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​मोदी पाकिस्तान के लिए सख्त, भारत के लिए बेहतर; पाक छात्र बोले- हमें भी चाहिए ​​मजबूत​ नेतृत्व

पाकिस्तानी छात्रों ने भारत-पाक संबंधों पर राय दी! व्यापार, क्रिकेट और सांस्कृतिक आदान-प्रदान क्या रिश्ते सुधार सकते हैं? युवाओं को बदलाव चाहिए, लेकिन क्या नेता कदम उठाएंगे? जानिए उनकी सोच!

पाकिस्तान के राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के छात्रों ने भारत-पाकिस्तान संबंधों पर अपने विचार साझा किए. उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की इच्छा आम लोगों में है, लेकिन नेताओं की ओर से पहल की कमी है. पाकिस्तानी छात्रों का मानना है कि अगर भारत संबंध सुधारने के लिए पहल करे तो पाकिस्तान सरकार इसका स्वागत करेगी. बेहतर संबंधों से व्यापार बढ़ेगा और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा. 2018 में इमरान खान की सरकार ने संबंध सुधारने की कोशिश की थी और बिलावल भुट्टो भी भारत आए थे.

पाकिस्तान के युवाओं की चिंताएं 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता है, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. बेरोजगारी बढ़ रही है और युवाओं को नौकरियां नहीं मिल रही हैं. अंतिम सेमेस्टर की छात्रा मलाइका सरवर ने कहा, मैं अंतिम सेमेस्टर में हूं, लेकिन मेरे करियर का क्या होगा, इसका डर लग रहा है.

संबंध सुधार के उपाय

  • व्यापार फिर से शुरू होना चाहिए
  • क्रिकेट सीरीज होनी चाहिए
  • करतारपुर कॉरिडोर जैसे और प्रयास होने चाहिए
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ना चाहिए

मोहम्मद अब्बास खान की राय 

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के छात्र अब्बास भारत को पसंद करते हैं और दिल्ली-मुंबई आना चाहते हैं. वे मानते हैं कि भारत पाकिस्तान से आगे है. उनका कहना है, मोदी भले ही पाकिस्तान के लिए अच्छे नहीं हैं, लेकिन भारत के लिए बेहतर हैं. भारत की सरकार अच्छी है. भारत में युवाओं को काम मिल रहा है.

धार्मिक कट्टरता का मुद्दा 

दोनों देशों में धार्मिक कट्टरता बढ़ रही है. अब्बास ने कहा पाकिस्तान में यह धारणा बनाई गई कि हिंदू-मुसलमान साथ नहीं रह सकते. सच्चाई यह है कि दोनों समुदाय सालों-साल साथ रहे हैं.

मलाइका सरवर के विचार 

राजनीति विज्ञान की छात्रा मलाइका के अनुसार, आजादी के बाद से भारत-पाकिस्तान के संबंध खराब रहे हैं. 1965 की जंग के बाद यही सिखाया गया कि भारत हमारा दुश्मन है. भारत में भी ऐसा ही है.

उन्होंने स्वीकार किया, जब भारत क्रिकेट में हारता है, तो मुझे खुशी होती है, चाहे वह ऑस्ट्रेलिया से हारे या इंग्लैंड से. इससे पता चलता है कि हमारे दिमाग में कितनी नफरत भरी गई है.

सईद जरकाम अब्बास का विश्लेषण 

सईद का कहना है, ब्रिटिश शासकों के जाने के बाद हमारी शक्ति एलीट वर्ग के पास आ गई. इसका असर आज भी है. सरकारें संबंध नहीं सुधारना चाहतीं.

सेना की भूमिका

मलाइका ने स्पष्ट कहा, पाकिस्तान में कुछ ही संस्थाएं शक्ति को नियंत्रित करती हैं. ये हमारे लोकतंत्र को मजबूत नहीं होने दे रही हैं. सेना इसमें शामिल है. पाकिस्तान के युवाओं का मानना है कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के लिए आम लोगों को आगे आना होगा और दोनों सरकारों को सकारात्मक पहल करनी होगी.

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