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राजस्थान की नौकरियों की रीढ़ है RPSC, जानिए इसकी स्थापना की कहानी

RPSC Histroy: 22 दिसंबर 1949 को स्थापित राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) आज राज्य की प्रमुख भर्ती एजेंसी है. आइए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं...

राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के लिए RPSC एक जाना-पहचाना नाम है. राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) से लेकर शिक्षक, इंजीनियर और अन्य कई महत्वपूर्ण पदों पर भर्ती कराने वाला राजस्थान लोक सेवा आयोग आज राज्य की सबसे प्रमुख भर्ती संस्था है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि RPSC की स्थापना कब हुई थी और इसकी शुरुआत कैसे हुई थी? अगर नहीं तो आइए जानते हैं...

दरअसल, राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्थापना 22 दिसंबर 1949 को हुई थी. हालांकि इसकी कहानी राजस्थान के गठन से भी पहले शुरू होती है. साल 1923 में ली कमीशन ने भारत में केंद्रीय लोक सेवा आयोग बनाने की सिफारिश की थी. उस समय प्रांतों में अलग लोक सेवा आयोग बनाने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था. इसलिए राज्यों को अपने स्तर पर सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और प्रशासन की व्यवस्था संभालनी पड़ती थी.

जब राजस्थान का गठन हुआ, तब 22 रियासतों को मिलाकर नया राज्य बनाया गया था. उस समय केवल जयपुर, जोधपुर और बीकानेर रियासतों में ही लोक सेवा आयोग जैसी व्यवस्था मौजूद थी. बाकी रियासतों में भर्ती की अलग-अलग प्रणालियां थीं.

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कब हुई थी स्थापना?

राजस्थान के एकीकरण के बाद पूरे राज्य के लिए एक समान भर्ती प्रणाली की जरूरत महसूस हुई. इसी को ध्यान में रखते हुए 20 अगस्त 1949 को राजस्थान राजपत्र में राजस्थान लोक सेवा आयोग अध्यादेश प्रकाशित किया गया. इसके बाद 22 दिसंबर 1949 को आयोग की स्थापना से जुड़ी अधिसूचना जारी हुई और इसी दिन से राजस्थान लोक सेवा आयोग आधिकारिक रूप से अस्तित्व में आया.

आयोग के गठन के साथ ही विभिन्न रियासतों में चल रही लोक सेवा आयोग जैसी संस्थाओं को समाप्त कर दिया गया. नए आयोग को राज्य में सरकारी सेवाओं के लिए भर्ती, चयन और अन्य प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई.

शुरुआत में क्या?

शुरुआत में आयोग में केवल एक अध्यक्ष और दो सदस्य थे. राजस्थान हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सर एस. के. घोष को आयोग का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. बाद में देवी शंकर तिवारी और एन. आर. चंदोरकर को सदस्य बनाया गया. इसके बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के पूर्व सदस्य एस. सी. त्रिपाठी को भी आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था.

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अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

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