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IAS Success Story: इंजीनियर से UPSC टॉपर तक, जानिए कैसे तय किया हिमाद्री ने यह सफर

साल 2018 की टॉपर हिमाद्री कौशिक ने शेयर किए यूपीएससी सीएसई इंटरव्यू में बेहतरीन प्रदर्शन करके अपनी रैंक बढ़ाने के खास टिप्स.

Success Story Of IAS Topper Himadri Kaushik: साल 2018 की यूपीएससी सीएसई परीक्षा में हिमाद्री ने 97वीं रैंक हासिल करके टॉपर्स की लिस्ट में अपनी जगह बनाई थी. इसके पहले भी हिमाद्री का एक बार सेलेक्शन हो चुका है और दोनों ही बार उनके इंटरव्यू में बहुत अच्छे अंक थे. इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से आने वाली हिमाद्री मानती हैं कि इस परीक्षा में अपनी रैंक को बेहतर करने में साक्षात्कार की बड़ी भूमिका होती है. इसलिए कैंडिडेट्स को मेन्स के बाद के समय को साक्षात्कार की तैयारी में लगाना चाहिए और जितना संभव हो परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में हिमाद्री ने खासतौर पर यूपीएससी सीएसई परीक्षा के इंटरव्यू को अच्छे नंबरों से पास करने के लिए कुछ खास टिप्स दिए. जानते हैं विस्तार से.

इंजीनियर से यूपीएससी टॉपर –

हिमाद्री पढ़ाई में शुरू से अच्छी थी और इकोनॉमिक्स जोकि उनका ऑप्शनल भी था, उन्हें बचपन से बहुत पसंद था और उनके इसमें सबसे अच्छे अंक आते थे. इस विषय को उन्होंने अंत तक नहीं छोड़ा. साल 2015 में हिमाद्री ने बिट्स गोआ से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली और उसी साल पहला यूपीएससी अटेम्पट भी दिया. वे कहती हैं कि मैं खुद नहीं जानती कि इस साल मेरा प्री कैसे क्लियर हो गया. लेकिन हिमाद्री परीक्षा के लिए तैयार नहीं थी और मेन्स में वे रह गईं. इसके बाद उन्होंने एक साल जमकर तैयारी की और 2016 में अपना दूसरा अटेम्पट दिया. इस साल उन्हें 304 रैंक मिली और इंडियन रेवेन्यू सर्विस एलॉट हुई जिसके अंडर वे ट्रेनिंग भी करने लगी. साल 2017 में हिमाद्री ने परीक्षा नहीं दी पर अगले ही साल यानी 2018 में वे लीव लेकर फिर परीक्षा में बैठी और इस साल 97वीं रैंक के साथ सफल हुईं. अपने आखिरी दोनों ही अटेम्पट्स में हिमाद्री ने इंटरव्यू में 195 और 193 अंक हासिल किए. वे मानती भी हैं कि इंटरव्यू में अच्छा प्रदर्शन करके आप अपनी रैंक को बेहतर बना सकते हैं ताकि आपको मन की सर्विस मिल जाए.

आप यहां हिमाद्री कौशिक द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू का वीडियो भी देख सकते हैं

भाषा से नहीं पड़ता फर्क –

हिमाद्री कहती हैं कि सबसे पहले तो कैंडिडेट्स को अपनी कम्यूनिकेशन लैंग्वेज को लेकर किसी प्रकार की शंका नहीं रखनी चाहिए. हिंदी, इंग्लिश किसी भी भाषा में बात करें इससे फर्क नहीं पड़ता साथ ही इस बात से भी फर्क नहीं पड़ता, अगर आप खुद को या अपनी बात को बहुत अच्छे से एक्सप्रेस नहीं कर पाते. वे कहती हैं कि मैंने ऐसे भी कैंडिडेट्स को इंटरव्यू में टॉप करते देखा है जो स्टैमर करते थे और ऐसे को भी जो बहुत भली प्रकार अपने आप को एक्सप्रेस नहीं कर पाते थे. पर इस बात से पैनल को फर्क नहीं पड़ता न ही वे इसके आधार पर आपको जज करते हैं.

