक्षाएं आयोजित करने लगी.
1950 में बना संघ लोक सेवा आयोग
भारत की आजादी और संविधान लागू होने के बाद 26 जनवरी 1950 को यह संस्था आधिकारिक रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) बन गई. इसी समय ब्रिटिश कालीन ICS को पुनर्गठित कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का स्वरूप दिया गया.
संविधान में मिला विशेष दर्जा
UPSC एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिसका उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 में किया गया है. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है. आयोग को वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता दी गई है, ताकि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे.
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