दरअसल हर कोई अच्छा ओरेटर नहीं हो सकता और पैनल यह बात जानता है. हिमाद्री दूसरी अहम बात कहती हैं कि यह बात अपने दिमाग से निकाल दें कि साक्षात्कार में आपके ज्ञान की परख होगी, वह पहले ही हो चुकी है तभी आप इस राउंड तक पहुंचे हैं. हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप अपना डैफ भली प्रकार तैयार न करें. उसमें भरी चीजों की जहां तक संभव हो पूरी जानकारी रखें. फैक्ट्स और फिगर्स भूलते भी हैं तो इससे आपके अंक नहीं कटेंगे.

कैजुअल भाषा का न करें प्रयोग –

हिमाद्री आगे कहती हैं कि यह आपकी जिंदगी का बहुत बड़ा पल है इसे सीरियसली लें. कुछ सॉफ्ट स्किल्स होती हैं जिनका ध्यान रखना साक्षात्कार में बहुत फायदा देता है. उन्हीं में से एक है बातचीत के दौरान भाषा को कैजुअल न बनाना. गंभीरता के साथ अपनी बात को कहें, जितना पूछा गया है उतना ही बोलें, बिंदु से भटकें नहीं और उत्तर नहीं आता तो मुस्कुराकर न कह दें. याद रहे मुस्कुराकर,हंसकर नहीं. स्लैंग लैंग्वेज का इस्तेमाल कतई न करें.

दूसरी जरूरी बातें तब शुरू होती हैं जब आपसे किसी मुद्दे पर आपकी राय मांगी जाती है. कोशिश करें बैलेंस्ड आंसर दें पर अपना ओपीनियन रखने का दबाव दिया जाए तो रखें, उन्हें खुश करने वाले या हां में हां मिलाने वाले उत्तर न दें. अगर किसी बात पर बात आगे बढ़ जाए तो अपने ओपीनियन को लेकर रिजिड न हों और अड़े न रहें. मैं इस बारे में पढ़ूंगा या हो सकता है मुझे इसकी जानकारी नहीं है जैसी बात से बात खत्म कर सकते हैं. उनकी बात मान लेने में बुराई नहीं है. अटैकिंग मोड में न आएं और न ही अड़ियल रवैया अपनाएं.

इंडियन एग्जाम्पल्स दें तो बेहतर –

हिमाद्री आगे बताती हैं कि कई बार पैनल आपको प्रोवोग करने की कोशिश करता है पर इस बात को समझें और संयम बनाए रखें. अगली महत्वपूर्ण बात आती है उदाहरण की. वे कहती हैं कि किसी भी क्षेत्र से कोई सवाल बनता है तो कोशिश करें कि उस क्षेत्र के किसी महारथी का जब उदाहरण देने का नंबर आए तो इंडियन एग्जाम्पल्स दें. ये अच्छा प्रभाव डालते हैं.

अंत में हिमाद्री यही कहती हैं कि पेपर पढ़ते रहें और अपने दोस्तों से जरूरी मुद्दे डिस्कस करें ताकि अलग ओपीनियन आपको मिल सकें. एक अहम बात है मॉक टेस्ट देना. वे कहती हैं इतने बड़े साक्षात्कार के लिए बिना तैयारी के जाना बेवकूफी है. इसलिए कुछ मॉक टेस्ट दें ताकि माहौल से परीचित हो सकें. हालांकि मॉक टेस्ट के रिजल्ट को अपने दिल से न लगाएं. उन्हें भी मॉक टेस्ट में कहा गया था कि वे अच्छा बोलती हैं पर उनके पास ज्ञान की कमी है. उन्होंने इस बात को कतई अपने दिमाग पर नहीं चढ़ने दिया और पूरे कांफिडेंस से इंटरव्यू दिया. वे कहती भी हैं कि जिस कांफिडेंस के साथ आप रूम में एंटर करते हैं, वहीं से आपकी छवि बननी या बिगड़नी शुरू हो जाती है.

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